मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित प्रतिष्ठित सेज यूनिवर्सिटी (SAGE University) इन दिनों गंभीर विवादों के घेरे में आ गई है। विश्वविद्यालय परिसर के भीतर उस वक्त भारी अफरा-तफरी मच गई, जब सैकड़ों की संख्या में छात्र हॉस्टल की मेस में मिलने वाले खाने के विरोध में सड़कों पर उतर आए। छात्रों का आरोप है कि उन्हें परोसे जाने वाले भोजन में कीड़े और मकोड़े निकल रहे हैं, जो सीधे तौर पर उनकी सेहत के साथ खिलवाड़ है। इस घटना के बाद से यूनिवर्सिटी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं और मामला राजनीतिक गलियारों तक भी पहुंच गया है।
300 से अधिक छात्रों का फूटा गुस्सा, जमकर किया प्रदर्शन
रविवार को स्थिति तब बेकाबू हो गई जब हॉस्टल में रहने वाले 300 से ज्यादा छात्र अपनी कक्षाओं का बहिष्कार कर यूनिवर्सिटी कैंपस में जमा हो गए। छात्रों के चेहरे पर गुस्सा और नाराजगी साफ झलक रही थी। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना था कि वे लंबे समय से मेस के खाने की घटिया क्वालिटी और खराब हाइजीन को लेकर शिकायत कर रहे थे, लेकिन यूनिवर्सिटी प्रबंधन और हॉस्टल वॉर्डन हमेशा उनकी शिकायतों को नजरअंदाज करते आए।
छात्रों ने यूनिवर्सिटी गेट के सामने नारेबाजी की और प्रबंधन के खिलाफ रोष व्यक्त किया। प्रदर्शन की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और छात्रों को शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन छात्र अपनी मांगों पर अड़े रहे।
क्या हैं छात्रों के मुख्य आरोप?
- भोजन में कीड़े: छात्रों का दावा है कि उन्हें जो दाल और सब्जियां परोसी जा रही हैं, उनमें अक्सर मरे हुए कीड़े और गंदगी मिलती है।
- हाइजीन की भारी कमी: मेस के रसोइए और साफ-सफाई रखने वाले कर्मचारी बिना किसी सुरक्षा मानकों के काम करते हैं, जिससे बीमारियां फैलने का खतरा बना रहता है।
- अस्वास्थ्यकर पानी: पीने के लिए मिलने वाले पानी की शुद्धता पर भी छात्रों ने गंभीर सवाल उठाए हैं।
- शिकायत पर अनसुनी: प्रबंधन से कई बार गुहार लगाने के बावजूद कैंटीन और मेस के ठेकेदार पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
राजनीतिक दलों की एंट्री, कांग्रेस ने सरकार और प्रबंधन को घेरा
शैक्षणिक संस्थान में छात्रों के इस बड़े प्रदर्शन के बाद राजनीति भी गरमा गई है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार और यूनिवर्सिटी प्रशासन दोनों से जवाब तलब किया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि निजी विश्वविद्यालयों द्वारा छात्रों से मोटी फीस वसूली जाती है, लेकिन इसके बदले में उन्हें बुनियादी सुविधाएं और शुद्ध भोजन तक नहीं दिया जाता है।
कांग्रेस ने अपने आधिकारिक बयानों में कहा है कि यह सिर्फ लापरवाही का मामला नहीं है, बल्कि छात्रों के जीवन के साथ सीधा खिलवाड़ है। विपक्षी दल ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और दोषी मेस संचालक के साथ-साथ लापरवाह यूनिवर्सिटी अधिकारियों पर भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
प्रशासन की सफाई और डैमेज कंट्रोल की कोशिशें
बढ़ते हंग और राजनीतिक दबाव के बीच SAGE यूनिवर्सिटी प्रशासन ने डैमेज कंट्रोल करना शुरू कर दिया है। विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। प्रबंधन की ओर से आश्वासन दिया गया है कि मेस संचालन के पूरे सिस्टम की नए सिरे से समीक्षा की जाएगी।
यूनिवर्सिटी के एक जिम्मेदार अधिकारी ने मीडिया से बातचीत में कहा, "छात्र हमारे परिवार का हिस्सा हैं। उनकी सेहत और सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है। मेस के खाने में गड़बड़ी की जो शिकायतें मिली हैं, उनकी जांच के लिए एक आंतरिक कमेटी का गठन कर दिया गया है। यदि कोई भी व्यक्ति या कैंटीन ठेकेदार इसमें दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ तुरंत अनुबंध रद्द करने जैसी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।"
फूड सेफ्टी विभाग की रडार पर यूनिवर्सिटी मेस
इस पूरी घटना के बाद अब स्थानीय खाद्य और औषधि प्रशासन (Food and Safety Department) की टीम भी सक्रिय हो गई है। सूत्रों के अनुसार, सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की एक टीम यूनिवर्सिटी के हॉस्टल मेस का औचक निरीक्षण करने पहुंच सकती है, जहां से खाने और पानी के सैंपल लेकर उन्हें जांच के लिए लैब भेजा जाएगा। यदि सैंपल फेल होते हैं, तो यूनिवर्सिटी प्रबंधन पर भारी जुर्माना और कानूनी शिकंजा कस सकता है।
अभिभावकों में बढ़ी चिंता
इस घटना के सामने आने के बाद भोपाल से बाहर रहकर पढ़ाई कर रहे छात्रों के माता-पिता बेहद चिंतित हैं। अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और अच्छी परवरिश की उम्मीद में उन्हें बड़े संस्थानों में भेजते हैं, लेकिन अगर हॉस्टल जैसी बुनियादी जगहों पर ही बच्चों को ज़हरीला या दूषित खाना मिलेगा, तो वे कैसे पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर पाएंगे। कई अभिभावकों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से हॉस्टल की व्यवस्थाओं में तत्काल और स्थायी सुधार की मांग की है।
फिलहाल, कैंपस में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और छात्र इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि प्रशासन अपने वादों पर कितना खरा उतरता है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, खासकर तब जब खाद्य विभाग की जांच रिपोर्ट सामने आएगी।