वाराणसी के व्यस्त कचहरी परिसर में शुक्रवार दोपहर उस समय अफरा-तफरी और कोहराम मच गया, जब न्याय की आस में भटक रही एक उन्नीस वर्षीय युवती ने कथित तौर पर जहरीला पदार्थ सल्फास गटक लिया। अदालत की चौखट पर हुई इस खतरनाक घटना से सुरक्षा एजेंसियों से लेकर वकीलों और आम जनता तक के होश उड़ गए। आनन-फानन में पुलिस बल हरकत में आया और गंभीर हालत में तड़प रही युवती को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से उसकी नाजुक हालत को देखते हुए उसे काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) के ट्रॉमा सेंटर के लिए रेफर कर दिया गया। इस सनसनीखेज घटना ने न्यायिक परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था और मुकदमों के बोझ तलेिसस रहे आम इंसानों के मानसिक तनाव पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अदालत परिसर में अचानक मची भगदड़ और पुलिस की तत्परता
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुक्रवार की दोपहर करीब ढाई बजे का वक्त था। कचहरी परिसर में हमेशा की तरह मुकदमों की सुनवाई, वकीलों की आवाजाही और मुवक्किलों की भीड़भाड़ थी। इसी दौरान न्यायालय सुरक्षा प्रभारी निरीक्षक प्रमोद कुमार पांडे को सूचना मिली कि एक युवती ने परिसर के भीतर ही सल्फास का सेवन कर लिया है। सूचना मिलते ही सुरक्षा महकमे में हड़कंप मच गया। बिना एक पल गंवाए कचहरी चौकी प्रभारी अभिषेक वर्मा अपनी पुलिस टीम के साथ चंद मिनटों के भीतर घटनास्थल पर पहुंचे।
युवती की बिगड़ती हालत को भांपते हुए पुलिस ने बिना औपचारिकता में वक्त गंवाए उसे अपनी हिरासत और सुरक्षा में तत्काल पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय पहुंचाया। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टरों ने तुरंत उसका प्राथमिक उपचार शुरू किया। हालांकि, सल्फास के जहर का असर तेजी से फैलने के कारण डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत बीएचयू ट्रॉमा सेंटर के लिए रेफर कर दिया। वर्तमान में पुलिस की निगरानी में उसका इलाज जारी है और डॉक्टरों के मुताबिक उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
कौन है यह युवती और क्या है उसकी पृष्ठभूमि?
पुलिस की शुरुआती तफ्तीश में युवती की पहचान चांदनी साहनी के रूप में हुई है, जिसके पिता का नाम चिंटू साहनी है। हालांकि मूल रूप से वह महाराष्ट्र के पालघर जिले की रहने वाली बताई जा रही है, लेकिन इस मामले का उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल से भी गहरा कनेक्शन सामने आ रहा है। पुलिस रिकॉर्ड और शुरुआती बयानों के अनुसार, चांदनी उम्र में महज 19 साल की है और वह कचहरी परिसर में अपने किसी निजी मुकदमे की पैरवी के सिलसिले में सिलसिलेवार तरीके से आ रही थी।
घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस ने तुरंत दूरभाष के जरिए महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में रह रहे उसके परिजनों से संपर्क साधा। सूचना मिलते ही परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के मइल थाना अंतर्गत आने वाले अकूबा गांव से उसके परिजन तुरंत बीएचयू ट्रॉमा सेंटर के लिए रवाना हो चुके हैं। परिजनों के वाराणसी पहुंचने के बाद ही इस पूरे घटनाक्रम की परतें खुलने की उम्मीद जताई जा रही है।
पहले भी जान देने की कर चुकी है कोशिश?
यह मामला सिर्फ एक बार जहर खाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक लंबी और दर्दनाक दास्तान छिपी हो सकती है। पुलिस सूत्रों से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह पहली बार नहीं है जब इस युवती ने अपनी जीवनलीला समाप्त करने की कोशिश की हो। शुरुआती जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि युवती इससे पहले भी दो अलग-अलग मौकों पर चूहे मारने की खतरनाक दवा खा चुकी है।
हैरानी की बात यह भी है कि वह लगातार महाराष्ट्र से चलकर काशी आ रही थी और कचहरी के चक्कर काट रही थी। हालांकि, पुलिस इन तमाम अनौपचारिक जानकारियों को वेरिफ़ाई करने में जुटी हुई है। क्या बार-बार इस तरह के कदम उठाने के पीछे कोई गहरा मानसिक दबाव, कानूनी शोषण या फिर कोई पारिवारिक विवाद है? इन तमाम बिंदुओं पर पुलिस गहराई से तफ्तीश कर रही है।
प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
इस सनसनीखेज घटना के बाद वाराणसी कचहरी परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर कोई व्यक्ति अदालत के संवेदनशील परिसर के भीतर जहरीला पदार्थ जैसे सल्फास लेकर कैसे पहुंच गया? हालांकि सुरक्षाकर्मियों और पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए युवती की जान बचाने में जो मुस्तैदी दिखाई, उसकी प्रशंसा की जा रही है, लेकिन इस तरह की घटनाएं यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि अदालतों में आने वाले लोगों की काउंसलिंग या मानसिक तनाव को कम करने के लिए क्या कोई प्रभावी मेकैनिज्म मौजूद है?
- जांच के मुख्य बिंदु:
- युवती के पास सल्फास कहां से आया और वह इसे परिसर के अंदर कैसे लेकर पहुंची?
- वह मुकदमा किस मामले से जुड़ा है और उसमें विरोधी पक्ष कौन है?
- क्या उसे किसी बात का अत्यधिक मानसिक दबाव या न्याय मिलने में देरी की निराशा थी?
- परिवार के सदस्यों और वकीलों से पूछताछ के बाद क्या नए खुलासे होंगे?
अंतिम निष्कर्ष और आगे की कानूनी कार्रवाई
फिलहाल, बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टरों की एक विशेष टीम चांदनी साहनी के इलाज में जुटी हुई है और पुलिस के उच्च अधिकारी भी इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं। देवरिया से आ रहे परिजनों के वाराणसी पहुंचने के बाद पुलिस उनसे औपचारिक पूछताछ करेगी। इसके अलावा, युवती की तबियत में सुधार होने पर उसका बयान दर्ज किया जाएगा, जिसके बाद ही यह साफ हो पाएगा कि उसने इतना खौफनाक कदम उठाने के पीछे कौन सा मजबूर करने वाला कारण चुना था। वाराणसी पुलिस का कहना है कि हर एक पहलू की गहनता से जांच की जा रही है और कानून के मुताबिक जो भी तथ्य सामने आएंगे, उस आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।