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वाराणसी में किसानों को बड़ा तोहफा, मुफ्त मिले चना-सरसों के बीज मिनीकिट

वाराणसी में किसानों को बड़ा तोहफा, मुफ्त मिले चना-सरसों के बीज मिनीकिट

वाराणसी जिले में खेती-किसानी को नई रफ्तार देने और अन्नदाताओं की आय बढ़ाने की दिशा में एक बेहद अहम कदम उठाया गया है। दलहनी और तिलहनी फसलों के रकबे को विस्तार देने के उद्देश्य से स्थानीय स्तर पर किसानों के बीच चना, मटर और सरसों के बीज मिनीकिट का निःशुल्क वितरण किया गया। इस पहल का मुख्य मकसद किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों से जोड़ना है, ताकि कम लागत में बंपर पैदावार हासिल की जा सके।

जंसा और सेवापुरी केंद्रों पर हुआ बीजों का वितरण

गुरुवार को वाराणसी के आराजी लाइन ब्लॉक स्थित बहुउद्देशीय किसान कल्याण केंद्र जंसा और सेवापुरी केंद्र पर विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जंसा में आयोजित वितरण समारोह के दौरान मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे रोहनिया विधायक डॉ. सुनील पटेल ने अपने हाथों से चयनित किसानों को बीज मिनीकिट सौंपे। वहीं, सेवापुरी के बहुउद्देशीय किसान कल्याण केंद्र पर विधायक प्रतिनिधि कु. अदिति पटेल ने किसानों को बीज किट वितरित किए। इस दौरान क्षेत्रीय किसानों में खासा उत्साह देखने को मिला, क्योंकि रबी सीजन की शुरुआत में मुफ्त बीज मिलने से उनकी लागत में काफी कमी आएगी।

रोहनिया विधायक डॉ. सुनील पटेल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए किसानों को सरकार की अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं से भी अवगत कराया। उन्होंने कहा कि जिन अन्नदाताओं ने अभी तक आगामी सीजन के लिए गेहूं के बीज की बुकिंग नहीं कराई है, वे बिना किसी देरी के कृषि विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं। पोर्टल के माध्यम से किसानों को 50 प्रतिशत के भारी अनुदान पर उच्च गुणवत्ता वाला गेहूं का बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे सरकार की इन जनहितैषी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और उन्नत किस्म के बीजों का चयन कर अपनी आय को दोगुना करें।

समय से बुवाई और संतुलित उर्वरक पर जोर

सेवापुरी केंद्र पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान विधायक प्रतिनिधि कु. अदिति पटेल ने किसानों से विशेष आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तिलहनी फसलों विशेषकर सरसों के बीज मिनीकिट की समय से बुवाई करना बेहद जरूरी है। यदि बुवाई सही समय पर हो और फसल में संतुलित उर्वरकों (खाद) का सही मात्रा में प्रयोग किया जाए, तो न केवल उत्पादन की गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि बाजार में फसल का उचित और लाभकारी मूल्य भी मिलेगा।

संयुक्त कृषि निदेशक, वाराणसी मंडल, शैलेन्द्र कुमार ने कार्यक्रम में मौजूद किसानों को तकनीकी रूप से मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों को अंधाधुंध रासायनिक खादों के प्रयोग से बचना चाहिए। इसके बजाय, उन्हें अपने खेतों का मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card) बनवाना चाहिए और उसमें दी गई संस्तुतियों के आधार पर ही संतुलित उर्वरकों का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहती है और लंबे समय तक खेती के लिए जमीन उपजाऊ रहती है। इसके साथ ही उन्होंने कृषि विभाग द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।

ई-लॉटरी के जरिए हुआ चयन, ऐसे मिलेगा बीज

उप कृषि निदेशक अमित जायसवाल ने पूरी प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इन निःशुल्क मिनीकिट (चना, मटर और सरसों) के लिए किसानों का चयन पूरी पारदर्शिता के साथ ई-लॉटरी के माध्यम से किया गया है। जिन भाग्यशाली किसानों का चयन इस प्रक्रिया के तहत हुआ है, वे अपने नजदीकी राजकीय बीज गोदाम से संपर्क कर सकते हैं। बीज प्राप्त करने के लिए किसानों को गोदाम पर जाकर पॉस (PoS) मशीन पर अपना अंगूठा लगाना होगा, जिसके बाद उन्हें बीज सौंप दिए जाएंगे।

अमित जायसवाल ने किसानों को सलाह दी कि वे बीज मिलते ही खेत की ठीक से तैयारी करें और समय पर बुवाई का कार्य पूरा कर लें। उन्होंने कृषि विशेषज्ञों की सलाह को सर्वोपरि बताते हुए वैज्ञानिक विधियों को अपनाने पर जोर दिया, जिससे फसल को कीटों और रोगों से बचाया जा सके।

कीट प्रबंधन और बीज शोधन के मिले टिप्स

कार्यक्रम के दौरान कृषि रक्षा अधिकारी बृजेश विश्वकर्मा ने किसानों को तकनीकी बारीकियां समझाईं। उन्होंने किसानों को फसल सुरक्षा के गुर सिखाते हुए कीट एवं रोग प्रबंधन (Pest and Disease Management) पर विशेष सत्र लिया। उन्होंने कहा कि बुवाई से पहले भूमि शोधन और बीज शोधन (Seed Treatment) करना बेहद आवश्यक है। ऐसा करने से फफूंद जनित बीमारियों और शुरुआती दौर के कीटों से फसल की प्रभावी सुरक्षा होती है।

कार्यक्रम में इनकी रही मौजूदगी

इस अवसर पर कृषि विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी और मैदानी कर्मचारी उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से सहायक विकास अधिकारी कृषि अमित कुमार सिंह, विनय मिश्रा, सहायक विकास अधिकारी कृषि रक्षा डॉ. मनोज कुमार सिंह, वरिष्ठ प्राविधिक सहायक उदयराज सिंह, बीज गोदाम प्रभारी अमरजीत पटेल और हिमांशु कुमार सहित सैकड़ों की संख्या में दूर-दराज से आए प्रगतिशील किसान मौजूद रहे। सभी ने कृषि अधिकारियों की बातों को ध्यान से सुना और वैज्ञानिक तरीके से खेती करने का संकल्प लिया।

वाराणसी के इस कृषि समागम से यह स्पष्ट है कि सरकार और प्रशासन किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। समय पर मिले उन्नत बीज और वैज्ञानिक सलाह निश्चित रूप से इस बार के रबी सीजन में वाराणसी के किसानों की पैदावार को नए रिकॉर्ड स्तर तक ले जाने में मदद करेंगे।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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