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हिमाचल प्रदेश में डरावने भूकंप के झटके, शिमला और चंबा की धरती हिली

हिमाचल प्रदेश में डरावने भूकंप के झटके, शिमला और चंबा की धरती हिली

हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में एक बार फिर धरती डोल उठी है। राज्य के शिमला और चंबा जिलों में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए, जिससे स्थानीय लोगों में अचानक दहशत फैल गई। हालांकि, राहत की बात यह है कि इस प्राकृतिक आपदा की वजह से किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है, लेकिन इस घटना ने लोगों को एक बार फिर साल 2005 की डरावनी यादों के करीब ला खड़ा किया है।

जमीन से मात्र 10 किलोमीटर गहराई में था केंद्र

मौसम विज्ञान केंद्र और राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) से मिली शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस भूकंप का केंद्र जमीन के भीतर काफी उथला यानी महज 10 किलोमीटर की गहराई में था। जब भूकंप का केंद्र जमीन के इतना करीब होता है, तो उसके झटके सतह पर ज्यादा महसूस होते हैं। यही वजह है कि शिमला और चंबा के कई इलाकों में लोगों ने घरों और दफ्तरों की दीवारों को हिलते हुए साफ देखा।

जैसे ही धरती में कंपन शुरू हुआ, लोग बिना एक पल गंवाए अपने घरों और बहुमंजिला इमारतों से बाहर खुले आसमान के नीचे भाग खड़े हुए। कुछ ही पलों में गलियों और पार्कों में स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई। हालांकि गनीमत यह रही कि झटके कुछ ही सेकंड तक सीमित रहे, वरना बड़ा नुकसान हो सकता था।

क्यों बार-बार कांप रही है हिमाचल की धरती?

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए, तो हिमाचल प्रदेश सिस्मिक जोन (Seismic Zone V और IV) के अंतर्गत आता है। इसका मतलब साफ है कि यह पूरा क्षेत्र भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील और खतरनाक जोन में आता है। भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट के बीच लगातार हो रही हलचल की वजह से हिमालयी क्षेत्र में टेक्टोनिक प्लेट्स पर भारी दबाव बना रहता है। यही दबाव समय-समय पर ऊर्जा के रूप में बाहर निकलता है, जिसे हम भूकंप के झटकों के रूप में महसूस करते हैं।

  • जोन V और IV: हिमाचल का अधिकांश हिस्सा उच्च जोखिम वाले भूकंपीय क्षेत्र में है।
  • उथला केंद्र: 10 किमी गहराई होने के कारण झटके अधिक स्पष्ट महसूस हुए।
  • सतर्कता: प्रशासन और आपदा प्रबंधन दल किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं।

प्रशासन की अपील: घबराएं नहीं, सतर्क रहें

भूकंप के तुरंत बाद राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) ने स्थिति का जायजा लेना शुरू कर दिया। शिमला और चंबा के जिला प्रशासन ने सभी उप-मंडलों (Sub-divisions) से रिपोर्ट तलब की है। अब तक की गई समीक्षा में किसी भी ग्रामीण या शहरी क्षेत्र से संपत्ति के नुकसान की खबर सामने नहीं आई है।

प्रशासन की ओर से आम जनता के नाम एक एडवाइजरी जारी की गई है जिसमें कहा गया है कि, "भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा पर किसी का जोर नहीं है, लेकिन थोड़ी सी सतर्कता बड़े खतरे को टाल सकती है। ऊंची इमारतों में रहने वाले लोग लिफ्ट का इस्तेमाल बिल्कुल न करें और भूकंप आने पर मजबूत फर्नीचर के नीचे शरण लें।"


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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

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रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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