भारतीय क्रिकेट में इन दिनों गेंदबाजी संयोजन को लेकर एक बार फिर से जोरदार बहस छिड़ गई है। साल 2027 में होने वाले वनडे विश्व कप (2027 ODI World Cup) के आयोजन में अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है, और टूर्नामेंट की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। ऐसे में टीम इंडिया के गेंदबाजी आक्रमण को लेकर पूर्व दिग्गजों ने खुलकर अपनी राय रखनी शुरू कर दी है। हाल ही में भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज वसीम जाफर ने चयनकर्ताओं की नीतियों पर सवाल उठाते हुए एक बड़ा बयान दिया है, जो सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक चर्चा का विषय बन गया है।
भुवनेश्वर कुमार की वापसी पर क्या बोले जाफर?
हाल ही में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने न्यूजीलैंड दौरे के लिए टी20 टीम की घोषणा की थी। इस टीम में अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की लगभग चार साल बाद चौंकाने वाली वापसी हुई है। 36 वर्षीय भुवनेश्वर के इस कमबैक ने उन तमाम खिलाड़ियों के लिए उम्मीद की एक नई किरण जगा दी है जो लंबे समय से टीम से बाहर चल रहे हैं। हालांकि, वसीम जाफर का मानना है कि भुवनेश्वर कुमार का चयन पूरी तरह से उनके प्रदर्शन का हक है और चयनकर्ताओं ने उन पर कोई अहसान नहीं किया है।
जाफर का मानना है कि अनुभव हमेशा युवा जोश पर भारी पड़ता है, खासकर तब जब आप आईसीसी (ICC) के किसी बड़े टूर्नामेंट की तैयारी कर रहे हों। भुवनेश्वर की वापसी के बाद अब हर किसी की निगाहें अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी पर टिकी हुई हैं, जो मार्च 2025 के बाद से भारत के लिए मैदान पर नजर नहीं आए हैं।
'मेरी पहली पसंद शमी, बुमराह और सिराज'
वसीम जाफर ने अपने एक वीडियो ब्लॉग में दो टूक शब्दों में कहा कि मोहम्मद शमी की भारतीय टीम में फौरन वापसी होनी चाहिए, विशेष तौर पर टेस्ट और वनडे फॉर्मेट में। जाफर ने कहा, "शमी का सेलेक्शन जरूर होना चाहिए। मैं वनडे के बारे में कह सकता हूं कि हमने कई नए खिलाड़ियों जैसे गुरनूर बराड़, प्रसिद्ध कृष्णा और नीतीश रेड्डी पर बहुत प्रयोग (Experiments) कर लिए हैं, लेकिन क्या सच में इस गेंदबाजी लाइन-अप पर किसी को पूरा भरोसा है?"
उन्होंने आगे कहा कि जब वह 2027 वर्ल्ड कप के लिए अपनी आदर्श गेंदबाजी तिकड़ी चुनते हैं, तो उनकी पहली पसंद हमेशा जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज और मोहम्मद शमी ही होंगे। जाफर का यह बयान ऐसे समय आया है जब चयनकर्ताओं द्वारा लगातार नए खिलाड़ियों को आजमाया जा रहा है।
मोहम्मद शमी का ऐतिहासिक रिकॉर्ड
यह बात किसी से छिपी नहीं है कि मोहम्मद शमी भारत के लिए विश्व कप के इतिहास में सबसे खूंखार और सफल गेंदबाजों में शुमार रहे हैं। शमी ने वनडे वर्ल्ड कप के महज 18 मैचों में ही अविश्वसनीय प्रदर्शन करते हुए 55 विकेट चटकाए हैं। वह हर विश्व कप में टीम के लिए संकटमोचन साबित हुए हैं। इस सर्वकालिक सूची में उनके बाद पूर्व दिग्गज गेंदबाज जहीर खान 44 विकेटों के साथ दूसरे स्थान पर हैं। ऐसे में इतने बड़े मैच विनर को लंबे समय तक नजरअंदाज करना टीम के लिए भारी पड़ सकता है।
क्यों चिंता में है टीम मैनेजमेंट?
साल 2025 से लेकर अब तक भारतीय चयनकर्ताओं ने गेंदबाजी में ताबड़तोड़ एक्सपेरिमेंट किए हैं। हर्षित राणा से लेकर अंशुल कंबोज, प्रिंस यादव और हर्ष दुबे जैसे कई युवा खिलाड़ियों को वनडे डेब्यू का मौका मिला। हालांकि, इनमें से कई गेंदबाज या तो लगातार चोटिल होते रहे हैं या फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव नहीं झेल पाए।
- अनुभव की कमी: जसप्रीत बुमराह के अलावा दूसरा छोर संभालने के लिए कोई ऐसा गेंदबाज नहीं दिखता जो लगातार विपक्षी बल्लेबाजों पर दबाव बना सके।
- अनियमित मौके: मोहम्मद सिराज जैसे बेहतरीन गेंदबाज को भी कई बार प्लेइंग इलेवन से अंदर-बाहर होना पड़ा है, जिससे टीम की स्थिरता प्रभावित हुई है।
- प्रसिद्ध कृष्णा का प्रदर्शन: हालिया वेस्टइंडीज दौरे पर प्रसिद्ध कृष्णा की इकोनॉमी रेट लगभग 9 रन प्रति ओवर तक पहुंच गई थी, जो चिंता का विषय है।
कैप्टन शुभमन गिल का स्पष्ट संदेश
वेस्टइंडीज के खिलाफ हालिया वनडे सीरीज के दौरान भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने भी इस बात के साफ संकेत दिए थे कि अब टीम के पास और अधिक प्रयोग करने का समय नहीं बचा है। वर्ल्ड कप नजदीक है और टीम को जल्द से जल्द अपनी कोर टीम (Core Team) को सेट करना होगा। कप्तान के इस बयान को चयन नीति में संभावित बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
क्या वर्ल्ड कप में होगी शमी की वापसी?
जैसे-जैसे 2027 वर्ल्ड कप करीब आ रहा है, क्रिकेट पंडितों और प्रशंसकों की यही मांग है कि अब टीम कॉम्बिनेशन के साथ खिलवाड़ बंद किया जाए। मोहम्मद शमी जैसे अनुभवी गेंदबाज की फिटनेस अगर साथ देती है, तो उनका अनुभव भारत को एक बार फिर विश्व कप विजेता बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है। अब देखना यह होगा कि क्या चयनकर्ता वसीम जाफर और अन्य दिग्गजों की इस सलाह पर गौर करते हैं या नहीं।