दुनिया एक और बड़े और खतरनाक युद्ध की मुहाने पर खड़ी है? अमेरिका और ईरान के बीच का पुराना शीतयुद्ध अब एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है, जहां से वापसी के रास्ते बेहद संकीर्ण नजर आ रहे हैं। इस भयंकर भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और तेहरान के बयानों ने वैश्विक स्तर पर सनसनी फैला दी है। एक तरफ जहां अमेरिका किसी भी तरह की बातचीत से साफ इंकार कर रहा है, वहीं ईरान का दावा है कि वॉशिंगटन अब उनकी शर्तों पर समझौते की गुहार लगा रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप का दो टूक बयान: 'कोई बातचीत नहीं हो रही'
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक तीखा पोस्ट शेयर कर तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान के साथ फिलहाल न तो कोई बातचीत चल रही है और न ही भविष्य में ऐसी कोई बैठक निर्धारित है। इसके साथ ही उन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी सख्ती से जारी रखने का ऐलान किया है।
ट्रंप प्रशासन का यह रुख साफ करता है कि वॉशिंगटन अभी तेहरान को किसी भी प्रकार की कूटनीतिक छूट देने के मूड में नहीं है। हालांकि, स्थिति तब और दिलचस्प हो जाती है जब ओमान और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित नौवहन को लेकर अलग से बातचीत की खबरें सामने आती हैं। कतर जैसे मध्यस्थ देश इसे दोनों देशों के बीच बर्फ पिघलने के संकेत के रूप में देख रहे हैं, लेकिन ट्रंप के बयानों ने इन उम्मीदों पर फिलहाल पानी फेर दिया है।
तेहरान का पलटवार: 'दबाव के आगे नहीं झुकेंगे'
दूसरी ओर, ईरानी खेमे से आ रहे बयान बेहद आक्रामक हैं। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दावा किया है कि अमेरिका के तमाम सैन्य और आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद ईरान ने घुटने नहीं टेके हैं। तेहरान का रुख बिल्कुल साफ है कि जब तक अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह खत्म नहीं करता, आर्थिक प्रतिबंधों में ढील नहीं देता और ईरान के जमे हुए फंड को रिलीज नहीं करता, तब तक किसी भी बड़ी शांति वार्ता का कोई मतलब नहीं है।
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने भी दो टूक चेतावनी दी है कि रणनीतिक रूप से बेहद अहम 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को तब तक पूरी तरह नहीं खोला जाएगा, जब तक जून में हुए अंतरिम समझौते की शर्तों को पूरी तरह से जमीन पर लागू नहीं किया जाता।
होर्मुज जलडमरूमध्य: संकट का सबसे बड़ा केंद्र
यह पूरा विवाद जिस भौगोलिक बिंदु पर टिका है, वह है होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz)। यह दुनिया के सबसे संवेदनशील ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है।
- समुद्री यातायात पर असर: इस मार्ग पर तनाव बढ़ने से ग्लोबल ट्रेड पूरी तरह प्रभावित हो रहा है।
- UAE के साथ बढ़ा तनाव: हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने आरोप लगाया कि ईरान की तरफ से दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलें उनके समुद्री इलाके की ओर आईं। हालांकि ईरान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया, लेकिन इसके बाद UAE ने ईरान के साथ सभी प्रकार के वाणिज्यिक लेन-देन और वित्तीय गतिविधियों को अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया है।
- खदानों और नाकेबंदी का साया: अमेरिकी नौसेना लगातार इस क्षेत्र में गश्त कर रही है, जबकि तेहरान ने साफ कर दिया है कि वह अपनी शर्तों पर ही इस रास्ते को चालू होने देगा।
तेल बाजार में भूचाल: 91 डॉलर के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड
इस संघर्ष का सबसे सीधा और घातक असर आम जनता की जेब पर पड़ने लगा है। कच्चे तेल के बाजार में भारी हलचल देखने को मिल रही है। भू-राजनीतिक तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) उछलकर करीब 91 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू चुका है, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी 85 डॉलर के पार ट्रेड कर रहा है।
अर्थशास्त्रियों और ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समुद्री नाकेबंदी और तनाव लंबे समय तक जारी रहा, तो वैश्विक स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। इसका असर भारत समेत दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर महंगाई के रूप में पड़ना तय है।
निष्कर्ष: कूटनीति जीतेगी या युद्ध?
फिलहाल, अमेरिका और ईरान के बीच शब्दों की यह जंग किस ओर जाएगी, यह कह पाना बेहद मुश्किल है। एक तरफ ट्रंप का आक्रामक रुख और दूसरी तरफ ईरान की जिद ने मध्य पूर्व (Middle East) को एक बार फिर बारूद के ढेर पर ला खड़ा किया है। दुनिया भर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कोई तीसरा देश मध्यस्थता कर इस बड़े संकट को टाल पाएगा या फिर दुनिया को एक और भयानक युद्ध का सामना करना पड़ेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: अमेरिका और ईरान के बीच मुख्य विवाद का कारण क्या है?
Ans: दोनों देशों के बीच मुख्य विवाद परमाणु समझौते, अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों, नौसैनिक नाकेबंदी और होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री व्यापार को लेकर है।
Q2: होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों इतना महत्वपूर्ण है?
Ans: यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। यहां किसी भी प्रकार की रुकावट का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ता है।
Q3: क्या वर्तमान में दोनों देशों के बीच कोई बातचीत चल रही है?
Ans: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि ईरान के साथ फिलहाल कोई आधिकारिक बातचीत या बैठक निर्धारित नहीं है, हालांकि ओमान जैसे मध्यस्थ देश तनाव कम करने के प्रयास कर रहे हैं।