भारतीय रसोई का बजट एक बार फिर से गड़बड़ाता हुआ नजर आ रहा है। देश के खुदरा बाजारों में चीनी की कीमतें आसमान छू रही हैं और भाव बढ़कर सीधे 64 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। त्योहारी सीजन के मुहाने पर खड़े देश में इस तरह अचानक मिठास का महंगा होना आम आदमी की जेब पर सीधा डाका डाल रहा है। एक तरफ जहां आम जनता महंगाई की मार झेल रही है, वहीं दूसरी तरफ सरकार ने इस पूरे मामले पर गंभीर रुख अपनाते हुए जमाखोरों के खिलाफ कड़े कदम उठाने के संकेत दिए हैं।
अचानक क्यों बढ़े चीनी के दाम?
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, चीनी की कीमतों में आई इस अचानक तेजी के पीछे कई बड़े कारण जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ा कारण इस बार गन्ने के उत्पादन में आई कमी को माना जा रहा है। देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों जैसे महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में इस साल मौसम की बेरुखी और कम बारिश के चलते गन्ने की फसल पर असर पड़ा है। इसके अलावा, वैश्विक बाजार में भी शुगर की कीमतों में उतार-चढ़ाव और इथेनॉल की तरफ गन्ने के डायवर्जन ने घरेलू बाजार में सप्लाई को प्रभावित किया है।
हालांकि, जानकारों का यह भी मानना है कि उत्पादन में आई मामूली कमी के मुकाबले बाजार में कीमतें जिस रफ्तार से बढ़ी हैं, उसके पीछे कृत्रिम किल्लत (Artificial Scarcity) का हाथ होने से इनकार नहीं किया जा सकता। कई बड़े व्यापारियों और स्टॉकिस्टों द्वारा माल को गोदामों में डंप किया जा रहा है, ताकि आने वाले दिनों में और ऊंचे दामों पर मुनाफा कमाया जा सके।
सरकार और प्रशासन का कड़ा रुख
खुदरा बाजार में चीनी के दामों को इस तरह बेकाबू होते देख केंद्र सरकार और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने पूरी तरह से कमर कस ली है। सरकार ने साफ़ कर दिया है कि मुनाफाखोरी और जमाखोरी करने वाले तत्वों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। राज्यों के प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे गोदामों और थोक बाजारों का औचक निरीक्षण करें और स्टॉक की लिमिट पर कड़ी नजर रखें।
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, 'देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। किसी भी तरह की वास्तविक किल्लत नहीं है। जो लोग बाजार में जानबूझकर डर का माहौल बना रहे हैं और दाम बढ़ा रहे हैं, उनके खिलाफ एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।'
आम आदमी पर क्या होगा असर?
- त्योहारी सीजन पर असर: आने वाले महीनों में कई बड़े त्योहार आने वाले हैं, ऐसे में चीनी महंगी होने से मिठाइयों और बेकरी उत्पादों के दाम भी तेजी से बढ़ सकते हैं।
- घरेलू बजट बिगड़ेगा: मध्यम वर्गीय और गरीब परिवारों के मासिक बजट पर इसका सीधा नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। चाय से लेकर रोजमर्रा की अन्य खान-पान की चीजें महंगी हो जाएंगी।
- महंगाई दर में उछाल: खुदरा महंगाई के आंकड़ों में खाद्य वस्तुओं की बढ़ी हुई कीमतें एक बार फिर से आरबीआई (RBI) की चिंताओं को बढ़ा सकती हैं।
बाजार विशेषज्ञों की सलाह
कमोडिटी मार्केट के विश्लेषकों का मानना है कि सरकार यदि समय रहते ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) की तर्ज पर बफर स्टॉक से चीनी बाजार में नहीं उतारती है, तो कीमतों पर लगाम लगाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। सरकार के पास पर्याप्त रिजर्व है और यदि जरूरत पड़ी तो सरकार इसके निर्यात पर रोक या पाबंदियां और सख्त कर सकती है ताकि देश के भीतर उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।
