मूसलाधार बारिश जहां एक तरफ मौसम को सुहाना बनाती है, वहीं दूसरी तरफ जर्जर हो चुके ढांचों के लिए काल साबित होने लगती है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है, जहां सेवापुरी इलाके में बारिश के दौरान एक पुराने मकान का भारी-भरकम छज्जा ढह गया। इस हादसे की चपेट में आने से 74 वर्षीय बुजुर्ग महिला की जान चली गई।
घटना के बाद से ही पूरे गांव में सन्नाटा और शोक की लहर है। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू कराया।
नींद में ही छीन ली जिंदगी: जानें कैसे हुआ हादसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह दुखद घटना वाराणसी के सेवापुरी थाना क्षेत्र की है। पिछले कुछ दिनों से हो रही रुक-रुक कर बारिश के कारण कई पुराने मकानों की दीवारें और छज्जे नमी से कमजोर हो गए थे। मृतका की पहचान 74 वर्षीय इमरता देवी के रूप में हुई है।
बताया जा रहा है कि घटना के समय इमरता देवी अपने पुराने घर के छज्जे के नीचे सो रही थीं। अचानक बिना संभलने का कोई मौका दिए, जर्जर छज्जा भरभराकर सीधे उनके ऊपर आ गिरा। जोरदार आवाज सुनकर आसपास के लोग बदहवास होकर मौके पर पहुंचे और मलबे को हटाने में जुट गए।
"धमाके जैसी आवाज सुनकर हम बाहर भागे तो देखा कि छज्जा गिर चुका था। हमने तुरंत मलबा हटाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।" - स्थानीय ग्रामीण
प्रशासनिक कार्रवाई और पुलिस की मौजूदगी
ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद बुजुर्ग महिला को मलबे से बाहर निकाला, लेकिन चोटें इतनी गंभीर थीं कि उनकी मौके पर ही मौत हो चुकी थी। घटना की सूचना पाकर सेवापुरी थाने की पुलिस टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला।
पुलिस ने आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी करते हुए शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात कर हादसे की जानकारी ली और नियमानुसार सहायता का आश्वासन दिया।
हादसे से जुड़े मुख्य बिंदु:
- मृतका का नाम: इमरता देवी (उम्र 74 वर्ष)
- घटनास्थल: सेवापुरी क्षेत्र, वाराणसी (उत्तर प्रदेश)
- हादसे की वजह: लगातार बारिश के चलते पुराने मकान का जर्जर छज्जा ढहना
- वर्तमान स्थिति: पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा, कानूनी प्रक्रिया जारी
मानसून में जर्जर इमारतों से बढ़ा खतरा
वाराणसी और आसपास के ग्रामीण इलाकों में मानसून के दौरान पुराने और कच्चे मकानों का ढहना एक बड़ी समस्या बन जाता है। नमी और सीपेज के कारण पुराने पक्के ढांचे भी बेहद कमजोर हो जाते हैं। प्रशासन अक्सर बारिश के सीजन में जर्जर मकानों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह देता है।
स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि प्रशासन को ग्रामीण इलाकों में जर्जर हो चुकी इमारतों का सर्वेक्षण कराना चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह के जानलेवा हादसों को रोका जा सके। फिलहाल, इमरता देवी के निधन से परिवार में कोहराम मचा हुआ है।