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TMC में बगावत के सुर! स्वतंत्रता दिवस पर बागी खेमे के कार्यक्रम में पहुंचे कुणाल घोष, सियासी गलियारों में हलचल

TMC में बगावत के सुर! स्वतंत्रता दिवस पर बागी खेमे के कार्यक्रम में पहुंचे कुणाल घोष, सियासी गलियारों में हलचल

पश्चिम बंगाल की सियासत में एक बार फिर भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रही अंतर्कलह अब खुलकर सामने आने लगी है। इस गरमागरम माहौल के बीच, TMC विधायक कुणाल घोष की एक हरकत ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर कुणाल घोष का पार्टी के एक बागी गुट के कार्यक्रम में पहुंचना इस बात का संकेत है कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। क्या यह महज़ एक इत्तेफाक था या फिर किसी बड़े राजनीतिक तूफान की आहट? आइए जानते हैं इस पूरी घटना की अंदर की कहानी।पहले पार्टी दफ्तर, फिर बागी खेमे के पास: आखिर क्या था माजरा?

स्वतंत्रता दिवस के दिन सुबह की शुरुआत सामान्य राजनीतिक आयोजनों के साथ हुई थी। ममता बनर्जी के वफादार माने जाने वाले कुणाल घोष ने सबसे पहले कोलकाता के टोपसिया स्थित आधिकारिक TMC कार्यालय में पार्टी प्रमुख के निर्देशों के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज फहराया। यहाँ तक सब कुछ ठीक था।

लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने सबको चौंका दिया। झंडा फहराने के तुरंत बाद घोष मेट्रोपॉलिटन बाईपास के पास स्थित एक कार्यालय पहुंचे। यह वही कार्यालय है जिस पर ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला बागी गुट अपना दावा ठोकता है। वहाँ पहुँचकर घोष ने न सिर्फ राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी, बल्कि स्वतंत्रता सेनानियों को पुष्पांजलि भी अर्पित की। बागी गुट के दफ्तर में अचानक TMC विधायक के प्रकट होने से वहाँ मौजूद कार्यकर्ता और नेता भी हैरान रह गए।

कुणाल घोष ने दी सफाई: 'मैं तो बस रास्ते से गुजर रहा था'

राजनीतिक तापमान के बढ़ने और अटकलों का बाजार गर्म होने के बाद कुणाल घोष ने खुद सामने आकर इस पूरे मामले पर सफाई दी। मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने इन तमाम अटकलों को खारिज किया और इसे महज एक संयोग बताया।

"मैं महानगर भवन के पास वाली सड़क से गुजर रहा था। मैंने रास्ते में पार्टी के झंडे देखे और कुछ जाने-पहचाने चेहरों को वहाँ मौजूद पाया। मैंने अपनी गाड़ी रुकवाई, नीचे उतरा और कार्यक्रम में शामिल हो गया। यह मेरे बेलेघाटा विधानसभा क्षेत्र में TMC का कार्यालय है, इसलिए मेरा वहाँ जाना कोई अपराध या असामान्य बात नहीं है।" - कुणाल घोष, TMC विधायक

हालाँकि, राजनीति में इत्तेफाक बहुत कम होते हैं, और विश्लेषक घोष की इस सफाई को पूरी तरह से पचा नहीं पा रहे हैं।

पार्टी का डैमेज कंट्रोल: चंद्रिमा भट्टाचार्य का बयान

बढ़ते विवाद को थामने के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य भी मैदान में उतर आईं। उन्होंने कुणाल घोष के इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है।

उन्होंने मीडिया से कहा, "हमारी पार्टी लोकतंत्र में पूरा विश्वास रखती है। अगर कोई राहगीर भी स्वतंत्रता दिवस के समारोह में शामिल होना चाहे, तो उसका स्वागत किया जाएगा। कुणाल घोष उस रास्ते से गुजर रहे थे, उन्होंने कार्यक्रम में हिस्सा लिया और श्रद्धांजलि दी। इसे तूल देना बिल्कुल गलत है।"

TMC में पहले से सुलग रही है गुटबाजी की आग

यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में TMC मूल रूप से दो धड़ों में बंटती नजर आ रही है। एक तरफ ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाला मुख्यधारा का गुट है, तो दूसरी तरफ ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला बागी खेमा है, जो लगातार पार्टी संगठन और नेतृत्व पर अपनी दावेदारी ठोक रहा है।

  • जून का विवाद: इसी साल जून के महीने में बागी गुट ने पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अपना दावा जताने की कोशिश की थी। उस दौरान भी पार्टी कार्यालयों पर कब्जे को लेकर दोनों पक्षों में तीखी झड़पें हुई थीं।
  • विधानसभा में भिड़ंत: केवल दफ्तरों तक ही नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल विधानसभा के अंदर भी दोनों खेमे आमने-सामने आ चुके हैं। जुलाई में कुणाल घोष और बागी खेमे के विधायक अखरुज्जमां के बीच तीखी बहस हुई थी, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष को कड़ा कदम उठाते हुए कुणाल घोष को दिनभर के लिए सदन से निलंबित करना पड़ा था।

क्या यह किसी बड़े राजनीतिक फेरबदल का संकेत है?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं और ऐसे में पार्टी के भीतर असंतोष का बाहर आना सत्ताधारी दल के लिए चिंता का विषय बन सकता है। कुणाल घोष का बागी खेमे के कार्यक्रम में जाना भले ही उनके अपने शब्दों में एक इत्तेफाक हो, लेकिन बंगाल की राजनीति की नब्ज़ पहचानने वाले इसे एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं।

आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि तृणमूल कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व इस पूरे प्रकरण पर क्या रुख अपनाता है और क्या कुणाल घोष के खिलाफ पार्टी कोई कड़ा संदेश देती है या फिर मामले को रफा-दफा कर दिया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: कुणाल घोष किस पार्टी से संबंधित हैं?

Ans: कुणाल घोष वर्तमान में पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक और नेता हैं।

Q2: ऋतब्रत बनर्जी कौन हैं और TMC में उनका क्या विवाद है?

Ans: ऋतब्रत बनर्जी TMC के भीतर बागी गुट का नेतृत्व कर रहे हैं। उनका और उनके समर्थकों का पार्टी के संगठन और नेतृत्व के साथ लंबे समय से वैचारिक और प्रशासनिक मतभेद चल रहा है।

Q3: कुणाल घोष ने बागी गुट के कार्यक्रम में जाने पर क्या सफाई दी?

Ans: कुणाल घोष ने स्पष्ट किया कि उनका कोई राजनीतिक मकसद नहीं था। वे उस रास्ते से गुजर रहे थे, झंडे और परिचितों को देखकर गाड़ी रोकी और स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में शामिल हो गए।

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रिपोर्टर: Mamata Pathak

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