Breaking
► डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का मेल बैलेट पर बड़ा फैसला ► भारत में विदेशों से आया पैसों का सैलाब! एक दशक में ढाई गुना बढ़कर पहुंचा 151 अरब डॉलर ► अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से ट्रंप को बड़ा झटका, मेल बैलेट पर रोक लगाने से इनकार ► UPI पर जल्द लग सकता है बड़ा चार्ज? जानें सरकार और NPCI का नया प्लान ► योगी सरकार का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 14 IAS और 34 PCS अफसरों को नई जिम्मेदारी ► राजस्थान निकाय चुनाव: Gen-Z की धमाकेदार एंट्री, 21 साल के युवाओं ने रचा इतिहास ► पीटीआई के राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन से पहले इमरान खान की पार्टी को बड़ा झटका, 25 नेताओं के पासपोर्ट ब्लॉक ► रूस-यूक्रेन ऊर्जा हमलों पर ट्रंप के बड़े दावे से सनसनी, जेलेंस्की का पलटवार ► कर्नाटक में ईसाई समुदाय की बड़ी मांग, एंटी-कन्वर्जन कानून रद्द करने की गुहार ► राजस्थान निकाय चुनाव: बीजेपी का परचम, 41% वार्ड जीतकर कांग्रेस को पीछे छोड़ा ► डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का मेल बैलेट पर बड़ा फैसला ► भारत में विदेशों से आया पैसों का सैलाब! एक दशक में ढाई गुना बढ़कर पहुंचा 151 अरब डॉलर ► अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से ट्रंप को बड़ा झटका, मेल बैलेट पर रोक लगाने से इनकार ► UPI पर जल्द लग सकता है बड़ा चार्ज? जानें सरकार और NPCI का नया प्लान ► योगी सरकार का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 14 IAS और 34 PCS अफसरों को नई जिम्मेदारी ► राजस्थान निकाय चुनाव: Gen-Z की धमाकेदार एंट्री, 21 साल के युवाओं ने रचा इतिहास ► पीटीआई के राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन से पहले इमरान खान की पार्टी को बड़ा झटका, 25 नेताओं के पासपोर्ट ब्लॉक ► रूस-यूक्रेन ऊर्जा हमलों पर ट्रंप के बड़े दावे से सनसनी, जेलेंस्की का पलटवार ► कर्नाटक में ईसाई समुदाय की बड़ी मांग, एंटी-कन्वर्जन कानून रद्द करने की गुहार ► राजस्थान निकाय चुनाव: बीजेपी का परचम, 41% वार्ड जीतकर कांग्रेस को पीछे छोड़ा

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से ट्रंप को बड़ा झटका, मेल बैलेट पर रोक लगाने से इनकार

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से ट्रंप को बड़ा झटका, मेल बैलेट पर रोक लगाने से इनकार

अमेरिकी न्यायपालिका के गलियारों से एक बेहद अहम और दूरगामी परिणाम वाला फैसला सामने आया है। देश के सर्वोच्च न्यायालय यानी सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसा निर्णय सुनाया है जिसे पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके राजनीतिक शिविर के लिए एक बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है। अदालत ने उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें अमेरिकी पोस्टल सर्विस (Postal Service) के माध्यम से आने वाले मेल बैलेट (Mail Ballots) की प्रक्रिया को सीमित करने या उसपर कड़े प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी। इस फैसले ने देश की चुनावी व्यवस्था और मतदान के अधिकारों को लेकर चल रही लंबी कानूनी खींचतान में एक नया मोड़ ला दिया है।

क्या था पूरा मामला और क्यों मचा था विवाद?

यह पूरा कानूनी विवाद अमेरिकी चुनाव प्रणाली की रीढ़ माने जाने वाले पोस्टल वोटिंग यानी डाक मतपत्रों से जुड़ा हुआ है। पिछले कुछ वर्षों से अमेरिकी राजनीति में मेल-इन वोटिंग को लेकर जबरदस्त बहस छिड़ी हुई है। एक तरफ जहां डेमोक्रेटिक पार्टी इसे मतदाताओं की सुविधा और लोकतंत्र की मजबूती का जरिया मानती है, वहीं दूसरी तरफ डोनाल्ड ट्रंप और उनके समर्थक लगातार यह दावा करते आए हैं कि इस व्यवस्था में धांधली की गुंजाइश अन्य माध्यमों की तुलना में अधिक होती है।

इसी वैचारिक और कानूनी संघर्ष के तहत, ट्रंप समर्थकों और संबंधित पक्षों ने अमेरिकी डाक सेवा की कार्यप्रणाली को निशाना बनाते हुए एक याचिका दायर की थी। उनकी मांग थी कि चुनाव के दौरान मेल बैलेट की प्रोसेसिंग और उसकी समय सीमा को लेकर कड़े नियम लागू किए जाएं ताकि इनकी संख्या को सीमित किया जा सके। हालांकि, निचली अदालतों से लेकर अब देश के सर्वोच्च न्यायालय तक, हर जगह इस मांग को कानूनी कसौटी पर कमजोर पाया गया।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुख्य बिंदु

  • याचिका खारिज: अदालत ने बिना किसी बड़े वैधानिक बदलाव के याचिका को खारिज कर दिया, जिसका मतलब है कि मौजूदा व्यवस्था पहले की तरह ही सुचारू रूप से चलती रहेगी।
  • मतदाताओं को राहत: इस निर्णय से उन लाखों मतदाताओं को बड़ी राहत मिली है जो सुदूर इलाकों में रहते हैं या स्वास्थ्य कारणों से मतदान केंद्र तक नहीं जा सकते और मेल बैलेट पर निर्भर हैं।
  • प्रशासनिक स्वतंत्रता: अदालत ने यह स्पष्ट किया कि चुनावी प्रक्रिया में अनावश्यक कानूनी अड़ंगे डालने से प्रशासनिक मशीनरी प्रभावित होती है।

राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं

इस फैसले के आने के बाद से ही अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय आगामी चुनावों की रणनीति को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर सकता है। जहां एक तरफ प्रोग्रेसिव खेमे ने इसे आम नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों की जीत करार दिया है, वहीं कंजर्वेटिव धड़े की तरफ से इसे लेकर गहरी नाराजगी जताई जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी चुनावी इतिहास में मेल बैलेट हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है, खासकर तब जब देश अत्यधिक राजनीतिक ध्रुवीकरण के दौर से गुजर रहा हो। ऐसे समय में सुप्रीम कोर्ट का यह रुख यह साफ करता है कि न्यायपालिका चुनावी नियमों में अचानक या बड़े बदलाव करने के पक्ष में नहीं है, जब तक कि इसके पुख्ता और अकाट्य सबूत सामने न आएं।

लोकतंत्र और मतदान अधिकारों पर प्रभाव

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा प्रभाव अमेरिकी नागरिकों के मन में मतदान प्रक्रिया के प्रति भरोसे को लेकर पड़ रहा है। चुनाव विशेषज्ञों के अनुसार, जब अदालतें इस तरह के फैसलों के जरिए चुनावी प्रक्रिया की स्थिरता को बनाए रखती हैं, तो इससे सिस्टम में आम जनता का विश्वास मजबूत होता है। मेल बैलेट की सुविधा न केवल बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए वरदान साबित होती है, बल्कि यह मतदान प्रतिशत को बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाती है।

भविष्य की रणनीतियों पर असर

चूंकि अब सर्वोच्च अदालत ने साफ कर दिया है कि मेल बैलेट की मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं होने जा रहा है, इसलिए दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों (रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स) को अपनी चुनावी रणनीतियों को इसी के अनुसार ढालना होगा। राजनीतिक दलों के रणनीतिकार अब इस बात पर ज्यादा जोर दे रहे हैं कि कैसे अधिक से अधिक समर्थकों को मेल बैलेट के जरिए समय पर वोट डालने के लिए प्रेरित किया जाए।

आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि इस कानूनी ड्रामे के बाद राजनीतिक दल अपने कैंपेन में इस मुद्दे को किस तरह से भुनाते हैं। फिलहाल, इस फैसले ने यह साबित कर दिया है कि अमेरिकी कानूनी ढांचे में चुनावी नियमों को बदलना किसी भी पक्ष के लिए आसान नहीं है, और न्यायपालिका हर कदम पर संविधान और जनहित को सर्वोपरि रखती है।

About the Author

ममता पाठक

ममता पाठक

Chief Editor (विदेश खबरें)

ममता पाठक न्यूज़रूम की संपादकीय दिशा तय करने वाली प्रमुख स्तंभ हैं। अंतरराष्ट्रीय खबरों की गहरी समझ और वर्षों के अनुभव के साथ, वे कंटेंट की गुणवत्त...

Read More