राजस्थान के अजमेर जिले से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने रिश्तों की पवित्रता को तार-तार कर दिया है। यहां अवैध प्रेम-संबंधों के रास्ते का कांटा हटाने के लिए एक शख्स ने अपने ही ममेरे भाई की बेरहमी से हत्या कर दी। हत्या को अंजाम देने के बाद शातिर आरोपी ने इसे एक भीषण सड़क दुर्घटना दिखाने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन पुलिस की बारीकी से की गई तफ्तीश और फॉरेंसिक जांच ने उसके इस झूठे किले को नेस्तनाबूद कर दिया।
सड़क हादसा या सुनियोजित साजिश? पिता के शक से खुली परतें
घटना अजमेर जिले के रूपनगढ़ थाना क्षेत्र की है। शिव कॉलोनी काचरोदा के रहने वाले प्रीतम कुमार ने थाने में एक रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनका बेटा महेश कुमार अपनी मोटरसाइकिल पर सवार होकर ननिहाल के पास स्थित भदूण मेले में शामिल होने के लिए घर से निकला था। 13 अगस्त की सुबह परिवार के पास एक फोन आया जिसने उनके पैरों तले जमीन खिसका दी।
फोन करने वाले बकरवालिया निवासी सुरेश ने उन्हें सूचना दी कि बालाजी मंदिर के पास छापरी रोड पर महेश का एक्सीडेंट हो गया है। उसे बताया गया कि रात को घर लौटते वक्त किसी अज्ञात वाहन ने महेश की बाइक को टक्कर मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई। शुरुआती तौर पर परिवार ने इसे हादसा मान लिया, लेकिन पिता प्रीतम कुमार के मन में लगातार एक अजीब सी टीस और हत्या की गहरी आशंका बनी हुई थी।
एफएसएल (FSL) जांच और बाइक की ने खोली पोल
मामले की गंभीरता को भांपते हुए अजमेर पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला और किशनगढ़ पुलिस उप अधीक्षक आयुष वशिष्ठ के मार्गदर्शन में एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया। पुलिस ने बिना समय गंवाए घटनास्थल पर एफएसएल (FSL) टीम को बुलाया और वहां से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए।
यहीं से इस पूरी मर्डर मिस्ट्री का पहला बड़ा सुराग हाथ लगा। पुलिस और विशेषज्ञों ने जब मौके पर पड़ी मोटरसाइकिल की जांच की, तो उनके कान खड़े हो गए। यदि कोई वाहन इतनी जोरदार टक्कर मारता कि युवक की मौत हो जाए, तो मोटरसाइकिल पर उसके गहरे निशान और भारी टूट-फूट होनी लाजिमी थी। लेकिन इसके विपरीत, बाइक पर मामूली खरोंच तक नहीं थी। यहीं से पुलिस का शक यकीन में बदल गया कि मामला सड़क दुर्घटना का नहीं, बल्कि किसी शातिर दिमाग द्वारा रची गई खौफनाक साजिश का है।
ममेरा भाई निकला कातिल, ऐसे रची थी खौफनाक साजिश
शक की सुई जब मृतक के करीबियों पर घूमी, तो पुलिस ने बकरवालिया निवासी मृतक के ममेरे भाई किस्तूरमल उर्फ दिनेश को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ शुरू की। पुलिस की शुरुआती पूछताछ में ही आरोपी टूट गया और उसने जो सच उगला, उसने सुनने वालों के होश उड़ा दिए।
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि आरोपी किस्तूरमल का मृतक महेश की पत्नी के साथ अवैध प्रेम-प्रसंग चल रहा था। इस बात की भनक जब महेश को लगी, तो दोनों के बीच कई बार तीखा विवाद और झगड़ा हुआ था। महेश लगातार इस रिश्ते के बीच में रोड़ा बन रहा था, जिसके चलते किस्तूरमल के दिल में उसके प्रति गहरी रंजिश पलने लगी थी। इसी रंजिश के तहत उसने महेश को रास्ते से हमेशा के लिए हटाने का खौफनाक प्लान तैयार किया।
मेले के बहाने बुलाया और सुनसान जगह पर उतारा मौत के घाट
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने सोची-समझी साजिश के तहत महेश को भदूण मेले में घूमने के बहाने बुलाया। इसके बाद दोनों ने बकरवालिया में बैठकर साथ में शराब पी। जब नशा चढ़ गया और महेश वापस अपने घर लौटने लगा, तो किस्तूरमल उसे झांसे में लेकर भामोलाव तालाब के पास बकरवालिया की सुनसान सरहद में ले गया।
वहां मौका पाकर आरोपी ने लाठी-डंडों से महेश के सिर और कनपटी पर ताबड़तोड़ कई वार किए, जिससे मौके पर ही उसकी दर्दनाक मौत हो गई। इसके बाद किसी को शक न हो, इसलिए उसने महेश के शव और उसकी मोटरसाइकिल को सड़क पर इस तरह से गिरा दिया ताकि सब इसे एक हिट-एंड-रन (Hit and Run) यानी सड़क हादसा समझ बैठें।
पुलिस ने दर्ज किया हत्या और साक्ष्य मिटाने का मामला
रूपनगढ़ थाना पुलिस ने इस ब्लाइंड मर्डर केस का पर्दाफाश करते हुए आरोपी किस्तूरमल उर्फ दिनेश को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या, आपराधिक साजिश रचने और हत्या के पुख्ता सबूत मिटाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामले की आगे की गहन जांच जारी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस कत्ल में कोई और भी शामिल था या नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: अजमेर मर्डर केस में मुख्य आरोपी कौन है और उसका रिश्ता मृतक से क्या था?
Ans: मुख्य आरोपी का नाम किस्तूरमल उर्फ दिनेश है, जो रिश्ते में मृतक महेश कुमार का ममेरा भाई (मामा का लड़का) लगता है।
Q2: हत्या की असल वजह क्या थी?
Ans: आरोपी किस्तूरमल का मृतक महेश की पत्नी के साथ अवैध प्रेम-प्रसंग था। महेश इस रिश्ते का विरोध करता था और उनके बीच विवाद भी हुआ था, इसी रंजिश में हत्या को अंजाम दिया गया।
Q3: पुलिस को हत्या का शक कैसे हुआ?
Ans: दुर्घटना स्थल पर एफएसएल (FSL) जांच के दौरान पुलिस ने देखा कि मृतक की मोटरसाइकिल पर किसी भी तरह की बड़ी टूट-फूट या टक्कर के निशान नहीं थे, जिससे पुलिस का शक गहरा गया।