उत्तराखंड के निर्माण के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर बलिदानियों की स्मृतियों को चिरस्थाई बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक कार्यक्रम के दौरान घोषणा की है कि जिन राज्य आंदोलनकारियों और बलिदानियों की प्रतिमाएं अब तक स्थापित नहीं हो पाई हैं, उन्हें उनके पैतृक गांवों या फिर उनके निवास क्षेत्रों में उचित स्थानों पर पूरे सम्मान के साथ स्थापित किया जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को राज्य के संघर्षपूर्ण इतिहास और बलिदानियों के योगदान से गहराई से परिचित कराना है।
रामपुर तिराहा कांड के बलिदानियों को नमन, 27 लाख रुपये की राशि स्वीकृत
मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा स्थित बलिदानी स्थल पर आयोजित एक भव्य और भावुक श्रद्धांजलि सभा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने रामपुर तिराहा कांड के बलिदानियों की प्रतिमाओं की स्थापना के कार्य का औपचारिक रूप से शिलान्यास किया। इस प्रोजेक्ट के लिए सरकार की ओर से 27 लाख रुपये की धनराशि भी अवमुक्त कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन के महानायकों और अमर बलिदानियों के त्याग को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता, और उनके बलिदान की कहानी भावी पीढ़ियों के मार्गदर्शन का काम करेगी।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने उस भूमि के इतिहास को भी याद किया जिस पर यह स्मारक बना है। उन्होंने स्मारक के निर्माण के लिए अपनी बहुमूल्य भूमि दान करने वाले स्वर्गीय पंडित महावीर शर्मा के अद्वितीय योगदान को पूरी विनम्रता के साथ नमन किया।
परिसर का होगा आधुनिकीकरण, बनेगा ई-पुस्तकालय और भव्य संग्रहालय
बलिदानियों की स्मृतियों को संजोने के साथ-साथ रामपुर तिराहा स्थित राज्य अतिथि गृह के उच्चीकरण (अपग्रेडेशन) का निर्णय भी लिया गया है। इस पूरी योजना के तहत निम्नलिखित प्रमुख विकास कार्य किए जाएंगे:
- ई-पुस्तकालय की स्थापना: स्मारक परिसर में बने पुस्तकालय को एक आधुनिक डिजिटल ई-पुस्तकालय में बदला जाएगा, ताकि शोधार्थियों और युवाओं को आसानी से ऐतिहासिक दस्तावेज मिल सकें।
- संग्रहालय का विस्तार: म्यूजियम या संग्रहालय का दायरा बढ़ाया जाएगा, जिसमें उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर की झलक देखने को मिलेगी।
- लोक संस्कृति का प्रदर्शन: नए संग्रहालय में उत्तराखंड के पारंपरिक वाद्य यंत्रों, विशिष्ट वेशभूषा और लोक संस्कृति से जुड़ी दुर्लभ सामग्रियों को प्रदर्शित किया जाएगा।
राज्य आंदोलनकारियों के पुन: चिह्नीकरण की प्रक्रिया होगी तेज
लंबे समय से चली आ रही राज्य आंदोलनकारियों की मांगों पर संवेदनशीलता दिखाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आंदोलनकारियों के पुन: चिह्नीकरण की बची हुई प्रक्रिया को भी बहुत जल्द पूरा कर लिया जाएगा। सरकार की यह प्राथमिकता है कि राज्य के निर्माण में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से योगदान देने वाले हर एक व्यक्ति और उनके आश्रितों को पूरा मान-सम्मान और अधिकार मिले। इसके लिए लगातार नीतिगत कदम उठाए जा रहे हैं और प्रशासनिक स्तर पर भी तेजी से काम किया जा रहा है।
"राज्य आंदोलनकारियों और बलिदानियों के सपनों के अनुरूप एक समृद्ध, सशक्त और अग्रणी उत्तराखंड का निर्माण करना ही उनके प्रति हमारी सबसे सच्ची श्रद्धांजलि होगी। सरकार इस दिशा में पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ रही है।" - पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड
देहरादून शहीद स्मारक पर दी गई श्रद्धांजलि
रामपुर तिराहा जाने से पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राजधानी देहरादून स्थित मुख्य शहीद स्मारक पहुंचकर राज्य आंदोलन के तमाम बलिदानियों को अपनी नम आंखों से श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने कहा कि आज उत्तराखंड जिस स्वतंत्र और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है, उसकी नींव में इन्हीं वीर सपूतों का खून और पसीना शामिल है। राज्य की जनता अपने इन वीरों के त्याग को हमेशा याद रखेगी।
सपनों का उत्तराखंड बनाने का संकल्प
वर्ष 2026 के इस दौर में जब उत्तराखंड अपनी विकास यात्रा के नए आयाम छू रहा है, तब इस तरह के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक कदम राज्य की मूल आत्मा को जीवित रखने का काम करते हैं। स्थानीय नागरिकों और आंदोलन से जुड़े संगठनों ने सरकार के इस कदम की भूरी-भूरी प्रशंसा की है। विश्लेषकों का मानना है कि पैतृक गांवों में प्रतिमाएं लगने से ग्रामीण स्तर पर भी युवाओं में अपनी मातृभूमि और राज्य के प्रति प्रेम और सम्मान की भावना और अधिक मजबूत होगी।