दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी भू-राजनीतिक तनाव और संघर्ष अब समंदर की लहरों पर भी गहरा असर डाल रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों पर मंडराते खतरों और लगातार हो रहे हमलों के बीच भारत ने बेहद कड़े शब्दों में अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। नई दिल्ली में आयोजित पांचवें कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दो टूक शब्दों में कहा कि दुनिया के किसी भी कोने में नागरिक जहाजों को निशाना बनाया जाना पूरी तरह से अस्वीकार्य है।
कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में एस. जयशंकर का बड़ा बयान
सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में 'इंडिया एंड द वर्ल्ड: एडैप्टिव बाई डिजाइन' विषय पर आयोजित प्रतिष्ठित 5वें कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में अपने संबोधन के दौरान विदेश मंत्री ने वैश्विक सुरक्षा और कूटनीति पर खुलकर बात की। उन्होंने दुनिया भर के तमाम देशों को यह संदेश दिया कि समुद्री सीमाओं पर शांति और सुरक्षा बनाए रखना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए कितना जरूरी है।
जयशंकर ने दो टूक अंदाज में कहा, 'भारत नागरिक जहाजों पर होने वाले हमलों को पूरी तरह से अस्वीकार्य मानता है, चाहे वे काला सागर में हों, लाल सागर में हों या फिर खाड़ी क्षेत्र में हों।' उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया के कई अहम समुद्री मार्ग गंभीर संघर्षों और सुरक्षा संकटों से जूझ रहे हैं, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है।
काला सागर में हमलों पर भारत की कड़ी आपत्ति
बीते कुछ महीनों में काला सागर क्षेत्र में हुए हमलों के दौरान कुछ भारतीय नाविकों की भी जान चली गई थी, जिसके बाद भारत सरकार ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। विदेश मंत्री ने इस बात का खुलासा किया कि जुलाई महीने में नागरिक जहाजों पर हुए हमलों के बाद भारत ने रूस और यूक्रेन, दोनों देशों के सामने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया था।
उन्होंने बताया, 'मैंने व्यक्तिगत रूप से दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के साथ इस गंभीर मुद्दे को उठाया था। शुरुआत में हमारी बातचीत का मुख्य उद्देश्य केवल जहाजों और उन पर सवार नाविकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करना था, लेकिन बाद में अनाज के निर्यात और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर उठी परेशानियों की वजह से इस बातचीत का दायरा और अधिक व्यापक हो गया।'
अनाज और ऊर्जा की सप्लाई पर गहरा असर
काला सागर को दुनिया का एक अहम व्यापारिक गलियारा माना जाता है, जहां से बड़े पैमाने पर अनाज और ईंधन का निर्यात होता है। संघर्षों के कारण इस रास्ते से अनाजों का निर्यात काफी हद तक बाधित हो गया है। इस पर बात करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि अनाजों को ऊर्जा आपूर्ति से अलग करके नहीं देखा जा सकता है, क्योंकि दोनों ही वैश्विक आर्थिकी की रीढ़ हैं। यही वजह है कि भारत इन दोनों देशों के साथ लगातार संपर्क में है ताकि सुरक्षित आवागमन का रास्ता निकाला जा सके।
रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत का रुख: केवल बातचीत और कूटनीति
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे लंबे संघर्ष के समाधान को लेकर भारत ने अपनी नीति को एक बार फिर से दोहराया है। एस. जयशंकर ने जोर देकर कहा कि इस भीषण युद्ध का कोई सैन्य समाधान नहीं हो सकता है। केवल बातचीत और कूटनीति ही आगे बढ़ने का एकमात्र सही रास्ता है। भारत लगातार दोनों पक्षों के संपर्क में है ताकि किसी तरह से शांति की बहाली हो सके और वैश्विक स्तर पर उपजे संकट को कम किया जा सके।
संयुक्त राष्ट्र में गतिरोध और सुधारों की जरूरत
अपने संबोधन के दौरान विदेश मंत्री ने वैश्विक संस्थाओं, खासकर संयुक्त राष्ट्र (UN) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र में भारी गतिरोध बना हुआ है। दुनिया की बदलती वास्तविकताओं के बावजूद कुछ देश इस वैश्विक संस्था में आवश्यक सुधारों का कड़ा विरोध कर रहे हैं, जो मौजूदा समय की सबसे बड़ी विडंबना है। जब तक अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं समय के साथ खुद को नहीं बदलेंगी, तब तक वैश्विक संकटों का स्थायी समाधान निकालना मुश्किल होगा।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा सर्वोपरि
समुद्र के रास्ते व्यापार करने वाले मर्चेंट नेवी के नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भारत के लिए हमेशा से प्राथमिकता रहा है। वैश्विक संघर्षों के बीच जब भी भारतीय नाविकों पर आंच आई है, नई दिल्ली ने कूटनीतिक स्तर पर त्वरित और सख्त कदम उठाए हैं। विदेश मंत्री का यह बयान न केवल दुनिया के लिए एक कड़ा संदेश है, बल्कि यह भी साबित करता है कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए कूटनीतिक मंचों पर मजबूती से खड़ा है।
फिलहाल, काला सागर और खाड़ी क्षेत्रों में बने तनाव के बीच भारत की यह सक्रिय कूटनीतिक पहल आने वाले समय में क्या रंग लाती है, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।