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11 गांव, 50 कृषि छात्र और एक अनूठी मुहिम: जानिए कैसे गांवों में खेती की तस्वीर बदल रहे ये युवा

11 गांव, 50 कृषि छात्र और एक अनूठी मुहिम: जानिए कैसे गांवों में खेती की तस्वीर बदल रहे ये युवा

क्या लैब में तैयार हुई कृषि तकनीकें और किताबी ज्ञान जमीनी स्तर पर किसानों तक सही वक्त पर पहुंच पा रहे हैं? इसी खाई को पाटने के लिए कृषि विज्ञान के छात्रों ने एक बेहतरीन पहल शुरू की है। 50 युवा कृषि छात्रों की एक टीम ने 11 गांवों को गोद लेकर वहां के किसानों का हाथ थाम लिया है।

किताबों से निकलकर सीधे खेतों तक पहुंचा ज्ञान

आमतौर पर देखा जाता है कि किसान परंपरागत तरीकों से खेती करते हैं, जिससे लागत अधिक आती है और मुनाफा कम होता है। इसी समस्या का समाधान निकालने के लिए यह पहल शुरू की गई है। 'ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव' (RAWE) कार्यक्रम के तहत ये छात्र सीधे किसानों की चौपाल और खेतों तक पहुंच रहे हैं।

इन 11 गांवों में छात्र हर दिन किसानों के साथ समय बिता रहे हैं और उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी दे रहे हैं।

छात्रों की इस टीम का मुख्य फोकस क्या है?

  • मृदा स्वास्थ्य और मिट्टी की जांच: खेतों की मिट्टी का सैंपल लेकर उसका परीक्षण करना और किसानों को यह बताना कि किस जमीन में किस उर्वरक (Fertilizer) की कितनी आवश्यकता है।
  • कीट प्रबंधन (Pest Control): फसलों में लगने वाले रोगों की पहचान कर कम लागत वाले जैविक और रासायनिक उपचार बताना।
  • कम पानी में बेहतर पैदावार: ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणालियों के प्रति किसानों को जागरूक करना।
  • सरकारी योजनाओं की जानकारी: पीएम किसान, फसल बीमा योजना और सब्सिडी वाली सरकारी स्कीमों के बारे में जानकारी देना ताकि किसान इनका लाभ उठा सकें।

जैविक खेती और प्राकृतिक तरीकों पर विशेष जोर

खेतों में रसायनों के बढ़ते प्रयोग को कम करने के लिए ये छात्र किसानों को वर्मीकंपोस्ट (केंचुआ खाद) और जीवामृत बनाने की विधि सिखा रहे हैं। छात्रों का मानना है कि यदि किसान रासायनिक खाद पर अपनी निर्भरता 20 से 30 प्रतिशत भी कम कर लें, तो उनकी लागत में भारी कमी आएगी और मिट्टी की उपजाऊ क्षमता लंबे समय तक बनी रहेगी।

"जब छात्र हमारे खेत में आकर मिट्टी की सेहत और बीज उपचार के बारे में बताते हैं, तो हमें बहुत कुछ नया सीखने को मिलता है। पारंपरिक खेती में जो गलतियां हम वर्षों से कर रहे थे, अब उनमें सुधार हो रहा है।" - रामाराव, स्थानीय किसान

कृषि क्षेत्र के लिए एक क्रांतिकारी कदम

युवा छात्रों का यह प्रयास न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित होगा, बल्कि भविष्य के इन कृषि वैज्ञानिकों को भी ग्रामीण भारत की वास्तविक समस्याओं को करीब से समझने का मौका दे रहा है। यह मॉडल अन्य राज्यों के कृषि संस्थानों के लिए भी एक मिसाल बन रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. कृषि छात्र गांवों में किसानों की मदद कैसे कर रहे हैं?

छात्र मिट्टी की जांच, फसल की बीमारियों की पहचान, जैविक खाद निर्माण और आधुनिक सिंचाई तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन (Demo) करके किसानों को प्रशिक्षित कर रहे हैं।

2. इस पहल से किसानों को क्या मुख्य लाभ हो रहा है?

किसानों की खेती की लागत घट रही है, सही खाद और दवाइयों के उपयोग से फसल का उत्पादन बढ़ रहा है और उन्हें सरकारी कृषि योजनाओं की सही जानकारी मिल रही है।

3. क्या यह कार्यक्रम अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है?

हां, कृषि विश्वविद्यालयों का 'RAWE' (Rural Agricultural Work Experience) मॉडल देशभर में लागू होता है, जहां छात्र ग्रामीण इलाकों में जाकर किसानों के साथ जमीनी स्तर पर काम करते हैं।

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काव्या त्रिपाठी

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Senior Editor

काव्या त्रिपाठी बिजनेस और टेक्नोलॉजी की जटिल दुनिया को सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती हैं। वे आर्थिक बदलाव, स्टार्टअप इकोसिस्...

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