Breaking
► रक्षाबंधन पर सिगरा थाना प्रभारी शिवाकांत मिश्रा ने निभाई अनोखी मिसाल, मासूम बच्ची संग मनाया त्योहार ► बॉर्डर पर अनोखी रक्षाबंधन: स्कूली बच्चियों ने फौजी भाइयों की कलाई पर बांधी राखी ► मोटापे की असली वजह सिर्फ पिज्जा-बर्गर नहीं, घर की ये 5 चीजें चुपचाप बढ़ा रही हैं वजन ► लॉर्ड्स टेस्ट के दौरान इमरान खान के बेटों का बड़ा खुलासा, पाकिस्तानी क्रिकेटर्स को लेकर कही यह बड़ी बात ► IND vs SL: सीरीज जीतने के बाद भी शुभमन गिल ने क्यों दिया अपनी टीम को फुल मार्क्स? जानिए पूरा सच ► अमेरिका की सख्त व्यापार नीति से भारत पर असर: चुनौतियां और नए अवसर ► नेपाल ने क्यों ठुकराई विदेशी मदद? बाढ़ तबाही के बीच सामने आई बड़ी वजह ► राहुल गांधी पर शंकराचार्य का तीखा हमला, रक्षाबंधन को लेकर पूछा बड़ा सवाल ► 1 सितंबर से बदल रहे हैं ये 5 बड़े नियम, जेब पर पड़ेगा सीधा असर ► मुदगर बरसे और जमीन पर पटका गया एथर का नया स्कूटर, हैरान करने वाला वीडियो ► रक्षाबंधन पर सिगरा थाना प्रभारी शिवाकांत मिश्रा ने निभाई अनोखी मिसाल, मासूम बच्ची संग मनाया त्योहार ► बॉर्डर पर अनोखी रक्षाबंधन: स्कूली बच्चियों ने फौजी भाइयों की कलाई पर बांधी राखी ► मोटापे की असली वजह सिर्फ पिज्जा-बर्गर नहीं, घर की ये 5 चीजें चुपचाप बढ़ा रही हैं वजन ► लॉर्ड्स टेस्ट के दौरान इमरान खान के बेटों का बड़ा खुलासा, पाकिस्तानी क्रिकेटर्स को लेकर कही यह बड़ी बात ► IND vs SL: सीरीज जीतने के बाद भी शुभमन गिल ने क्यों दिया अपनी टीम को फुल मार्क्स? जानिए पूरा सच ► अमेरिका की सख्त व्यापार नीति से भारत पर असर: चुनौतियां और नए अवसर ► नेपाल ने क्यों ठुकराई विदेशी मदद? बाढ़ तबाही के बीच सामने आई बड़ी वजह ► राहुल गांधी पर शंकराचार्य का तीखा हमला, रक्षाबंधन को लेकर पूछा बड़ा सवाल ► 1 सितंबर से बदल रहे हैं ये 5 बड़े नियम, जेब पर पड़ेगा सीधा असर ► मुदगर बरसे और जमीन पर पटका गया एथर का नया स्कूटर, हैरान करने वाला वीडियो

राहुल गांधी पर शंकराचार्य का तीखा हमला, रक्षाबंधन को लेकर पूछा बड़ा सवाल

राहुल गांधी पर शंकराचार्य का तीखा हमला, रक्षाबंधन को लेकर पूछा बड़ा सवाल

भारतीय राजनीति के गलियारों में बयानों और पलटवारों का दौर हमेशा से ही काफी सरगर्म रहता है। आज यानी 28 अगस्त 2026 को देश की धार्मिक और राजनीतिक हलचल में एक नया अध्याय जुड़ गया है, जब धर्मगुरुओं और राजनेताओं के बीच वैचारिक तनातनी खुलकर सामने आ गई है। इसी कड़ी में, ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर एक तीखा हमला बोला है। उनके इस बयान ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल मचा दी है।

रक्षाबंधन के पवित्र पर्व पर शंकराचार्य की टिप्पणी

आगामी रक्षाबंधन के पावन पर्व से ठीक पहले, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राहुल गांधी की सनातन संस्कृति और धार्मिक परंपराओं में आस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सीधे तौर पर यह जानने की कोशिश की है कि क्या राहुल गांधी ने कभी अपनी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा से राखी बंधवाई है और क्या उन्होंने विधिवत रूप से उनकी रक्षा करने का वचन दिया है?

शंकराचार्य का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब देश भर में भाई-बहन के इस पवित्र त्योहार की तैयारियां जोरों पर हैं। सनातन धर्म में रक्षाबंधन का विशेष आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व माना जाता है, जिसमें भाई अपनी बहन की रक्षा का संकल्प लेता है।

'जो हमारे धर्म का नहीं, वह धर्म क्या जाने?'

अपने एक संबोधन के दौरान, शंकराचार्य ने राहुल गांधी के बयानों और सनातन धर्म पर उनके रुख को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'जो हमारे धर्म का नहीं, वह धर्म क्या जाने?' इस बयान के जरिए उन्होंने राहुल गांधी की उस वैचारिक पृष्ठभूमि पर सवाल उठाया है जो अक्सर धर्म, संस्कृति और परंपराओं को लेकर सार्वजनिक मंचों पर अपनी बात रखते हैं।

शंकराचार्य ने आगे कहा कि सनातन परंपराओं का पालन केवल कहने भर से नहीं होता, बल्कि उन्हें अपने जीवन और आचरण में उतारना पड़ता है। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या देश के बड़े राजनेता अपनी पारिवारिक और धार्मिक परंपराओं का पूरी निष्ठा के साथ पालन कर रहे हैं?

राजनीतिक हलकों में मचा बवाल

धार्मिक गुरु के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया है। कांग्रेस पार्टी और उनके समर्थकों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है। विपक्षी दलों और धार्मिक हस्तियों के बीच इस तरह की बयानबाजी अक्सर चुनावी और वैचारिक बहसों को हवा देती है।

  • शंकराचार्य का सवाल: क्या राहुल गांधी ने कभी बहन से राखी बंधवाकर रक्षा का वचन लिया?
  • सनातन परंपरा: त्योहारों के जरिए संस्कृति को सहेजने और निभाने पर जोर।
  • राजनीतिक असर: बयानों के इस दौर से सियासी तापमान का बढ़ना तय।

संस्कृति और राजनीति का पुराना नाता

भारत में धर्म और राजनीति का रिश्ता हमेशा से बहुत गहरा और संवेदनशील रहा है। जब भी देश का कोई बड़ा आध्यात्मिक गुरु किसी राजनीतिक हस्ती पर टिप्पणी करता है, तो वह आम जनता के बीच चर्चा का मुख्य विषय बन जाता है। इस बार भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। आम लोग सोशल मीडिया पर इस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं, जहां कुछ लोग शंकराचार्य के पक्ष में खड़े नजर आ रहे हैं, वहीं कुछ इसे अनावश्यक राजनीतिक बयानबाजी बता रहे हैं।

बहरहाल, रक्षाबंधन के इस पावन पर्व पर यह बयान एक बार फिर इस बहस को जिंदा कर गया है कि आधुनिक राजनीति में भारतीय संस्कृति और परंपराओं का पालन किस रूप में किया जाना चाहिए। आने वाले दिनों में देखना यह होगा कि कांग्रेस पार्टी या खुद राहुल गांधी इस टिप्पणी पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं या फिर वे इसे पूरी तरह से नजरअंदाज करने का रास्ता चुनते हैं।

About the Author

नसीम अहमद

नसीम अहमद

Writer (स्थानीय खबरें)

नसीम अहमद जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं। उन...

Read More

अगली खबर पढ़ें:

आगे पढ़ें →