रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही अयोध्या में प्रतिदिन देश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं और सांस्कृतिक टोलियों के पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है। इसी क्रम में दक्षिण भारत के धार्मिक और आध्यात्मिक केंद्र उडुपी से आई महिलाओं के एक विशेष दल ने रामनगरी में अनूठा समां बांधा। श्री रामजन्मभूमि परिसर में उस वक्त भक्ति की अद्भुत बयार बह उठी, जब दूर कर्नाटक से आईं मातृशक्तियों के कंठ से प्रभु श्रीराम के भजन गूंज उठे।
उडुपी से अयोध्या पहुंचीं 44 मातृशक्तियां
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उडुपी से कुल 44 मातृशक्तियों (महिलाओं का दल) ने अयोध्या की यात्रा की। शुक्रवार की सुबह इस दल ने सीधे श्री रामजन्मभूमि मन्दिर के पवित्र परिसर का रुख किया। मंदिर की भव्य यज्ञशाला में इन सभी महिलाओं ने एक स्वर में भगवान श्रीराम की स्तुति में पारंपरिक और भावपूर्ण भजन गाए। उनकी मधुर आवाज में गूंजते भजनों ने वहां मौजूद अन्य श्रद्धालुओं का भी मन मोह लिया।
भजन गायन के तुरंत बाद इस समूह ने पूरी तल्लीनता और श्रद्धा के साथ हनुमान चालीसा का सस्वर पाठ किया। संकटमोचन हनुमान के चरणों में अर्पित यह पाठ अयोध्या धाम के वातावरण को पूरी तरह से आध्यात्मिक और ऊर्जावान बना रहा था।
प्रातः काल हुआ देवी-देवताओं का दर्शन-पूजन
तीर्थ क्षेत्र की ओर से इस पूरे आयोजन के प्रभारी शैलेन्द्र शुक्ल ने इस धार्मिक अनुष्ठान की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि यह पूरा कार्यक्रम सुबह सात बजे से शुरू हुआ। श्रीमती विद्या एस राव के नेतृत्व में उडुपी से आई इस विशेष टोली ने सबसे पहले सुबह की बेला में प्रभु की आराधना की।
आराधना और भजन-कीर्तन के उपरांत, इस दल ने रामजन्मभूमि परिसर में न केवल रामलला के दर्शन किए, बल्कि परिसर में स्थापित अन्य सभी प्रमुख देवी-देवताओं के विग्रहों के भी दर्शन और पूजन किए। दक्षिण भारत की संस्कृति और उत्तर भारत की इस पावन रामभक्ति के संगम को देखकर वहां मौजूद हर कोई भावुक हो उठा।
तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से हुआ पारंपरिक स्वागत
सुदूर दक्षिण से आईं इन महिला श्रद्धालुओं के सम्मान में श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की तरफ से विशेष व्यवस्था की गई थी। दर्शन और अनुष्ठान के पश्चात, मंदिर प्रबंधन की ओर से सभी 44 मातृशक्तियों को पारंपरिक पटका और पावन प्रसाद भेंट किया गया।
- स्थान: श्री रामजन्मभूमि मंदिर यज्ञशाला, अयोध्या
- नेतृत्वकर्ता: श्रीमती विद्या एस राव
- प्रतिभागी: 44 उडुपी की मातृशक्तियां
- मुख्य गतिविधियां: राम भजन गायन, हनुमान चालीसा पाठ और देव दर्शन
देशभर की संस्कृति का केंद्र बन रही है अयोध्या
विशेषज्ञों का मानना है कि जब से भव्य राम मंदिर का निर्माण हुआ है, अयोध्या केवल उत्तर भारत तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह संपूर्ण भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता का सबसे बड़ा केंद्र बन गई है। उडुपी जैसे सुदूर दक्षिण राज्यों से इस प्रकार महिलाओं और धार्मिक टोलियों का आना इस बात का प्रमाण है कि राम नाम की यह महिमा भौगोलिक सीमाओं को पार कर चुकी है।
इस प्रकार के आयोजनों से न केवल देश के विभिन्न हिस्सों के बीच आपसी सांस्कृतिक जुड़ाव मजबूत होता है, बल्कि आने वाले दिनों में यह तीर्थाटन पर्यटन को एक नई दिशा भी दे रहा है। अयोध्या आने वाले हर श्रद्धालु के मन में रामलला के प्रति अगाध प्रेम और समर्पण साफ झलकता है, और उडुपी की इन महिलाओं ने इसे एक बार फिर से चरितार्थ कर दिखाया है।