काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) के प्रांगण से इस वक्त एक बड़ी और बेहद संवेदनशील खबर सामने आ रही है। देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में शुमार इस यूनिवर्सिटी में उस वक्त भारी उबाल देखने को मिला, जब एक 85 वर्षीय पद्मश्री और वरिष्ठ चिकित्सक के साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार और मारपीट का मामला तूल पकड़ गया। इस घटना के बाद से न केवल छात्रों बल्कि पूरे академиक जगत में गहरी नाराजगी व्याप्त है। आज विश्वविद्यालय के शोध छात्रों और युवाओं ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासन के समक्ष अपनी नाराजगी दर्ज कराई और पूरे मामले में महज 24 घंटे के भीतर निष्पक्ष और निर्णायक कार्रवाई की मांग की है।
क्या है पूरा मामला? जानिए 29 अगस्त की रात क्या हुआ था
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना 29 अगस्त की रात्रि की है। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के वरिष्ठ चिकित्सक और पद्मश्री से सम्मानित 85 वर्षीय प्रो. टी.के. लहरी के साथ कथित तौर पर मारपीट, थप्पड़ मारने और अभद्र व्यवहार किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना के बाद से उनकी तबीयत बिगड़ गई और वर्तमान में वे आईसीयू (ICU) में उपचाराधीन हैं। मीडिया रिपोर्ट्स और परिजनों द्वारा दी गई जानकारियों के मुताबिक, इस घटना के बाद उनके चेहरे और आंख पर गंभीर चोट के निशान भी पाए गए हैं।
इतने वरिष्ठ और देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा विशेषज्ञ के साथ इस तरह के बर्ताव ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। घटना के तुरंत बाद परिजनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को इसकी औपचारिक शिकायत दी थी, लेकिन शुरुआती स्तर पर अपेक्षित प्रशासनिक सख्ती न दिखने के कारण छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा।
छात्र नेता रंजीत यादव ‘माधव’ के नेतृत्व में उमड़ा छात्रों का सैलाब
इस गंभीर प्रकरण पर चुप्पी साधने के बजाय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के शोध छात्रों और छात्र नेता रंजीत यादव ‘माधव’ (प्रत्याशी, स्नातक MLC वाराणसी खंड) ने मोर्चा संभाल लिया। उनके नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में छात्र और छात्र नेता विश्वविद्यालय प्रशासन के मुख्य कार्यालय पहुंचे। प्रतिनिधिमंडल ने BHU के कुलसचिव, IMS (इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) के निदेशक और IMS चिकित्सा अधीक्षक को एक कड़ा ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन सौंपते हुए छात्र नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि एक वरिष्ठ चिकित्सक, जिन्होंने अपना पूरा जीवन चिकित्सा सेवा और शिक्षण को समर्पित कर दिया, उनके साथ इस तरह का अमानवीय व्यवहार कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन को इस मामले में अपनी संस्थागत जवाबदेही तय करनी ही होगी।
छात्रों की 6 सूत्रीय प्रमुख मांगें
छात्र प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन के सामने कुछ बेहद स्पष्ट और सख्त मांगें रखी हैं, जिनका पालन समय सीमा के भीतर किया जाना अनिवार्य बताया गया है:
- तत्काल निलंबन: निष्पक्ष जांच पूरी होने तक संबंधित आरोपी को नियमानुसार तुरंत निलंबित किया जाए या कार्य से पृथक किया जाए।
- साक्ष्यों की सुरक्षा: घटना से जुड़े सभी सीसीटीवी (CCTV) फुटेज, मेडिकल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए, ताकि कोई छेड़छाड़ न हो सके।
- स्वतंत्र चिकित्सकीय जांच: प्रो. टी.के. लहरी जी की स्वतंत्र, पारदर्शी और निष्पक्ष चिकित्सकीय जांच सुनिश्चित की जाए।
- समयबद्ध रिपोर्ट: गठित जांच समिति द्वारा एक तय सीमा के भीतर पारदर्शी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
- एफआईआर (FIR): पर्याप्त और पुख्ता साक्ष्य मिलने पर तुरंत एफआईआर सहित आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाए।
- कठोर कार्रवाई: दोष सिद्ध होने की स्थिति में दोषी के खिलाफ कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
'हम किसी को बिना जांच दोषी नहीं ठहरा रहे, लेकिन न्याय चाहिए'
छात्र नेता रंजीत यादव ‘माधव’ ने स्पष्ट रूप से मीडिया और प्रशासन के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा, "हमारी यह मांग बिल्कुल नहीं है कि किसी को बिना जांच के दोषी मान लिया जाए। लेकिन हम यह भी स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि लीपापोती के प्रयास स्वीकार नहीं किए जाएंगे। हमारी मांग सिर्फ और सिर्फ निष्पक्ष जांच, संस्थागत जवाबदेही और यदि दोष सिद्ध होता है, तो कठोर से कठोर कानूनी कार्रवाई की है।"
उन्होंने आगे कहा कि विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित और पावन संस्थान में एक वरिष्ठ डॉक्टर और पद्मश्री अवॉर्डी के साथ यदि इस तरह की घटनाएं होंगी, तो आम छात्रों और समाज में क्या संदेश जाएगा? प्रशासन को बिना किसी बाहरी दबाव या पक्षपात के इस मामले की तह तक जाना चाहिए।
24 घंटे का अल्टीमेटम और आगे की रणनीति
छात्र प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। छात्रों का कहना है कि यदि अगले 24 घंटों के भीतर इस संवेदनशील मामले में कोई ठोस, स्पष्ट और संतोषजनक कार्रवाई सामने नहीं आती है, तो छात्र चुप नहीं बैठेंगे। इसके बाद लोकतांत्रिक और कानूनी माध्यमों का सहारा लेते हुए इस गंभीर प्रकरण को उच्च स्तर पर उठाया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।
इन प्रमुख चेहरों की रही मौजूदगी
इस विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन कार्यक्रम के दौरान BHU के परिसरों में भारी गहमागहमी रही। इस दौरान प्रतीक यादव, रीतम सिंह, अभिषेक गोप, रमेश कुमार, पुनीत सिंह, अभिषेक सिंह, शक्ति सिंह, वरुण मौर्य, चंदन पटेल, शशांक राय, डब्लू यादव, आशीष पांडे, सौरभ यादव, सावन पटेल, सौरभ यादववंशी, राजन पटेल, अतुल कुमार, अमित जायसवाल, आलोक, अनिकेत, कुंदन, अंकुल, जगत अम्बेडकर, और विशाल सिंह सहित सैकड़ों की संख्या में छात्र उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में प्रशासन से मांग की कि मामले की गंभीरता को समझते हुए बिना किसी विलंब के पारदर्शी कार्रवाई की जाए।
फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम के बाद बीएचयू प्रशासन पर भारी दबाव बन गया है। देखना यह होगा कि अगले 24 घंटों में प्रशासन क्या कदम उठाता है और क्या देश के इस प्रतिष्ठित संस्थान में न्याय की जीत होती है या नहीं। हमारी इस खबर पर पैनी नजर बनी हुई है, ताज़ा अपडेट्स के लिए जुड़े रहें।