देश के नौनिहालों के मन में राष्ट्र के भविष्य को लेकर किस तरह की कल्पनाएं पल रही हैं, इसे अब रंगों और शब्दों के जरिए एक बड़ा कैनवास मिलने जा रहा है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने स्कूली बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा को निखारने और उन्हें देश की विकास यात्रा से सीधे तौर पर जोड़ने के लिए एक अनूठी पहल की शुरुआत की है। इस विशेष अभियान का नाम ‘मेरे सपनों का भारत’ रखा गया है, जिसके तहत सितंबर महीने के दूसरे पखवाड़े में राज्यभर के स्कूलों में सृजनात्मक प्रतियोगिताओं का दौर शुरू होने वाला है।
हाल ही में बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा मंत्रियों की उच्चस्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद, महानिदेशक स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी ने इस आयोजन को लेकर सभी जिलाधिकारियों और शिक्षा अधिकारियों को कड़े और स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन की मंशा साफ है कि इस आयोजन को महज एक औपचारिकता न रखकर, बच्चों के भीतर छिपी कला और राष्ट्र प्रेम को एक जीवंत मंच प्रदान किया जाए।
17 से 26 सितंबर तक स्कूलों में सजेगा कल्पनाओं का संसार
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, आगामी 17 सितंबर से लेकर 26 सितंबर 2026 के बीच बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों में विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इसमें कक्षा 6 से लेकर कक्षा 8 तक के विद्यार्थियों के लिए विशेष तौर पर ‘मेरे सपनों का भारत चित्र सेवा’ प्रतियोगिता तय की गई है। इस प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चे पिछले एक दशक यानी 10 वर्षों में देश के भीतर बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीकी और अन्य क्षेत्रों में हुए बदलावों और विकास को अपनी कूची और रंगों के जरिए कागज पर उतारेंगे।
इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें केवल छात्र और शिक्षक ही नहीं, बल्कि अभिभावकों को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। जब माता-पिता अपने बच्चों को राष्ट्र निर्माण और विकास के विषयों पर तूलिका चलाते देखेंगे, तो यह दृश्य विद्यालयों को एक सामाजिक संवाद का केंद्र बना देगा।
माध्यमिक स्तर पर भाषण प्रतियोगिता का भी होगा आयोजन
केवल चित्रकला तक ही सीमित न रहते हुए, इस अभियान का दायरा बड़े बच्चों यानी माध्यमिक स्तर तक बढ़ाया गया है। कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए ‘मेरे सपनों का भारत’ विषय पर विशेष भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। जिन विद्यालयों में कक्षा 6 से 8 की कक्षाएं भी संचालित होती हैं, वहां चित्रकला और पोस्टर प्रतियोगिताओं को भी समानांतर रूप से चलाया जाएगा।
शासन के निर्देश हैं कि इस महाअभियान में केवल सरकारी स्कूलों तक ही सीमित न रहा जाए, बल्कि निजी (प्राइवेट) विद्यालयों की भी शत-प्रतिशत सहभागिता सुनिश्चित की जाए। इसके लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों और जिला विद्यालय निरीक्षकों को नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो आपसी समन्वय से इस आयोजन को सफल बनाएंगे।
विद्यालय से जिला स्तर तक का सफर
यह प्रतियोगिता एक चरण में खत्म नहीं होगी, बल्कि इसे बहु-स्तरीय प्रारूप दिया गया है:
- विद्यालय स्तर: सबसे पहले हर स्कूल में प्रतियोगिताएं होंगी, जहां से बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा।
- चयन प्रक्रिया: प्रत्येक विद्यालय से श्रेष्ठ पांच विद्यार्थियों के चित्र और पोस्टरों को छांटा जाएगा, जिन्हें आगे के दौर के लिए भेजा जाएगा।
- जिला स्तरीय प्रदर्शनी: विद्यालय स्तर पर चुने गए इन होनहारों की कलाकृतियों को 26 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 के बीच जिला स्तर पर आयोजित होने वाली भव्य प्रदर्शनी में प्रदर्शित किया जाएगा।
जिला स्तर पर आयोजित होने वाली इन प्रदर्शनियों में आम जनता, जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी रहेगी, ताकि बच्चों का हौसला बुलंद किया जा सके।
प्रतिभाओं का होगा भव्य सम्मान
बच्चों की मेहनत और कल्पना को प्रोत्साहित करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा विशेष सम्मान समारोह आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले मेधावियों को:
- प्रमाण पत्र (Certificate) प्रदान किए जाएंगे।
- सम्मानित ट्रॉफी और मेडल दिए जाएंगे।
- विशेष पुरस्कारों से नवाजा जाएगा।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि प्रतियोगिताओं के संचालन में किसी भी तरह की आर्थिक बाधा न आए, इसके लिए ड्राइंग शीट, रंग और अन्य आवश्यक स्टेशनरी की व्यवस्था समग्र शिक्षा के निर्धारित मदों से की जाएगी।
निष्कर्ष: बच्चों की नजर में देश का भविष्य
यह पहल सिर्फ एक शैक्षणिक गतिविधि नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ी के मानस को समझने का एक बड़ा अवसर है। जब एक बच्चा अपनी कल्पना के रंग भरकर यह दिखाता है कि उसका ‘सपनों का भारत’ कैसा होगा, तो वह असल में देश की नीतियों और विकास को एक नई दृष्टि देता है। 17 सितंबर से शुरू होने वाला यह महाउत्सव निश्चित रूप से उत्तर प्रदेश के नौनिहालों में एक नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार करेगा।