दुनिया के सबसे विकसित और समृद्ध देशों में शुमार सिंगापुर इन दिनों एक बेहद गंभीर और अनोखी समस्या से जूझ रहा है। यहाँ की सड़कों पर गाड़ियाँ और चमचमाती इमारतें तो बहुतायत में हैं, लेकिन किलकारियों की गूंज लगातार कम होती जा रही है। हालात यहाँ तक पहुँच चुके हैं कि देश की आबादी का संतुलन बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया है। इस राष्ट्रीय संकट से निपटने के लिए सिंगापुर सरकार ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसके बारे में सुनकर पूरी दुनिया हैरान है। सरकार अब माता-पिता बनने वाले नागरिकों पर पैसों की बरसात कर रही है।
क्या है सिंगापुर सरकार की नई प्रोत्साहन योजना?
घटती जन्म दर (Falling Birth Rate) को थामने के लिए सिंगापुर के प्रधानमंत्री कार्यालय और सामाजिक परिवार विकास मंत्रालय ने मिलकर 'बेबी बोनस स्कीम' (Baby Bonus Scheme) में ऐतिहासिक इजाफा किया है। इस योजना के तहत, यदि कोई दंपति बच्चा पैदा करता है, तो सरकार उसे शुरुआती तोहफे के रूप में लगभग 7.5 लाख रुपये (11,000 सिंगापुर डॉलर) तुरंत नकद देती है।
लेकिन बात यहीं खत्म नहीं होती। सरकार इस मदद को सिर्फ एक बार देकर नहीं छोड़ती, बल्कि बच्चे के बड़े होने तक यानी उसके 17 साल के होने तक लगातार किस्तों में वित्तीय सहायता प्रदान करती है। कुल मिलाकर, एक बच्चे के जन्म से लेकर उसके युवा होने तक सरकार माता-पिता के बैंक खाते में लगभग 52.5 लाख से 60 लाख रुपये तक ट्रांसफर करती है।
पैसे मिलने का पूरा गणित क्या है?
इस पूरी आर्थिक सहायता को सरकार ने बहुत ही वैज्ञानिक तरीके से बांटा है ताकि बच्चों के पालन-पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा का खर्च आसानी से उठाया जा सके:
- कैश गिफ्ट (Cash Gift): पहले और दूसरे बच्चे के जन्म पर सरकार लगभग 7.5 लाख रुपये (11,000 SGD) सीधे नकद देती है। तीसरे बच्चे या उसके बाद के बच्चों के लिए यह राशि बढ़ाकर लगभग 9 लाख रुपये (13,000 SGD) कर दी जाती है।
- चाइल्ड डेवलपमेंट अकाउंट (CDA): सरकार बच्चों के बैंक खातों में एक निश्चित राशि जमा करती है, जिसे माता-पिता केवल बच्चों की शिक्षा, मेडिकल और चाइल्डकेयर सेंटर्स की फीस भरने के लिए ही इस्तेमाल कर सकते हैं।
- मासिक किश्तें: बच्चे के 6 साल की उम्र तक हर महीने अलग से भत्ते दिए जाते हैं, जिससे माता-पिता पर महंगाई का बोझ न पड़े।
अचानक क्यों पड़ी सरकार को यह योजना लानी पड़ी?
किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए वहां 'फर्टिलिटी रेट' (Fertility Rate) यानी कुल प्रजनन दर कम से कम 2.1 होनी चाहिए। इसका मतलब है कि एक महिला के औसतन 2.1 बच्चे होने चाहिए ताकि जनसंख्या का स्तर स्थिर बना रहे।
लेकिन सिंगापुर की स्थिति डराने वाली है। यहाँ की प्रजनन दर गिरकर मात्र 1.04 से 1.1 के बीच आ गई है, जो कि दुनिया में सबसे कम दरों में से एक है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- बेहद व्यस्त जीवनशैली: सिंगापुर के लोग अपने काम और करियर को लेकर अत्यधिक समर्पित होते हैं, जिससे पारिवारिक जीवन पीछे छूट जाता है।
- रहने का भारी खर्च (High Cost of Living): सिंगापुर दुनिया के सबसे महंगे शहरों में गिना जाता है। यहाँ घर खरीदना, बच्चों को पढ़ाना और उनका पालन-पोषण करना बेहद खर्चीला काम है।
- शादी की उम्र में देरी: युवा करियर सेट करने के चक्कर में बहुत देर से शादियां कर रहे हैं, जिससे पैरेंटिंग की उम्र निकलती जा रही है।
यदि यही हाल रहा, तो आने वाले दशकों में सिंगापुर में काम करने वाले युवाओं की भारी कमी हो जाएगी और बुजुर्गों की आबादी बहुत बढ़ जाएगी, जिससे देश की पेंशन और स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव आ जाएगा।
क्या इस योजना का असर हो रहा है?
सिंगापुर सरकार पिछले कुछ सालों से इस दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। पैसे मिलने के अलावा सरकार ने मैटरनिटी लीव (प्रसूति अवकाश) को भी बढ़ाया है और पुरुषों के लिए पैटरनिटी लीव अनिवार्य की है। इसके बावजूद, जन्म दर में मनचाहा उछाल देखने को नहीं मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पैसे देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि वर्क-लाइफ बैलेंस (Work-Life Balance) और महंगे हाउसिंग मार्केट पर भी कड़े कदम उठाने होंगे।
सिंगापुर का यह कदम पूरी दुनिया के लिए एक आईना है। दुनिया के कई अन्य देश, जैसे दक्षिण कोरिया और जापान भी ऐसी ही जनसांख्यिकी समस्याओं (Demographic Crisis) से जूझ रहे हैं और आने वाले समय में वे भी ऐसे ही बड़े वित्तीय पैकेजों का ऐलान कर सकते हैं।
