तकनीकी दुनिया में इन दिनों एक बड़ा डर लगातार मंडरा रहा है—क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इंसान की नौकरी छीन लेगा? इस सवाल का जवाब अब देश के जाने-माने उद्योग विशेषज्ञों और प्रबंधन गुरुओं ने देना शुरू कर दिया है। हाल ही में आईआईएम काशीपुर में आयोजित प्रतिष्ठित प्रबंधन सम्मेलन 'दिशा 2026' में इस विषय पर एक बेहद दिलचस्प और दूरदर्शी चर्चा देखने को मिली। इस सम्मेलन में देश और दुनिया की दिग्गज कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने एक ऐसा आंकड़ा सामने रखा है, जो नौकरीपेशा लोगों और युवाओं में एक नई उम्मीद जगाने का काम कर रहा है।
2030 तक नौकरियों का गणित: संकट या नए अवसरों की बहार?
विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले कुछ सालों में कॉर्पोरेट जगत और तकनीक की दुनिया में एक बड़ा बदलाव आने वाला है। एक तरफ जहां साल 2030 तक ऑटोमेशन और एआई के प्रभाव के कारण लगभग नौ करोड़ नौकरियां प्रभावित या समाप्त हो सकती हैं, वहीं दूसरी तरफ इसी तकनीक की बदौलत करीब 17 करोड़ नए रोजगार के अवसर भी पैदा होने का अनुमान लगाया गया है। यानी साफ है कि नौकरियां कम नहीं होंगी, बल्कि उनका स्वरूप पूरी तरह से बदल जाएगा।
इस सम्मेलन में नीनओपल इंक, बीएनवाई, पीआईपी ग्लोबल, एचटी मीडिया ग्रुप, निवेशन टेक्नोलॉजीज, डीएस ग्रुप, वेदांता रिसोर्सेज, मेकमायट्रिप और अदाणी ग्रुप जैसे नामी संस्थानों के शीर्ष अधिकारियों ने शिरकत की। इन दिग्गजों ने बदलते कारोबारी परिदृश्य, एआई एकीकरण (AI Integration), रणनीतिक नवाचार (Strategic Innovation) और भविष्य की लीडरशिप पर अपने अनुभव साझा किए।
पारंपरिक सोच से बाहर आने का वक्त
चर्चा के दौरान उद्योग जगत के दिग्गजों ने इस बात पर जोर दिया कि आने वाले दौर में केवल किताबी ज्ञान या पारंपरिक तकनीकी दक्षता (Technical Skills) से काम नहीं चलने वाला है। पेशेवरों को अपने मुख्य क्षेत्र की विशेषज्ञता के साथ-साथ तकनीक की गहरी समझ, लगातार सीखने की जिज्ञासा (Curiosity), क्रॉस-फंक्शनल लर्निंग और कम समय में सटीक निर्णय लेने की क्षमता विकसित करनी होगी।
कंपनियों और संगठनों के लिए भी अब यह जरूरी हो गया है कि वे अपने पुराने पड़ चुके कारोबारी मॉडलों का समय-समय पर पुनर्मूल्यांकन करें। बाजार की बदलती नब्ज और ग्राहकों की आधुनिक जरूरतों को पहचान कर खुद को उसी हिसाब से ढालना ही किसी संगठन की सफलता की कुंजी होगी।
सही समय पर बदलाव और रणनीतिक नवाचार
सम्मेलन की पहली पैनल चर्चा का मुख्य विषय था—'पुरानी व्यवस्था पर विचार: जब सब कुछ सही चल रहा हो, तब संगठनों को बदलाव कब करना चाहिए?' इस सत्र में विशेषज्ञों ने इस बात पर मंथन किया कि परिचालन स्थिरता (Operational Stability) और रणनीतिक नवाचार के बीच संतुलन कैसे बिठाया जाए।
नीनओपल इंक के वरिष्ठ एसोसिएट कंसलटेंट ध्रुव चौधरी ने स्पष्ट किया कि क्रॉस-फंक्शनल लर्निंग के माध्यम से किसी उत्पाद का केवल तकनीकी विशेषज्ञ होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी मार्केट पोजिशनिंग की सही समझ होना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने ही 2030 के उन आंकड़ों का हवाला दिया, जो रोजगार के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की ओर इशारा करते हैं।
वहीं, बीएनवाई की वैश्विक प्रमुख (डेटा एंड एनालिटिक्स मैनेज्ड सर्विसेज) करिश्मा सिंगला का मानना था कि अनुभव इंसान को सही फैसले लेने में मदद करता है, लेकिन जिज्ञासा वह ईंधन है जो व्यक्ति को पुरानी सोच से बाहर निकालकर कुछ नया सीखने के लिए प्रेरित करती है।
बाजार में पिछड़ने से पहले लाएं सकारात्मक परिवर्तन
दूसरे पैनल में चर्चा का केंद्र बिंदु था कि कैसे कंपनियां बाजार में पिछड़ने से पहले खुद में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं। मेकमायट्रिप के सूचना प्रौद्योगिकी उपाध्यक्ष राहुल अग्रवाल ने बहुत ही बेबाक अंदाज में कहा कि बाजार में आने वाले व्यवधानों (Disruptions) को कभी भी सिर्फ एक चुनौती के रूप में नहीं देखना चाहिए। इन्हें हमेशा विकास और अपनी बाजार हिस्सेदारी (Market Share) बढ़ाने के एक बड़े अवसर के रूप में देखना चाहिए। उपभोक्ता के बदलते व्यवहार का विश्लेषण करके कंपनियां भविष्य के संकेतों को समय रहते भांप सकती हैं।
अदाणी एंटरप्राइजेज जीसीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुधीर दसामंथराव ने अपने विचार रखते हुए कहा कि हर बड़े बदलाव के साथ नए रास्ते भी खुलते हैं। एक सफल लीडर वही है जो वक्त की चाल को पहले से भांप ले, जिसके पास लचीलापन हो और जो किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए अपनी वैकल्पिक रणनीति तैयार रखे।
ग्राहकों की बदलती उम्मीदें और नए सेक्टर
वेदांता लिमिटेड निकोमेट के मुख्य विपणन अधिकारी हिमांशु अग्रवाल ने आज के दौर के उपभोक्ताओं की मानसिकता पर रोशनी डाली। उन्होंने बताया कि अब ग्राहक सामान्य या एक जैसे उत्पादों के बजाय अधिक अनुकूलित (Customized) और यूनिक प्रोडक्ट्स की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने स्टार्टअप्स और बड़ी कंपनियों के बीच आपसी सहयोग बढ़ाने तथा ई-कचरा पुनर्चक्रण (E-Waste Recycling) और बैटरी आपूर्ति जैसे उभरते क्षेत्रों में नवाचार की सख्त जरूरत पर जोर दिया।
इस विचार-विमर्श में पीआईपी ग्लोबल के ऑपरेशंस हेड पराग पुल्लीवार, एचटी मीडिया ग्रुप की मुख्य राजस्व अधिकारी स्वाति शारदा, निवेशन टेक्नोलॉजीज इंडिया के कंसल्टेंट क्षितिज सबलानिया और डीएस ग्रुप के सेल्स उपाध्यक्ष अमित खन्ना ने भी अपनी बहुमूल्य राय रखी। सभी का एक ही निष्कर्ष था कि सप्लाई चेन, मानव संसाधन और बाजार के शुरुआती संकेतों को समय रहते भांपना ही आज के बिजनेस लीडर्स की सबसे बड़ी परीक्षा है।
भविष्य के लीडर्स के लिए आईआईएम काशीपुर की पहल
कार्यक्रम के अंतिम चरण में एक इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें छात्रों और प्रबंधन शोधकर्ताओं ने उद्योग जगत के दिग्गजों से सीधे सवाल किए। इस सम्मेलन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अकादमिक ज्ञान (Academic Knowledge) और धरातल के व्यावहारिक अनुभवों के बीच का संवाद कितना जरूरी है।
आईआईएम काशीपुर का यह आयोजन आने वाले कल के प्रबंधकों और युवाओं के लिए एक दिशा-सूचक का काम कर रहा है। तकनीक के इस दौर में जहां एक तरफ अनिश्चितता का माहौल है, वहीं दूसरी तरफ अवसरों के नए दरवाजे भी खुल रहे हैं। जो युवा और पेशेवर खुद को इस बदलते परिवेश के अनुसार अपग्रेड करने के लिए तैयार हैं, उनके लिए भविष्य में सफलता की असीम संभावनाएं इंतजार कर रही हैं।