पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के मोर्चे पर सुरक्षा बलों की भूमिका हमेशा से प्रेरणादायक रही है। इसी कड़ी में असम के मोरीगांव जिले में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने एक बार फिर समाज के सामने बेहतरीन मिसाल पेश की है। देश की सीमाओं की रक्षा करने के साथ-साथ पर्यावरण और सामाजिक सरोकारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, एसएसबी के जवानों ने एक बड़े पैमाने पर स्वच्छता और वृक्षारोपण अभियान का सफलतापूर्वक आयोजन किया है।
पोशतिया हरि मंदिर परिसर में चलाया गया विशेष अभियान
शुक्रवार को मोरीगांव के ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण पोशतिया हरि मंदिर परिसर में एक विशेष जन-कल्याणकारी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह पूरा अभियान गुवाहाटी के सोनापुर स्थित प्रथम वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के द्वितीय कमान अधिकारी एवं कार्यवाहक कमांडेंट केएच. इबोचौबा सिंह के कुशल मार्गदर्शन और दिशा-निर्देशन में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह सवेरे ही मंदिर परिसर की साफ-सफाई के साथ हुई। एसएसबी की डी समवाय के जवानों ने स्थानीय नागरिकों और मंदिर समिति के सदस्यों के साथ मिलकर परिसर के कोने-कोने की सफाई की। झाड़ियों की कटाई, कचरे का उचित निस्तारण और पूरे क्षेत्र को एक नया स्वरूप देने का यह कार्य समर्पण की भावना के साथ किया गया।
हरित भारत का संकल्प: पौधारोपण का महत्व
स्वच्छता अभियान के तुरंत बाद, उसी उत्साह के साथ मंदिर परिसर और उसके आसपास के खुले क्षेत्रों में विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपे गए। कार्यवाहक कमांडेंट केएच. इबोचौबा सिंह के विजन के अनुसार, यह केवल कुछ पौधे लगाने तक सीमित नहीं था, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और हरित पर्यावरण सुनिश्चित करने का एक ठोस कदम था।
रोपे गए पौधों में औषधीय, छायादार और फलदार पौधे शामिल थे, जिनकी देखभाल की जिम्मेदारी स्थानीय नागरिकों और मंदिर प्रबंधन ने संयुक्त रूप से ली है। इस पहल ने पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और ग्लोबल वार्मिंग जैसी वैश्विक चुनौतियों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर लड़ने का एक सशक्त संदेश दिया है।
स्थानीय लोगों और सुरक्षा बलों के बीच मजबूत होते रिश्ते
इस तरह के अभियानों की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि यह सुरक्षा बलों और आम जनता के बीच की दूरी को मिटाकर एक अटूट विश्वास का रिश्ता कायम करते हैं। जब वर्दीधारी जवानों को अपने बीच इस तरह समाज सेवा और पर्यावरण सुधार के कार्यों में लगे देखा जाता है, तो नागरिकों का मनोबल और सुरक्षा बलों के प्रति सम्मान और अधिक बढ़ जाता है।
पोशतिया हरि मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने एसएसबी की इस पहल की भूरी-भूरी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से न केवल धार्मिक स्थलों की पवित्रता और सुंदरता बढ़ती है, बल्कि युवाओं में भी प्रकृति के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी की भावना जागृत होती है।
एसएसबी की बहुआयामी भूमिका
सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) अपनी मुस्तैदी और बहादुरी के लिए सीमाओं पर जाना जाता है, लेकिन इसके साथ ही देश के आंतरिक हिस्सों में नागरिक कल्याण कार्यक्रमों (Civic Action Programmes) के जरिए वह सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने का काम भी निरंतर कर रहा है। स्वास्थ्य शिविर, खेलकूद प्रतियोगिताएं, और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अभियान इस बात का प्रमाण हैं कि बल देश के समग्र विकास के प्रति कितना संजीदा है।
भविष्य के लिए एक प्रेरणा
आज के समय में जब पर्यावरण का क्षरण एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है, मोरीगांव में एसएसबी की डी समवाय द्वारा उठाया गया यह कदम बेहद सराहनीय है। यह आयोजन इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि प्रशासन, सुरक्षा बल और आम जनता मिलकर किसी नेक काम का बीड़ा उठाएं, तो बदलाव निश्चित रूप से आता है। इस सफल अभियान ने पूरे क्षेत्र में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया है और आने वाले दिनों में ऐसे अन्य अभियानों के लिए मार्ग प्रशस्त किया है।