युद्ध के इतिहास में कुछ हथियार ऐसे होते हैं जिनकी केवल चर्चा मात्र से ही दुश्मन के खेमे में खलबली मच जाती है। अमेरिका का 'डेजी कटर' (Daisy Cutter) बम भी ऐसा ही एक महाविनाशक हथियार था, जिसका वजन करीब 6,800 किलोग्राम (15,000 पाउंड) था। इस बम की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके एक ही धमाके से मीलों दूर तक के जंगल मिनटों में साफ हो जाते थे और जमीन समतल हो जाती थी।
वियतनाम के घने जंगलों से हुई थी शुरुआत
वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना को एक बहुत बड़ी सामरिक चुनौती का सामना करना पड़ रहा था। वहां के जंगल इतने घने और विशाल थे कि हेलिकॉप्टरों को उतारने के लिए लैंडिंग जोन (LZ) बनाना बेहद मुश्किल काम था। पेड़ों की घनी छत के कारण सैनिक नीचे नहीं उतर पा रहे थे और दुश्मन छिपकर हमला करते थे।
इस समस्या से निपटने के लिए अमेरिकी रक्षा वैज्ञानिकों ने एक ऐसा बम तैयार करने का फैसला किया जो बिना किसी गड्ढे को खोदे, विस्पोटक दबाव के जरिए एक झटके में पूरे इलाके के पेड़ों को नेस्तनाबूद कर सके। यहीं से जन्म हुआ BLU-82/B बम का, जिसे अनौपचारिक रूप से 'डेजी कटर' नाम दिया गया।
कैसे काम करता था यह 6800 किलो का दैत्य?
डेजी कटर कोई आम पारंपरिक बम नहीं था। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से भारी तबाही मचाने और बड़े पैमाने पर रास्ता साफ करने के लिए किया जाता था। इसकी कार्यप्रणाली बेहद खौफनाक थी:
- लंबा फ्यूज प्रोब (Fuse Probe): इस बम के आगे की तरफ एक लंबी मेटल रॉड या प्रोब लगी होती थी। जैसे ही यह रॉड जमीन से कुछ फीट ऊपर टकराती थी, बम में विस्फोट हो जाता था।
- सतह पर विस्फोट (Surface Detonation): जमीन के अंदर फटने के बजाय यह हवा या बिल्कुल सतह पर फटता था, जिससे इसका पूरा衝撃 (Shockwave) चारों तरफ फैल जाता था।
- ऑक्सीजन का घातक इस्तेमाल: यह एयरोसोल बम जैसा प्रभाव देता था, जो आसपास की ऑक्सीजन को खींचकर एक भयंकर दबाव और आग का गोला पैदा करता था।
इसके प्रभाव से मीलों के दायरे में मौजूद बड़े-बड़े पेड़ जड़ों से उखड़ जाते थे, कंक्रीट के बंकर ढह जाते थे और दुश्मन सेना के पास संभलने का कोई मौका नहीं बचता था।हेलिकॉप्टर लैंडिंग से लेकर साइकोलॉजिकल वारफेयर तक
शुरुआत में भले ही इसे वियतनाम में हेलिकॉप्टर उतारने और तोपखाने के लिए जगह बनाने के वास्ते बनाया गया था, लेकिन बाद के दशकों में इसका इस्तेमाल मनोवैज्ञानिक हथियार (Psychological Warfare) के रूप में भी हुआ। अफगानिस्तान युद्ध के शुरुआती दौर में भी अमेरिकी सेना ने तालिबान और अल-कायदा के ठिकानों पर इसका इस्तेमाल किया था।
जब डेजी कटर गिरता था, तो उसकी आवाज इतनी भीषण होती थी कि मीलों दूर बैठे लोग कांप उठते थे। कई बार दुश्मन बिना लड़े ही इसके खौफ से आत्मसमर्पण कर देते थे क्योंकि ऐसा माना जाता था कि इस धमाके के बाद जीवित बचना नामुमकिन है।
क्यों हुई इस खतरनाक बम की विदाई?
समय के साथ युद्ध की तकनीक बदली और अधिक सटीक हथियारों की मांग बढ़ी। हालांकि डेजी कटर अपने काम में माहिर था, लेकिन इसमें एक बड़ी कमी थी—यह गाइडेड (Guided) नहीं था। यानी इसे सटीक निशाने पर गिराना मुश्किल होता था और इसके रास्ते में मौसम या हवा का रुख बड़ी बाधा बनता था।
इसके बाद अमेरिकी सेना ने इससे भी अधिक शक्तिशाली और आधुनिक बमों को विकसित किया, जैसे कि MOAB (Mother of All Bombs), जो जीपीएस गाइडेड हैं। इसके चलते डेजी कटर को धीरे-धीरे सेना की सेवा से हटा दिया गया, लेकिन सैन्य इतिहास के पन्नों में यह हमेशा के लिए दर्ज हो गया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. डेजी कटर बम का वजन कितना था?
डेजी कटर (BLU-82) बम का कुल वजन लगभग 6,800 किलोग्राम यानी 15,000 पाउंड था। यह अपने समय के सबसे भारी पारंपरिक बमों में से एक था।
2. इसे 'डेजी कटर' नाम क्यों दिया गया था?
इस बम का नाम 'डेजी कटर' इसलिए रखा गया क्योंकि यह विस्फोट के बाद जमीन पर मौजूद सभी पेड़ों, झाड़ियों और संरचनाओं को इस तरह साफ कर देता था जैसे घास काटने की मशीन (Mower) मैदान को साफ कर देती है।
3. क्या आज भी डेजी कटर का इस्तेमाल किया जाता है?
नहीं, अब अमेरिकी सेना ने डेजी कटर का इस्तेमाल बंद कर दिया है। इसकी जगह अब जीपीएस-निर्देशित अत्याधुनिक बमों (जैसे MOAB) ने ले ली है जो ज्यादा सटीक और घातक हैं।