वाराणसी में प्रशासनिक अमले और किसानों के बीच टकराव के हालात बनते नजर आ रहे हैं। चोलापुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ढेरही टोल प्लाजा को पूरी तरह से बंद कराने की मांग को लेकर पूर्वांचल किसान संगठन ने आज एक बड़े आंदोलन का ऐलान किया है। इस विरोध प्रदर्शन की घोषणा के बाद से ही स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया है और टोल प्लाजा के आसपास के इलाके को पूरी तरह से पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए कड़े इंतजाम किए हैं।
पूर्वांचल किसान संगठन का आक्रामक रुख
पूर्वांचल किसान संगठन के बैनर तले किसान और स्थानीय लोग लंबे समय से इस टोल प्लाजा के संचालन को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे थे। किसानों का मुख्य आरोप है कि यह टोल प्लाजा नियमों को ताक पर रखकर संचालित किया जा रहा है और आम जनता तथा स्थानीय वाहन चालकों से मनमाने तरीके से पैसों की वसूली की जा रही है। किसानों का तर्क है कि टोल के दायरे में आने वाले स्थानीय लोगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी मुद्दे को लेकर संगठन ने आज सीधे तौर पर नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
प्रशासन की सख्ती: 15 किलोमीटर के दायरे में धारा 144 लागू
किसानों द्वारा घोषित इस प्रदर्शन को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने पूरी तरह से कमर कस ली है। हालात को नियंत्रण में रखने के लिए ढेरही टोल प्लाजा के आसपास 15 किलोमीटर के बड़े दायरे में धारा 144 लागू कर दी गई है। इसके तहत किसी भी तरह के जनसमूह, जुलूस या अनधिकृत प्रदर्शन पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है। प्रशासन का साफ कहना है कि इस विरोध प्रदर्शन के लिए आयोजकों की तरफ से कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी, इसलिए किसी भी गैर-कानूनी गतिविधि को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
छावनी में तब्दील हुआ टोल प्लाजा क्षेत्र
आज सुबह से ही ढेरही टोल प्लाजा और उसके आसपास के रास्तों पर भारी पुलिस बल की तैनाती देखी जा रही है। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पीएसी (PAC) के जवानों के साथ-साथ कई थानों की फोर्स को मौके पर मुस्तैद किया गया है। अधिकारियों का दल खुद मोर्चा संभाले हुए है और हर आने-जाने वाले वाहन तथा संदिग्ध व्यक्ति पर कड़ी नजर रखी जा रही है। प्रशासन किसी भी कीमत पर यातायात व्यवस्था को बाधित नहीं होने देना चाहता है, क्योंकि यह मार्ग कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को आपस में जोड़ता है।
क्या हैं किसानों की मुख्य मांगें?
- ढेरही टोल प्लाजा को तत्काल प्रभाव से पूरी तरह से बंद किया जाए।
- स्थानीय नागरिकों और छोटे वाहनों को टोल टैक्स के दायरे से मुक्त रखा जाए।
- NHAI द्वारा नियमों की अनदेखी करने पर उच्च स्तरीय जांच बैठाई जाए।
- टोल प्रबंधन पर अवैध वसूली के गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई हो।
NHAI और प्रशासन की प्रतिक्रिया
दूसरी ओर, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और टोल संचालन से जुड़े अधिकारियों का पक्ष है कि यह टोल सभी वैध नियमों और सरकारी दिशा-निर्देशों के तहत ही संचालित किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि विकास कार्यों और सड़कों के रखरखाव के लिए टोल वसूली अनिवार्य प्रक्रिया है। हालांकि, किसानों के इस कड़े तेवर और आक्रोश को देखते हुए अधिकारी बैकफुट पर नजर आ रहे हैं और स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी तरह की बड़ी हिंसक झड़प को टाला जा सके।
आम जनता और यात्रियों की मुश्किलें
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे ज्यादा परेशानी का सामना आम यात्रियों और ट्रांसपोर्टर्स को करना पड़ रहा है। सुरक्षा के कड़े इंतजामों और संभावित हंगामे के कारण इस रूट से गुजरने वाले लोगों को भारी ट्रैफिक जाम और पूछताछ का सामना करना पड़ रहा है। कई लोगों ने अपनी यात्रा के मार्ग में बदलाव भी कर लिया है। स्थानीय प्रशासन लगातार लोगों से अपील कर रहा है कि वे कानून का पालन करें और शांति बनाए रखें, जबकि किसान संगठन अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहे हैं। आने वाले कुछ घंटों में इस हाई-वोल्टेज ड्रामा पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं कि क्या प्रशासन किसानों को मनाने में कामयाब होता है या गतिरोध और अधिक गहराता है।