प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में आधुनिकता और पौराणिक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलने वाला है। लंबे समय से प्रतीक्षित वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) की महत्वाकांक्षी ‘आनंद काशी आवासीय योजना (फेज-1)’ के जमीन पर उतरने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। कल्लीपुर क्षेत्र में आकार ले रही इस हाई-प्रोफाइल योजना के पंजीकरण का रास्ता अब पूरी तरह से साफ होता नजर आ रहा है। मिली ताजा जानकारी के अनुसार, इस प्रोजेक्ट के लिए रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी यानी रेरा (RERA) की मंजूरी अब बिल्कुल अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। सब कुछ तय योजना के मुताबिक रहा, तो अगले सप्ताह से ही इस ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए बुकिंग और पंजीकरण की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू कर दी जाएगी।
हाल ही में वीडीए उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने प्राधिकरण के शीर्ष अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की, जिसमें इस योजना की अब तक की प्रगति और आगामी कार्ययोजना की गहन समीक्षा की गई। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि पंजीकरण प्रक्रिया शुरू होने से पहले सभी तकनीकी और प्रशासनिक औपचारिकताओं को तुरंत पूरा कर लिया जाए, ताकि आवेदन करने वाले निवेशकों और आम नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
काशी की सांस्कृतिक थीम पर आधारित पहली गेटेड सिटी
लगभग 4,56,398.69 वर्ग मीटर के विशाल क्षेत्रफल में फैलाई जा रही यह योजना कई मायनों में ऐतिहासिक है। प्राधिकरण के दावों के मुताबिक, यह वाराणसी की पहली समेकित और पूरी तरह से सुरक्षित गेटेड सिटी होगी। इस पूरी टाउनशिप को विशेष रूप से काशी की प्राचीन सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और वैदिक विरासत की थीम पर ढाला जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल कंक्रीट के मकान खड़े करना नहीं, बल्कि देवदीपावली, घाटों और संकीर्ण गलियों के शहर काशी की आत्मा को आधुनिक जीवनशैली के साथ जोड़ना है।
योजना के पहले चरण (फेज-1) के तहत बुनियादी ढांचे को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यहां रहने वाले लोगों को महानगरों जैसी आधुनिक सुविधाएं अपने ही शहर में मिल सकें। पर्यावरण संरक्षण को इस पूरी योजना का मुख्य केंद्र बिंदु बनाया गया है, जिसके तहत कंक्रीट के जंगलों के बीच हरियाली का विशेष ध्यान रखा गया है।
1,004 आवासीय प्लॉट और तमाम व्यावसायिक भूखंड
इस मेगा टाउनशिप में हर वर्ग के लोगों की जरूरतों का ख्याल रखा गया है। योजना के पहले चरण के तहत कुल 1,004 आवासीय प्लॉट विकसित किए जा रहे हैं। लोगों की आर्थिक क्षमता और परिवार के आकार को ध्यान में रखते हुए प्लॉटों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है:
- 72 वर्ग मीटर के छोटे और किफायती प्लॉट
- 162 वर्ग मीटर के मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए उपयुक्त प्लॉट
- 200 वर्ग मीटर के बड़े आवासीय प्लॉट
- 288 वर्ग मीटर तक के प्रीमियम और लग्जरी प्लॉट
आवासीय भूखंडों के अलावा इस योजना में तीन बड़े ग्रुप हाउसिंग भूखंड, 108 व्यावसायिक भूखंड (कमर्शियल प्लॉट्स), एक शैक्षणिक (एजुकेशनल) भूखंड, एक हेल्थकेयर भूखंड, एक अत्याधुनिक कम्युनिटी सेंटर और दो यूटिलिटी भूखंड भी शामिल किए गए हैं। यानी यहां रहने वाले लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और खरीदारी के लिए टाउनशिप से बाहर जाने की ज्यादा जरूरत नहीं पड़ेगी।
सुगम यातायात और मजबूत बुनियादी ढांचा
किसी भी टाउनशिप की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वहां का आवागमन कितना सुगम है। 'आनंद काशी' योजना में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है। यहां यातायात को सुचारू बनाए रखने के लिए चौड़ी सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। योजना के भीतर:
- 24 मीटर चौड़ी मुख्य सड़कें
- 18 मीटर चौड़ी संपर्क सड़कें
- 12 मीटर और 9 मीटर चौड़ी आंतरिक सड़कें बनाई जा रही हैं।
इसके साथ ही निर्बाध जलापूर्ति, आधुनिक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, भूमिगत विद्युत (अंडरग्राउंड इलेक्ट्रिसिटी) व्यवस्था और वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) जैसी तमाम आधुनिक सुविधाएं इस टाउनशिप की खूबसूरती में चार चांद लगाएंगी।
4.94 एकड़ में बनेगा भव्य केंद्रीय पार्क
प्रदूषण भरी शहरी जिंदगी से दूर सुकून के पल बिताने के लिए इस योजना का मुख्य आकर्षण करीब दो हेक्टेयर यानी 4.94 एकड़ क्षेत्रफल में विकसित किया जा रहा विशाल केंद्रीय पार्क (Central Park) होगा। यह पार्क इस पूरी टाउनशिप का 'ग्रीन हार्ट' साबित होगा।
इस पार्क के अंदर की रूपरेखा बेहद मनमोहक तैयार की गई है:
- भव्य नटराज प्रतिमा और आकर्षक जल फव्वारे से सुसज्जित एक केंद्रीय प्लाजा
- खुले आसमान के नीचे कार्यक्रमों के लिए ओपन लॉन और एम्फीथिएटर
- बच्चों के खेलने के लिए आधुनिक उपकरणों से लैस चिल्ड्रन प्ले एरिया
- योग और ध्यान प्रेमियों के लिए शांत मेडिटेशन गार्डन
- बुजुर्गों के टहलने और बैठने के लिए विशेष सीनियर सिटीजन जोन
- रंग-बिरंगे फूलों से सजा फ्लावर गार्डन
- फिटनेस प्रेमियों के लिए जॉगिंग ट्रैक और सुरक्षित पैदल पथ
इतना ही नहीं, इस केंद्रीय पार्क के चारों ओर एक पैदल-अनुकूल (पेडेस्ट्रियन-फ्रेंडली) मार्केट प्लाजा और चार प्रमुख पैदल प्रवेश द्वार भी प्रस्तावित किए गए हैं, ताकि लोग बिना किसी वाहन के शोर-शराबे के यहां खरीदारी और सैर का आनंद ले सकें।
3.71 एकड़ में मियावाकी पद्धति से सघन वन
पर्यावरण संतुलन और क्लाइमेट चेंज के इस दौर में 'आनंद काशी' ने एक मिसाल कायम की है। योजना की सीमा के समीप करीब 3.71 एकड़ भूमि पर जापानी 'मियावाकी' पद्धति (Miyawaki Method) का उपयोग करके एक सघन वन विकसित किया जाएगा। इस तकनीक की खासियत यह होती है कि इसमें पौधे बहुत तेजी से बढ़ते हैं और कुछ ही वर्षों में यह क्षेत्र एक घने जंगल का रूप ले लेता है, जिससे स्थानीय स्तर पर ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है और जैव विविधता को बढ़ावा मिलता है।
प्राधिकरण के अनुसार, इस पूरी योजना का न्यूनतम 15 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह से हरित क्षेत्र (Green Area) के रूप में आरक्षित रखा गया है, जो यहां रहने वालों को शुद्ध हवा और स्वस्थ पर्यावरण की गारंटी देगा।
वीडीए उपाध्यक्ष का बयान और भविष्य की उम्मीदें
वीडीए उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ‘आनंद काशी आवासीय योजना’ को महज एक रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के रूप में नहीं, बल्कि वाराणसी के भविष्य के अर्बन मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य काशी की प्राचीन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को आधुनिक नगरीय सुविधाओं, सुव्यवस्थित अवसंरचना (Infrastructure) और एक हरित परिवेश के साथ जोड़ना है, ताकि यहां के बाशिंदों को विश्वस्तरीय आवासीय वातावरण मिल सके।
वाराणसी में प्रॉपर्टी की बढ़ती मांग को देखते हुए माना जा रहा है कि जैसे ही इस योजना का आधिकारिक पंजीकरण शुरू होगा, निवेशकों और घर खरीदने वालों के बीच भारी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है। काशी के इतिहास में यह अपनी तरह का पहला ऐसा प्रयोग है, जो आधुनिकता के साथ परंपरा का ऐसा मेल पेश कर रहा है। अब सबकी निगाहें रेरा की अंतिम मुहर और अगले सप्ताह खुलने वाली पंजीकरण खिड़की पर टिकी हैं।