कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) ने बंगाल की पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने और महिला सशक्तिकरण को मजबूत करने के उद्देश्य से 'एसएचई कांथा' के साथ एक विशेष साझेदारी की है। इस पहल के तहत कोलकाता के ऐतिहासिक भारतीय संग्रहालय में आयोजित विशेष दुर्गा पूजा आयोजन 'देवी दुर्गा : थ्रेड्स ऑफ डिविनिटी' में बंगाल की पारंपरिक कांथा कढ़ाई और महिला कारीगरों के हुनर को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया।
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से भारतीय संग्रहालय ने अपने इतिहास में पहली बार अपने परिसर के भीतर दुर्गा पूजा पंडाल की स्थापना की है। गत 11 अक्टूबर को उद्घाटित हुए इस सांस्कृतिक आयोजन में बंगाल की दुर्गा पूजा परंपरा, हस्तशिल्प कला कांथा कढ़ाई और संग्रहालय की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर को एक ही मंच पर सहेज कर प्रस्तुत किया गया। केकेआर की इस विशेष प्रदर्शनी में कांथा कारीगरों के उत्कृष्ट कार्यों को स्थान मिला, जबकि संग्रहालय की एक अन्य दीर्घा में एसएचई कांथा संस्थान की पिछले चार दशकों की लंबी यात्रा और संघर्ष को दर्शाया गया।
खिलाड़ियों ने की कारीगरों और 'साहसी रानियों' से मुलाकात
महाअष्टमी से ठीक पहले 17 अक्टूबर को सप्तमी के अवसर पर कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाड़ी राहुल त्रिपाठी और सौरभ दुबे विशेष रूप से इस पंडाल में पहुंचे। दोनों खिलाड़ियों ने कांथा कढ़ाई से जुड़ी महिला कारीगरों और 'साहसी रानियों' से मुलाकात की। खिलाड़ियों ने उनके कलात्मक कार्यों और प्रयासों की सराहना करते हुए पारंपरिक हस्तशिल्प को जीवित रखने में उनके योगदान को सराहा।
इस अवसर पर केकेआर की मुख्य विपणन अधिकारी बिंदा डे ने अपने विचार रखते हुए कहा कि बंगाल की संस्कृति के साथ फ्रेंचाइजी का बेहद गहरा जुड़ाव रहा है, इसलिए टीम की जिम्मेदारी केवल क्रिकेट के मैदान तक ही सीमित नहीं है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य उन महिलाओं को उचित पहचान दिलाना है जो इस पारंपरिक कला को संरक्षित कर रही हैं, साथ ही उनके लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता और रोजगार के नए अवसर बढ़ाना है।
'साहसी रानी' कार्यक्रम और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
इस पूरे कार्यक्रम के दौरान केकेआर के चर्चित 'साहसी रानी' कार्यक्रम को भी प्रमुखता से रेखांकित किया गया। यह विशेष पहल समाज के वंचित समुदायों से आने वाली महिलाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण और आजीविका के नए साधन उपलब्ध कराने पर पूरी तरह केंद्रित है। इस आयोजन के उद्घाटन समारोह में कलकत्ता फाउंडेशन से जुड़ी 'साहसी रानियों' ने पारंपरिक धुनुची नृत्य के माध्यम से मां दुर्गा का भव्य स्वागत किया, जिसने दर्शकों का मन मोह लिया।
केकेआर मेला और लाइव कढ़ाई प्रदर्शन
समारोह के दौरान एक विशेष 'केकेआर मेला' भी आयोजित किया गया, जिसमें लगभग 100 कांथा कारीगरों, केकेआर के आधिकारिक प्रशंसक समूहों और स्थानीय समुदाय के लोगों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। इस मेले में लाइव कढ़ाई प्रदर्शन, संवादात्मक कार्यशालाओं और उद्यमिता से जुड़े विशेष सत्रों का आयोजन किया गया। इन आयोजनों के माध्यम से महिला कारीगरों को अपनी कला को व्यापक स्तर पर प्रदर्शित करने तथा अपनी आजीविका के लिए नए व बेहतर अवसर तलाशने का एक बड़ा मंच प्राप्त हुआ।