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वाराणसी में स्मार्ट सिटी के दावों की पोल, छह महीने से जलमग्न हैं गलियां

वाराणसी में स्मार्ट सिटी के दावों की पोल, छह महीने से जलमग्न हैं गलियां

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को भले ही देश के सबसे आधुनिक और विकसित शहरों की तर्ज पर 'स्मार्ट सिटी' के रूप में गढ़ा जा रहा हो, लेकिन इस चमक-धमक के पीछे कुछ ऐसे इलाके भी हैं जहां की जमीनी हकीकत विकास के दावों की पोल खोलती नजर आती है। कैंट विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बजरडीहा-जोल्हा दक्षिणी (वार्ड नंबर 27) के बाशिंदे इन दिनों किसी नरक से बदतर जिंदगी जीने को मजबूर हैं। यहां की गलियां सड़कों का रूप नहीं बल्कि तालाबों में तब्दील हो चुकी हैं, और यह स्थिति कोई एक-दो दिन की नहीं बल्कि पिछले छह महीनों से लगातार बनी हुई है।

छह महीने से तालाब बनी गलियां, आम जनजीवन अस्त-व्यस्त

किसी भी शहर के विकास का पैमाना वहां की बुनियादी सुविधाओं, खासकर जल निकासी और साफ-सफाई से तय होता है। लेकिन बजरडीहा-जोल्हा दक्षिणी इलाके के लोगों के लिए पिछले छह महीने किसी सदमे से कम नहीं रहे। यहां की लगभग हर गली में घरों से निकलने वाला गंदा पानी और बारिश का अवशेष इस तरह जमा हो चुका है कि पैदल चलना भी मुहाल हो गया है। स्थानीय लोगों का दर्द साफ झलकता है जब वे बताते हैं कि उन्हें रोजाना घर से बाहर निकलने के लिए इसी दूषित पानी के सैलाब को पार करना पड़ता है।

स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं का घरों से बाहर निकलना दूभर हो गया है। कई बार लोग फिसलकर चोटिल भी हो चुके हैं। जरूरी कामकाज के सिलसिले में बाहर जाने वाले युवाओं और नौकरीपेशा लोगों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। राहगीरों के लिए यह मार्ग किसी चुनौती से कम नहीं है।

संक्रामक बीमारियों का खतरा और मच्छरों का भारी प्रकोप

लंबे समय तक एक ही जगह पर गंदा पानी ठहरने से वहां भयानक बदबू और कीचड़ का साम्राज्य स्थापित हो गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जलभराव के इस अभिशाप के कारण क्षेत्र में मच्छरों का प्रकोप बेकाबू हो चुका है। दिन ढलते ही मच्छरों के झुंड लोगों पर हमला बोल देते हैं, जिससे मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी गंभीर संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा मंडराने लगा है।

इलाके के स्वास्थ्य के हालात पर चिंता जताते हुए नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो इस क्षेत्र में किसी बड़ी स्वास्थ्य आपदा के फूटने से इंकार नहीं किया जा सकता है। घरों के अंदर तक सीलन और बदबू पहुंच रही है, जिससे लोगों का जीना मुहाल हो गया है।

स्मार्ट सिटी के दावों पर खड़े होते बड़े सवाल

वाराणसी में चल रहे सौंदर्यीकरण और विकास कार्यों के विज्ञापनों और दावों के बीच बजरडीहा की यह तस्वीर व्यवस्था पर सीधा सवालिया निशान लगाती है। नागरिकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि एक तरफ शहर के मुख्य मार्गों और पर्यटक स्थलों को भव्य रूप दिया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ घनी आबादी वाले रिहायशी इलाकों में बुनियादी जल निकासी जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी टोटा है।

लोगों का कहना है कि क्या स्मार्ट सिटी का मतलब केवल चुनिंदा जगहों का विकास करना है? क्या घनी बस्तियों में रहने वाले आम नागरिकों को साफ-सुथरा माहौल पाने का अधिकार नहीं है? इस उपेक्षा ने जनता और स्थानीय प्रशासन के बीच की खाई को और चौड़ा कर दिया है।

जनप्रतिनिधियों और विभागों की जवाबदेही पर चर्चा

इस विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व लंबे समय से एक ही परिवार के पास रहा है, जहां से विधायक लगातार सात बार चुने जा चुके हैं। इसके बावजूद क्षेत्र की यह मूलभूत समस्या जस की तस बनी हुई है। स्थानीय निवासियों ने अब खुलकर जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों की जवाबदेही तय करने की मांग उठानी शुरू कर दी है। जनता का सवाल है कि आखिर छह महीने बीत जाने के बाद भी किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या नेता की नजर इस नरक जैसे हालात पर क्यों नहीं पड़ी?

केवल कागजी कार्रवाई या दौरों से काम नहीं चलने वाला है। क्षेत्रीय जनता अब आर-पार के मूड में है और उनका कहना है कि जब तक इस समस्या का कोई वैज्ञानिक और स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

स्थायी समाधान की पुरजोर मांग

अस्थायी उपायों से तंग आ चुके बजरडीहा-जोल्हा दक्षिणी के नागरिकों ने नगर निगम और जिला प्रशासन के अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि उन्हें तात्कालिक राहत के साथ-साथ एक स्थायी हल चाहिए। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

  • तत्काल निरीक्षण और पानी की निकासी: प्रशासन तुरंत मौके पर पंप या अन्य आधुनिक उपकरणों के जरिए जमा हुआ गंदा पानी बाहर निकाले।
  • नालियों की उच्चस्तरीय जांच: यह पता लगाया जाए कि जलनिकासी के मौजूदा नेटवर्क में कहां और क्यों तकनीकी खामी है जिसके कारण पानी महीनों से रुका हुआ है।
  • नई पाइपलाइन और नालियों का निर्माण: आवश्यकतानुसार नई और चौड़ी नालियों या अंडरग्राउंड पाइपलाइन की व्यवस्था की जाए ताकि भविष्य में कभी ऐसी नौबत न आए।
  • नियमित साफ-सफाई: जब तक स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक क्षेत्र में नियमित रूप से एंटी-लार्वा का छिड़काव और फॉगिंग कराई जाए।

प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं निगाहें

फिलहाल, पूरे इलाके के लोगों की नजरें वाराणसी नगर निगम और जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। जनता ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी समस्याओं पर सुनवाई नहीं हुई तो वे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे। सवाल अब यह है कि क्या प्रशासन कुंभकर्णी नींद से जागेगा या फिर बजरडीहा के लोग यूं ही इस जलीय नर्क में जीने को विवश रहेंगे? वाराणसी के विकास के दावों की असल परीक्षा अब इसी वार्ड की गलियों में होनी है।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

Writer (स्थानीय खबरें)

रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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