अक्सर हमारे घर के बुजुर्ग और सीनियर सिटिजन्स यही सोचते हैं कि जब पेंशन पर कोई टैक्स बन ही नहीं रहा, तो इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने की क्या जरूरत? अगर आप या आपके घर में कोई पेंशनभोगी भी ऐसा ही सोचते हैं, तो सावधान हो जाइए। आपकी यह एक छोटी सी अनदेखी भविष्य में परिवार को लाखों रुपये के बड़े आर्थिक हक से वंचित कर सकती है।
शून्य टैक्स के बावजूद ITR भरना क्यों है बेहद जरूरी?
आयकर विभाग के नियमों से परे, ITR का एक ऐसा पहलू भी है जो सीधे तौर पर आपके परिवार के कानूनी और वित्तीय अधिकारों से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश और मोटर वाहन अधिनियम 1988 (Section 166) के तहत, ITR केवल टैक्स चुकाने का माध्यम नहीं, बल्कि आपकी आय का सबसे पुख्ता कानूनी दस्तावेज है।
यदि भगवान न करे, किसी पेंशनभोगी की सड़क दुर्घटना में असमय मृत्यु हो जाती है, तो उनके परिवार को मोटर दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल (MACT) से मुआवजा पाने का अधिकार होता है। कोर्ट के नियमों के मुताबिक:
- दुर्घटना में मृत्यु होने पर परिवार को पेंशनभोगी की पिछले 3 वर्षों की औसत वार्षिक आय का 10 गुना तक मुआवजा मिल सकता है।
- सबसे बड़ी शर्त: अदालत में मृतक की आय के प्रमाण के रूप में केवल और केवल पिछले 3 सालों का ITR ही मान्य होगा। कोर्ट किसी अन्य दस्तावेज या बैंक स्टेटमेंट को प्राथमिक सबूत नहीं मानता।
30 लाख रुपये के गणित को ऐसे समझें
आइए इसे एक बहुत ही सरल उदाहरण से समझते हैं कि ITR न भरना कितना भारी पड़ सकता है:
- मासिक पेंशन: ₹25,000
- वार्षिक आय: ₹3,00,000
- 3 साल की औसत आय: ₹3,00,000
- परिवार का कानूनी मुआवजा क्लेम: ₹3,00,000 x 10 = ₹30,00,000 (30 लाख रुपये)
यदि उस पेंशनभोगी ने टैक्स न बनने के कारण ITR दाखिल नहीं किया होगा, तो कोर्ट में आय साबित ही नहीं हो पाएगी और परिवार इस 30 लाख रुपये के क्लेम से पूरी तरह वंचित रह जाएगा।
ITR को टैक्स नहीं, परिवार का सुरक्षा कवच मानें
"आयकर रिटर्न सिर्फ सरकार को टैक्स देने के लिए नहीं भरा जाता, बल्कि यह विपत्ति के समय में परिवार के लिए एक टर्म इंश्योरेंस (बीमा) की तरह काम करता है।"
अगर आपकी सालाना पेंशन कर योग्य सीमा से कम है, तब भी आपको हर साल 'निल ITR' (Nil Return) जरूर दाखिल करना चाहिए। इसके लिए किसी भारी सीए की फीस देने की जरूरत नहीं है, इसे खुद या किसी केंद्र से आसानी से भरा जा सकता है। आज ही अपने घर के वरिष्ठ नागरिकों को इस नियम के प्रति जागरूक करें और उनका ITR समय पर दाखिल कराएं।