पहाड़ों की गोद में पलने वाले बच्चे अक्सर ऊंचाई से नहीं डरते, बल्कि वे ऊंचाइयों को ही अपना मुकाम बना लेते हैं। देवभूमि उत्तराखंड की माटी ने एक बार फिर ऐसा कीर्तिमान रच दिखाया है, जिसने पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची और दुनिया की सबसे खतरनाक चोटियों में शुमार माउंट किलिमंजारो पर तिरंगा फहराने वाले दो नन्हे पर्वतारोहियों ने जब मंगलवार को राज्य के मुखिया से भेंट की, तो पूरा माहौल गर्व और उत्साह से भर उठा।
मुख्यमंत्री आवास पर हुआ नन्हे हीरोज का भव्य स्वागत
मास्टर रियांश पंत और प्रिशा रावत, ये दोनों ऐसे नाम हैं जिन्होंने अपनी कम उम्र में बड़े-बड़े कारनामे कर दिखाए हैं। अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो (5,895 मीटर) को सफलतापूप्र्व फतह करने के बाद, ये दोनों नन्हे पर्वतारोही मंगलवार को सीधे देहरादून में मुख्यमंत्री आवास पहुंचे। यहां उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शिष्टाचार भेंट की।
इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने दोनों बच्चों की पीठ थपथपाई और उन्हें इस ऐतिहासिक सफलता के लिए ढेरों बधाइयां दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी कम उम्र में इस तरह के जोखिम भरे और चुनौतीपूर्ण अभियान को सफलतापूर्वक पूरा करना यह साबित करता है कि उत्तराखंड के बच्चों में अदम्य साहस और कुछ कर गुजरने का जज्बा कूट-कूट कर भरा है।
माउंट किलिमंजारो: आसान नहीं था यह सफर
समुद्र तल से 5,895 मीटर (19,341 फीट) की ऊंचाई पर स्थित माउंट किलिमंजारो अपनी कठिन मौसम स्थिति, बर्फीली हवाओं और ऑक्सीजन की कमी के कारण पर्वतारोहियों के लिए एक कड़ी परीक्षा माना जाता है। ऐसे में रियांश और प्रिशा जैसी कम उम्र के बच्चों द्वारा इस चोटी पर तिरंगा फहराना किसी चमत्कार से कम नहीं है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी ऊंचाई पर बच्चों के शरीर का ढलना और मानसिक रूप से मजबूत रहना सबसे बड़ी चुनौती होती है। लेकिन इन दोनों नन्हें जांबाजों ने तमाम कठिनाइयों को मात देते हुए अपनी जिद और पक्के इरादे के दम पर शिखर पर कदम रखा।
अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प की मिसाल
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बातचीत के दौरान कहा कि इन दोनों बच्चों की यह उपलब्धि प्रदेश के अन्य युवाओं और बच्चों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। उन्होंने कहा, "रियांश और प्रिशा ने यह साबित कर दिया है कि अगर हौसला बुलंद हो, तो उम्र या शारीरिक सीमाएं कभी रुकावट नहीं बनतीं। उत्तराखंड सरकार ऐसे प्रतिभावान बच्चों को हरसंभव प्रोत्साहन देने के लिए प्रतिबद्ध है।"
उत्तराखंड हमेशा से ही साहसिक खेलों (Adventure Sports) का केंद्र रहा है। यहां की नदियां, पहाड़ और वादियां युवाओं को रोमांच के नए रास्ते तलाशने के लिए प्रेरित करती रही हैं। रियांश और प्रिशा की यह सफलता इस बात को और अधिक पुख्ता करती है कि आने वाले समय में देश को पर्वतारोहण के क्षेत्र में और भी कई बड़े सितारे मिलने वाले हैं।
भविष्य के लिए उज्ज्वल कामनाएं
भेंट के अंत में मुख्यमंत्री ने दोनों बाल पर्वतारोहियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें और अधिक ऊंचाइयों को छूने का आशीर्वाद दिया। इस मुलाकात के दौरान बच्चों के परिजनों और उनके साथ मौजूद मार्गदर्शकों ने भी अपने अनुभव साझा किए।
देवभूमि के इन नन्हे हीरोज की यह कहानी आज हर उस व्यक्ति के लिए एक सबक है जो बड़ी बाधाओं के आगे घुटने टेक देता है। रियांश और प्रिशा ने यह दिखा दिया है कि इरादे अगर मजबूत हों, तो दुनिया की सबसे ऊंची चोटी भी कदमों में झुक जाती है।