भारतीय क्रिकेट में इन दिनों एक बड़ा सवाल हरफनमौला और आक्रामक विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत को लेकर तैर रहा है। क्या वाकई देश के सबसे प्रतिभाशाली मैच विनर के साथ अन्याय हो रहा है? यह सवाल अब किसी आम दर्शक या सोशल मीडिया यूजर ने नहीं, बल्कि देश के जाने-माने पूर्व सलामी बल्लेबाज और क्रिकेट एनालिस्ट आकाश चोपड़ा ने उठाया है।
ऋषभ पंत को हालिया वनडे सीरीज से बाहर रखे जाने के बाद से ही क्रिकेट गलियारों में बहस छिड़ गई है। पिछली दो सीरीज से उनका स्क्वाड से गायब रहना इस बात का संकेत है कि टीम प्रबंधन की योजनाओं में फिलहाल वह प्राथमिकता सूची में नहीं हैं। इसी बात पर आकाश चोपड़ा का गुस्सा फूटा है और उन्होंने खुलकर चयनकर्ताओं तथा टीम के कप्तान की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिए हैंक्यों हो रही है ऋषभ पंत की चर्चाजब भी भारतीय क्रिकेट में एक्स-फैक्टर (X-Factor) की बात आती है, तो ऋषभ पंत का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है। टेस्ट क्रिकेट में ऐतिहासिक पारियां खेलने वाले और विदेशी धरती पर भारत को अकेले दम पर जीत दिलाने वाले पंत सीमित ओवरों के प्रारूप, खासकर वनडे में भी अपनी छाप छोड़ने की पूरी क्षमता रखते हैं। बावजूद इसके, उन्हें लगातार नजरअंदाज किया जाना खेल प्रेमियों को भी पच नहीं रहा है।
आकाश चोपड़ा ने अपने एक यूट्यूब चैनल पर चर्चा के दौरान इस बात पर हैरानी जताई कि आखिर किस आधार पर एक मैच विनर खिलाड़ी को इस तरह से टीम से दूर किया जा रहा है। उनका साफ कहना था कि अगर किसी खिलाड़ी को बिना पर्याप्त मौके दिए बाहर किया जाता है, तो इससे उसका आत्मविश्वास डगमगाता आकाश चोपड़ा ने चयनकर्ताओं से पूछे कड़े सवालपूर्व क्रिकेटर ने अपनी बात रखते हुए कई तार्किक बिंदु उठाए। उन्होंने कहा कि:
- ऋषभ पंत जैसे खिलाड़ी को टीम के अंदर या आसपास बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि वह कभी भी मैच का रुख पलट सकते हैं।
- जब खिलाड़ी फिट है और लगातार अपनी घरेलू या अन्य क्रिकेट में प्रभाव छोड़ रहा है, तो उसे वनडे स्क्वाड से पूरी तरह बाहर रखना समझ से परे है।
चयन समिति और कप्तान को स्पष्ट करना चाहिए कि भविष्य की योजनाओं में पंत की क्या भूमिका है।चोपड़ा का मानना है कि केवल कुछ पारियों के आधार पर किसी मैच विनर को दरकिनार कर देना भारतीय टीम के लिए दीर्घकालिक रूप से नुकसानदायक साबित हो सकता है।
वनडे प्रारूप में पंत का रिकॉर्ड और चुनौतियां
भले ही ऋषभ पंत ने टेस्ट और टी20 फॉर्मेट में खुद को ग्लोबल स्टार के रूप में स्थापित किया हो, लेकिन वनडे क्रिकेट में उनके आंकड़े मिले-जुले रहे हैं। इसके बावजूद, आधुनिक क्रिकेट की मांग के अनुसार तेजी से रन बनाने की उनकी क्षमता उन्हें अन्य विकेटकीपर बल्लेबाजों से अलग खड़ा करती है।
वर्तमान समय में टीम मैनेजमेंट के सामने विकेटकीपर के विकल्प के रूप में कई नाम मौजूद हैं। यही वजह है कि प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ गई है। लेकिन आकाश चोपड़ा का यह भी कहना है कि प्रतिस्पर्धा स्वस्थ होनी चाहिए, न कि ऐसा लगे कि किसी खास खिलाड़ी को योजनाबद्ध तरीके से बाहर किया जा रहा है।फैंस की प्रतिक्रिया और सोशल मीडिया का रुख
जैसे ही आकाश चोपड़ा के ये बयान सामने आए, सोशल मीडिया पर मीम्स और प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। #RishabhPant ट्विटर और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर ट्रेंड करने लगा। अधिकांश फैंस का यही मानना है कि पंत को बिना किसी ठोस कारण के प्लेइंग इलेवन या स्क्वाड से दूर रखा जा रहा है।
एक यूजर ने लिखा कि 'पंत जैसा आक्रामक बल्लेबाज जब क्रीज पर होता है, तो विरोधी गेंदबाजों के होश उड़ जाते हैं। उन्हें वापस टीम में होना ही चाहिए।' वहीं, कुछ का यह भी तर्क है कि टीम कॉम्बिनेशन के लिहाज से चयनकर्ताओं को कठिन फैसले लेने पड़ते हैं, लेकिन पंत जैसे दर्जे के खिलाड़ी को नजरअंदाज करना जोखिम भरा हैभविष्य पर टिकी हैं निगाहेआगामी सीरीज और टूर्नामेंट्स को देखते हुए यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या चयनकर्ता आकाश चोपड़ा और अन्य दिग्गजों की इस आलोचना पर गौर करते हैं या नहीं। क्या ऋषभ पंत की आगामी सीरीज में वापसी होगी या उन्हें अपनी बारी का अभी और लंबा इंतजार करना पड़ेगा?
फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने भारतीय क्रिकेट में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। एक बात तो तय है कि ऋषभ पंत की काबिलियत पर किसी को शक नहीं है, लेकिन टीम प्रबंधन और उनके बीच तालमेल को लेकर जो सवाल उठे हैं, उनके जवाब आने वाले वक्त में ही मिल पाएंगे।