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वाराणसी में बारिश के बीच पानी में डूबी झोपड़ी, मदद की आस में नट समुदाय

वाराणसी में बारिश के बीच पानी में डूबी झोपड़ी, मदद की आस में नट समुदाय

वाराणसी जिले के विकासखंड आराजी लाइन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम सभा महमदपुर में एक ऐसा दर्दनाक नजारा देखने को मिल रहा है, जो विकास के तमाम दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। यहाँ नट समुदाय के कुछ गरीब परिवार इन दिनों आसमान से बरसती आफत के बीच पानी से घिरी अपनी झोपड़ियों में किसी तरह जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने इन बेसहारा लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। कच्चे और जर्जर घरों के गिरने और उनमें पानी भर जाने के बाद इन परिवारों के सामने सिर छिपाने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि लोग अपनी ही झोपड़ियों के अंदर जमा पानी को बाल्टी और डिब्बों के सहारे बाहर निकालने को विवश हैं।

पानी के बीच जीवन जीने की मजबूरी

सितंबर 2026 के इन दिनों में जब पूरा उत्तर भारत मानसूनी बारिश की चपेट में है, तब महमदपुर गांव के इस नट बस्ती की तस्वीरें झकझोर देने वाली हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, जैसे-जैसे बारिश तेज होती है, उनकी झोपड़ियों के आसपास जलभराव की समस्या विकराल रूप धारण कर लेती है। पानी घरों के अंदर तक घुस जाता है, जिससे उनके पास बैठने, सोने या सूखा खाना पकाने तक के लिए सूखी जगह नहीं बचती। छोटे-छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ इन परिवारों को इस कीचड़ और गंदे पानी के बीच ही अपने दिन और रात काटने पड़ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जलभराव की स्थिति लंबे समय तक बनी रहने के कारण अब उन्हें महामारी और गंभीर बीमारियों फैलने का भी सताने लगा है।

दो साल से लगा रहे हैं अधिकारियों के चक्कर

इस बस्ती में रहने वाले रसूलिया देवी, बदरुद्दीन, रानी देवी और सरिता देवी जैसे कई अन्य लोगों ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि उनके पास जीवनयापन के लिए कोई पक्की छत नहीं है। वे लंबे समय से इन अस्थायी झोपड़ियों में ही रहकर अपना गुजर-बसर कर रहे हैं। इन परिवारों का आरोप है कि प्रधानमंत्री आवास योजना या अन्य ग्रामीण आवास योजनाओं का लाभ पाने के लिए वे पिछले लगभग दो वर्षों से लगातार राजातालाब तहसील से लेकर संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने कई बार लिखित शिकायतें और आवेदन भी दिए, लेकिन हर बार उन्हें केवल कोरे आश्वासन ही मिले। जमीन पर धरातल पर उनकी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

सरकारी योजनाओं के दावों पर उठे गंभीर सवाल

देश और प्रदेश की सरकारों द्वारा गरीबों, वंचितों और जरूरतमंदों को पक्का मकान देने के लिए बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं और कई योजनाएं चलाई जाती हैं। ऐसे में महमदपुर के नट समुदाय के इन पात्र परिवारों को अब तक किसी भी योजना का लाभ न मिल पाना स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों का कहना है कि जब वे पात्रता की सभी शर्तों को पूरा करते हैं, तो फिर उन्हें उनका हक मिलने में इतनी देरी क्यों हो रही है? क्या शासन की योजनाएं केवल कागजों तक ही सीमित रह जाती हैं?

प्रशासन की अपनी समस्याएं और तर्क

इस पूरे मामले पर जब ग्राम प्रधान अनवर से बातचीत की गई, तो उन्होंने अपनी ओर से स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि इस संबंध में हल्का लेखपाल द्वारा गांव में आकर जांच की जा चुकी है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, ग्राम सभा के पास वर्तमान में कोई भी खाली सरकारी जमीन (बंजर या नवीन परती) उपलब्ध नहीं है। ग्राम प्रधान का कहना है कि जमीन की उपलब्धता न होने के कारण इन परिवारों को नियमानुसार आवास उपलब्ध कराने में तकनीकी समस्या आ रही है। हालांकि, जमीन न होने की प्रशासनिक मजबूरी अपनी जगह है, लेकिन सवाल यह है कि इस बीच इन बेसहारा परिवारों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?

स्वास्थ्य और संक्रमण का मंडराता खतरा

लगातार जलभराव और गंदगी के बीच रहने से महमदपुर की इस नट बस्ती में अब स्वास्थ्य को लेकर बड़ा संकट पैदा हो गया है। डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के ठहरे हुए पानी में मच्छरों का पनपना आम बात है, जिससे मलेरिया, डेंगू और वायरल संक्रमण जैसी बीमारियां तेजी से फैल सकती हैं। छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति और भी अधिक खतरनाक साबित हो सकती है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल प्रभाव से मौके पर पहुंचकर पानी की निकासी के लिए पंप लगवाने और इस आपदा के समय इन परिवारों को किसी सुरक्षित स्थान पर शरण देने की गुहार लगाई है।

आगे क्या कदम उठाएगा प्रशासन?

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि प्रशासन चाहे, तो विशेष परिस्थितियों में अन्य विकल्पों पर विचार कर सकता है। जब तक स्थायी आवास की व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक इन परिवारों को किसी सामुदायिक भवन या सुरक्षित स्थान पर अस्थायी राहत पहुंचाई जानी चाहिए। फिलहाल, महमदपुर गांव के इन गरीब परिवारों की नजरें आसमान की ओर टिकी हैं—एक तरफ बारिश थमने की दुआ है, तो दूसरी तरफ किसी मसीहा या जिम्मेदार अधिकारी के आने का इंतजार है जो उनकी इस दयनीय स्थिति को बदलकर उनके चेहरे पर एक मुस्कान ला सके।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

Writer (स्थानीय खबरें)

निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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