स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण के इस दौर में उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जिले ने एक नया और अनुकरणीय मील का पत्थर स्थापित किया है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के अंतर्गत जनसंख्या के सापेक्ष एबीएचए (ABHA) सैचुरेशन के मामले में इस जिले ने पूरे उत्तर प्रदेश में शीर्ष स्थान हासिल किया है। इस बड़ी उपलब्धि ने न केवल प्रशासनिक अमले में उत्साह भर दिया है, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि यदि जमीनी स्तर पर सही दिशा में प्रयास किए जाएं, तो सरकारी योजनाओं का लाभ हर नागरिक तक पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंच सकता है।
आयुष्मान संवाद कार्यक्रम में मिला बड़ा सम्मान
राजधानी लखनऊ स्थित प्रतिष्ठित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित 'आयुष्मान संवाद' कार्यक्रम के दौरान सुलतानपुर की इस सफलता को विधिवत रूप से सराहा गया। कार्यक्रम में राज्य के उप मुख्यमंत्री एवं चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने खुद सुलतानपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. भारत भूषण को प्रशस्ति पत्र और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस भव्य आयोजन में राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह समेत स्वास्थ्य विभाग के कई तमाम वरिष्ठ अधिकारी और नीति निर्माता मौजूद रहे।
यह कार्यक्रम मुख्य रूप से आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के सफल आठ वर्ष पूरे होने और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के पांच वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। इस मंच पर पूरे प्रदेश से उन जिलों और स्वास्थ्य इकाइयों को विशेष तौर पर सम्मानित किया गया जिन्होंने डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के क्रियान्वयन में अपनी उत्कृष्ट कार्यकुशलता का प्रदर्शन किया था।
सामूहिक प्रयासों का नतीजा है यह सफलता
इस बड़ी उपलब्धि का श्रेय किसी एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरी स्वास्थ्य प्रणाली के सामूहिक और अथक प्रयासों को जाता है। सम्मान प्राप्त करने के बाद सीएमओ डॉ. भारत भूषण ने अपनी पूरी टीम की सराहना की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह सफलता जिले के सभी डॉक्टरों, जमीनी स्तर पर काम करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों, आशा बहुओं और एएनएम (ANM) के समन्वित व कठिन परिश्रम का परिणाम है।
सीएमओ ने आगे कहा कि इस मुकाम पर पहुंचना निश्चय ही गर्व की बात है, लेकिन हमारी जिम्मेदारी अब और अधिक बढ़ गई है। आने वाले समय में जिले के हर कोने तक डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़, सुलभ और पारदर्शी बनाया जाएगा ताकि किसी भी नागरिक को इलाज या जांच में कोई असुविधा न हो।
आखिर क्या है एबीएचए (ABHA) और इसके क्या हैं फायदे?
आज के समय में जब हर चीज ऑनलाइन और डिजिटल हो रही है, तो स्वास्थ्य रिकॉर्ड को संभालना भी एक बड़ी चुनौती हुआ करता था। इसी समस्या के समाधान के लिए सरकार ने आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट यानी एबीएचए (ABHA Card) की शुरुआत की है। यह किसी भी नागरिक की 14 अंकों की एक विशिष्ट (Unique) स्वास्थ्य पहचान संख्या होती है।
- डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षा: इसके माध्यम से मरीज की मेडिकल जांच रिपोर्ट, डॉक्टरों के पर्चे और उपचार से जुड़े सभी पुराने रिकॉर्ड पूरी तरह से डिजिटल रूप में सुरक्षित रखे जाते हैं।
- गोपनीयता और सहमति: मरीज की अपनी सहमति के बिना कोई भी उसके स्वास्थ्य डेटा को नहीं देख सकता। नागरिक जब चाहें अपनी अनुमति से इसे संबंधित अस्पताल या डॉक्टर के साथ साझा कर सकते हैं।
- कागजी कार्रवाई से मुक्ति: अब मरीजों को अपने पुराने फाइल और पर्चे संभालकर डॉक्टर के पास ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती। एक क्लिक पर डॉक्टर पुराना इतिहास देख सकते हैं।
- बेहतर इलाज में मदद: चिकित्सकों को मरीज की पुरानी बीमारियों और एलर्जी आदि की जानकारी तुरंत मिल जाती है, जिससे सही समय पर सटीक इलाज शुरू करने में मदद मिलती है।
स्वास्थ्य सेवाओं में हो रहा है बड़ा बदलाव
उत्तर प्रदेश सरकार पिछले कुछ वर्षों से स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे के साथ-साथ इसके डिजिटल आधुनिकीकरण पर भी विशेष जोर दे रही है। सुलतानपुर जिले की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में भी अब डिजिटल स्वास्थ्य पहलों को तेजी से अपनाया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी प्रकार अन्य जिले भी प्रेरणा लेते हैं, तो देश की स्वास्थ्य व्यवस्था में एक क्रांतिकारी परिवर्तन देखने को मिलेगा।
आने वाले दिनों में इस योजना का दायरा और अधिक व्यापक किया जाएगा, जिससे हर नागरिक के स्वास्थ्य का डिजिटल ब्योरा सुरक्षित रह सके और आपातकालीन स्थिति में जीवन बचाने में आसानी हो सके। सुलतानपुर की इस कामयाबी ने अन्य जिलों के लिए भी एक प्रतिस्पर्धात्मक और सकारात्मक माहौल तैयार कर दिया है।