वैश्विक व्यापार और राजनीति के गलियारों में एक बार फिर गर्माहट आ गई है। अमेरिकी राजनीति के धुरंधर और अपने आक्रामक फैसलों के लिए पूरी दुनिया में पहचाने जाने वाले डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर व्यापारिक नीतियों पर अपनी पकड़ मजबूत करते हुए बड़ा बयान दिया है। इस बार उनके निशाने पर कनाडा की दिग्गज विमान निर्माता कंपनी 'बॉम्बार्डियर' (Bombardier) आई है। ट्रंप ने कंपनी को बेहद साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि वे अमेरिकी बाजार में अपने विमान बेचना चाहते हैं, तो उन्हें उनका निर्माण संयुक्त राज्य अमेरिका की धरती पर ही करना होगा।
यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक सुरक्षा और घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने की होड़ मची हुई है। ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' (America First) की नीति का यह एक और आक्रामक अध्याय है, जो साफ तौर पर यह दर्शाता है कि अमेरिकी प्रशासन बाहरी कंपनियों को कितनी कड़ी शर्तों के दायरे में लाने की तैयारी कर रहा है।
बॉम्बार्डियर को ट्रंप की दो टूक: नियम मानो या बाजार छोड़ो
कनाडा की कंपनी बॉम्बार्डियर एयरोस्पेस क्षेत्र का एक जाना-माना नाम है, जो दुनिया भर में अपने लग्जरी और कमर्शियल जेट विमानों के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया अल्टीमेटम ने इस कंपनी के सामने एक बहुत बड़ा रणनीतिक संकट खड़ा कर दिया है। ट्रंप का रुख बिल्कुल स्पष्ट है—यदि व्यापार करना है, तो अमेरिकी कामगारों को रोजगार देना होगा और अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सीधा योगदान करना होगा।
इस अल्टीमेटम के बाद विमानन उद्योग के जानकारों का मानना है कि बॉम्बार्डियर के लिए आने वाले दिन आसान नहीं होने वाले हैं। अमेरिकी बाजार दुनिया के सबसे बड़े और सबसे ज्यादा मुनाफा देने वाले बाजारों में से एक है। ऐसे में, इस बाजार की पहुंच खोने का जोखिम कोई भी बड़ी कंपनी मोल नहीं लेना चाहेगी।
'अमेरिका फर्स्ट' नीति का नया रूप
जब से डोनाल्ड ट्रंप ने दोबारा अमेरिकी सत्ता की बागडोर संभाली है, उनकी नीतियों में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को प्राथमिकता देने का सुर और तेज हो गया है। उनका तर्क है कि अमेरिका के पैसे का इस्तेमाल अमेरिकी नागरिकों के लिए नौकरियां पैदा करने में होना चाहिए, न कि विदेशी कंपनियों को मालामाल करने में।
- घरेलू रोजगार पर जोर: ट्रंप प्रशासन का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी नागरिकों के लिए ज्यादा से ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग जॉब्स तैयार करना है।
- आयात पर सख्ती: तैयार उत्पादों को बाहर से मंगाने के बजाय उन्हें देश के भीतर ही असेंबल या निर्मित करने पर जोर दिया जा रहा है।
- व्यापारिक दबाव: बड़ी विदेशी कंपनियों पर अपनी शर्तों के तहत काम करने का दबाव बनाया जा रहा है।
कनाडा और अमेरिका के व्यापारिक संबंधों पर असर
इस ताजा घटनाक्रम से अमेरिका और कनाडा के बीच कूटनीतिक और व्यापारिक संबंधों पर भी असर पड़ना तय माना जा रहा है। कनाडा की अर्थव्यवस्था और वहां के उद्योग जगत के लिए अमेरिकी बाजार बेहद महत्वपूर्ण है। बॉम्बार्डियर जैसी कंपनियां लंबे समय से अमेरिका को अपने उत्पादों का एक बड़ा हिस्सा निर्यात करती रही हैं।
यदि बॉम्बार्डियर को अमेरिका में अपने कारखाने स्थापित करने के लिए मजबूर होना पड़ता है, तो इससे कंपनी की उत्पादन लागत (Production Cost) में भारी बदलाव आ सकता है। हालांकि, दूसरी तरफ ट्रंप प्रशासन का मानना है कि यह नियम खेल के मैदान को सभी के लिए बराबर बनाएगा और बाहरी कंपनियों को अमेरिकी उपभोक्ताओं से लाभ कमाने के साथ-साथ अमेरिकी बुनियादी ढांचे और श्रम शक्ति का भी सम्मान करना होगा।
विमानन उद्योग में हलचल
डोनाल्ड ट्रंप के इस कड़े रुख के बाद केवल बॉम्बार्डियर ही नहीं, बल्कि दुनिया भर की अन्य एविएशन और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की नींद उड़ गई है। विमान निर्माण एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें अरबों डॉलर का निवेश और ग्लोबल सप्लाई चेन शामिल होती है। ऐसे में किसी एक देश के दबाव में आकर अपनी पूरी निर्माण यूनिट को शिफ्ट करना आसान नहीं होता है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में इस मामले पर कनाडाई सरकार और बॉम्बार्डियर के शीर्ष अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या कूटनीतिक बातचीत देखने को मिल सकती है। क्या बॉम्बार्डियर ट्रंप की शर्तों के आगे झुकेगी या अमेरिकी बाजार में अपनी हिस्सेदारी खोने का जोखिम उठाएगी? यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब पूरी दुनिया की निगाहें टकटकी बांधकर देख रही हैं।
फिलहाल, यह स्पष्ट हो चुका है कि डोनाल्ड ट्रंप अपनी पुरानी शैली में लौट आए हैं, जहां व्यापार नीति उनके लिए केवल आंकड़े नहीं, बल्कि राजनीतिक और आर्थिक प्रभुत्व स्थापित करने का एक बड़ा हथियार है। बॉम्बार्डियर प्रकरण आने वाले दिनों में वैश्विक व्यापार युद्ध को एक नई दिशा दे सकता है।