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वाराणसी में गंगा का जलस्तर स्थिर, 69.62 मीटर पर थमी रफ्तार, वरुणा के उफान से राहत शिविरों में बढ़ी हलचल

वाराणसी में गंगा का जलस्तर स्थिर, 69.62 मीटर पर थमी रफ्तार, वरुणा के उफान से राहत शिविरों में बढ़ी हलचल

वाराणसी में पिछले कई दिनों से मची उथल-पुथल के बाद आखिरकार राहत भरी खबर सामने आई है। ऐतिहासिक नगरी में मां गंगा का जलस्तर अब स्थिर हो गया है, जिससे बाढ़ के खतरे से सहमे तटीय इलाकों के बाशिंदों ने बड़ी राहत की सांस ली है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सोमवार सुबह 8 बजे राजघाट गेज साइट पर गंगा का जलस्तर 69.62 मीटर दर्ज किया गया। पिछले कुछ घंटों से पानी के बढ़ने और घटने का सिलसिला थमने के बाद अब स्थिति नियंत्रण में नजर आ रही है।

खतरे के निशान के करीब पहुंच गया था पानी

बीते कुछ दिनों से वाराणसी में गंगा के तेवर काफी आक्रामक हो चले थे। पहाड़ों और मैदानी इलाकों में हुई बारिश के असर से यहां गंगा का जलस्तर लगातार और तेजी से ऊपर चढ़ रहा था। पानी ने धीरे-धीरे चेतावनी बिंदु को पीछे छोड़ दिया और देखते ही देखते खतरे के निशान के बेहद करीब जा पहुंचा। हालात यह हो गए थे कि प्रसिद्ध घाटों का आपसी संपर्क टूट गया और बाढ़ का पानी निचले इलाकों की तंग गलियों के साथ-साथ लोगों के घरों के दरवाजों तक दस्तक देने लगा था।

गंगा के इस विकराल रूप को देखकर तटवर्ती इलाकों में रहने वाले परिवारों की नींद उड़ गई थी। लोगों को अपने आशियाने डूबने का डर सताने लगा था और एहतियात के तौर पर कई परिवारों ने सुरक्षित स्थानों की तरफ पलायन भी शुरू कर दिया था। हालांकि, बीते दो दिनों पहले स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ और जलस्तर घटना शुरू हुआ, जिससे लोगों के चेहरों पर थोड़ी मुस्कान लौटी थी। अब सोमवार को जलस्तर पूरी तरह स्थिर होने से प्रशासन और आम जनमानस दोनों ने राहत महसूस की है।

वरुणा नदी का पलट प्रवाह अभी भी बना है चुनौती

भले ही गंगा के जलस्तर में ठहराव आ गया हो, लेकिन संकट पूरी तरह टला नहीं है। गंगा के पलट प्रवाह (Backflow) के कारण उसकी प्रमुख सहायक नदी वरुणा अभी भी उफान पर है और इसका पानी तबाही मचा रहा है। वरुणा के इस आक्रामक रुख से शहर के सलारपुर और उसके आसपास के कई निचले रिहायशी इलाकों में पानी घुस गया है।

राहत शिविरों में जीवन बिताने को मजबूर सैकड़ों परिवार

वरुणा नदी का पानी लोगों के घरों के भीतर तक पहुंचने के कारण जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। हालात इतने गंभीर हैं कि सैकड़ों की संख्या में परिवारों को अपने आशियाने छोड़कर प्रशासनिक राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है। जिला प्रशासन की ओर से इन शिविरों में शरण लेने वाले बाढ़ पीड़ितों के लिए भोजन, पानी और चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने के दावे किए जा रहे हैं, ताकि इस आपदा की घड़ी में लोगों को कम से कम परेशानियों का सामना करना पड़े।

प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नजर

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वाराणसी जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। बाढ़ प्रभावित और संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्त की जा रही है और प्रशासन का अमला हर गतिविधि पर बारीकी से नजर बनाए हुए है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (NDRF), प्रांतीय रक्षक दल और स्थानीय जल पुलिस की टीमों को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा गया है।

  • राजघाट गेज साइट: सोमवार सुबह जलस्तर 69.62 मीटर पर स्थिर दर्ज।
  • सहायक नदियां: वरुणा नदी का पलट प्रवाह बना चिंता का विषय।
  • सुरक्षा बल: एनडीआरएफ और जल पुलिस की टीमें लगातार कर रही हैं निगरानी।
  • राहत कार्य: प्रभावित परिवारों के लिए शिविरों में व्यवस्थाएं की गई हैं तेज।

स्थानीय लोगों और प्रशासन का अगला कदम

मौसम के बदले मिजाज और ऊपर से आ रहे पानी के फ्लो को देखते हुए जल आयोग के विशेषज्ञ लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक पानी पूरी तरह से सुरक्षित स्तर तक नीचे नहीं उतर जाता, तब तक राहत और बचाव अभियान पूरी गति से जारी रहेगा। घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को गहरे पानी में जाने से रोका जा सके।

फिलहाल, काशी के लोगों की निगाहें एक बार फिर आसमान और नदी के गेज मीटर पर टिकी हैं। हर कोई यही प्रार्थना कर रहा है कि जलस्तर में गिरावट का दौर जल्द शुरू हो ताकि लोग अपने घरों को लौट सकें और सामान्य दिनों की तरह अपनी जिंदगी की शुरुआत कर सकें।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

Writer (स्थानीय खबरें)

रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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