देश के जाने-माने शिक्षाविद् और मोटिवेशनल स्पीकर विकास दिव्यकीर्ति ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं में हो रही लंबी देरी को लेकर एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि किसी भी राज्य की प्रशासनिक रीढ़ वहां की सिविल सेवा परीक्षाएं होती हैं, और यदि इन प्रक्रियाओं में ही अनावश्यक विलंब होने लगे, तो युवाओं का सिस्टम से भरोसा उठना लाजिमी है।
छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़: विकास दिव्यकीर्ति की चिंता
विकास दिव्यकीर्ति ने हाल ही में एक मंच से बात करते हुए इस बात पर जोर दिया कि एक छात्र अपने जीवन के सबसे कीमती साल एक परीक्षा की तैयारी में झोंक देता है। ऐसे में यदि फॉर्म निकलने से लेकर परीक्षा, फिर रिजल्ट और अंत में नियुक्ति पत्र मिलने तक का सफर 3 से 4 साल लंबा खिंच जाए, तो उस युवा और उसके परिवार पर क्या बीतती है, इसका अंदाजा लगाना कठिन नहीं है।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के लाखों युवा हर साल MPSC के माध्यम से राज्य की सेवा करने का सपना देखते हैं। लेकिन कई बार तकनीकी अड़चनों, अदालती मुकदमों या प्रशासनिक सुस्ती के कारण पूरी प्रक्रिया पटरी से उतर जाती है। इस स्थिति में तत्काल सुधार की आवश्यकता है।
सरकार और आयोग को दी ठोस सलाह
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए विकास दिव्यकीर्ति ने शासन और प्रशासन को कुछ व्यावहारिक सुझाव भी दिए हैं। उन्होंने मांग की है कि:
- निश्चित कैलेंडर का पालन हो: यूपीएससी (UPSC) की तर्ज पर MPSC को भी साल की शुरुआत में ही पूरा परीक्षा कैलेंडर जारी करना चाहिए और उसका कड़ाई से पालन होना चाहिए।
- परिणामों में पारदर्शिता और तेजी: परीक्षा संपन्न होने के अधिकतम दो से तीन महीनों के भीतर परिणाम घोषित किए जाने चाहिए, ताकि मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू का चक्र समय पर चल सके।
- न्यायिक मामलों का त्वरित निपटारा: कई बार भर्तियों पर अदालती रोक लग जाती है, जिसके लिए सरकार को मजबूत कानूनी पैरवी करनी चाहिए ताकि योग्य उम्मीदवारों का समय बर्बाद न हो।
युवाओं में निराशा का माहौल
विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा में देरी केवल मानसिक तनाव ही नहीं बढ़ाती, बल्कि कई बार ओवर-एज (आयु सीमा समाप्त होने) की समस्या भी पैदा कर देती है। कई मेधावी छात्र सिर्फ इसलिए सिविल सेवा में जाने से चूक जाते हैं क्योंकि आयोग समय पर परीक्षा आयोजित करने में विफल रहता है। विकास दिव्यकीर्ति की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब देश भर के युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की अनिश्चितता को लेकर मुखर हो रहे हैं।
आगे की राह क्या होनी चाहिए?
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि महाराष्ट्र सरकार और MPSC प्रशासन इस दिशा में क्या कदम उठाते हैं। छात्रों और शिक्षाविदों की मांग साफ है—भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी, समयबद्ध और पूरी तरह से त्रुटिहीन होनी चाहिए। यदि आने वाले समय में इन सुझावों पर अमल किया जाता है, तो न केवल प्रशासनिक तंत्र को सही समय पर नए अधिकारी मिलेंगे, बल्कि युवाओं का सिस्टम के प्रति विश्वास भी और मजबूत होगा।