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अमरोहा में खौफ! 3 दिन के कड़े रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद तालाब से निकला 5 फीट का मगरमच्छ

अमरोहा में खौफ! 3 दिन के कड़े रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद तालाब से निकला 5 फीट का मगरमच्छ

क्या आपने कभी सोचा है कि आपके गांव के पास बने आम से तालाब में कभी कोई ऐसा मेहमान आ धमकता है, जिसकी कल्पना भी सिहरन पैदा कर दे? उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले से एक ऐसी ही हैरान करने वाली और रोमांचक खबर सामने आई है। यहाँ के गजरौला क्षेत्र में पिछले कई दिनों से एक खूंखार मेहमान ने डेरा डाल रखा था, जिसने ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ा दी थी। आखिरकार, तीन दिनों के अथक संघर्ष और सुनियोजित रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद वन विभाग और ग्रामीणों को बड़ी सफलता हाथ लगी और पांच फीट लंबे मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़ लिया गया।

तीन दिन और रातों का कड़ा पहरा: ऐसे शुरू हुआ खौफ

मामला हसनपुर रेंज के अंतर्गत आने वाले गांव कुदैना का है। यहां की ग्राम प्रधान ओमवती ने बताया कि ग्राम पंचायत का एक मजरा चक गांव से सटा हुआ है। गांव के पास ही एक तालाब है, जिसमें पूरे गांव का पानी इकट्ठा होता है। कुछ दिनों पहले कुछ ग्रामीणों ने इस तालाब में किसी बड़े जलीय जीव को तैरते हुए देखा। पहले तो लोगों को अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ, लेकिन जब बार-बार उसकी परछਾਈ पानी में दिखाई दी, तो दहशत फैल गई।

ग्राम प्रधान के बेटे रोहताश ने जब खुद अपनी आंखों से उस खतरनाक शिकारी को तालाब के किनारे धूप सेकते हुए देखा, तो हड़कंप मच गया। इसके बाद पड़ोसियों सोमपाल और सोमवीर ने भी इसकी पुष्टि कर दी कि तालाब में कोई आम जीव नहीं, बल्कि एक खतरनाक मगरमच्छ छिपा बैठा है।

8 जुलाई को उठी मदद की गुहार, वन विभाग हरकत में आया

स्थिति की गंभीरता को समझते हुए ग्राम प्रधान ओमवती ने बिना देर किए 8 जुलाई को हसनपुर रेंजर के सिहाली जागीर स्थित कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने तुरंत वन विभाग से मगरमच्छ को पकड़कर ग्रामीणों को सुरक्षित माहौल देने की मांग की।

शिकायत मिलते ही हसनपुर रेंज की वन विभाग की टीम हरकत में आ गई और उसी दिन कुदैना गांव पहुंच गई। टीम ने स्थिति का जायजा लिया और तुरंत तालाब के मुहाने पर मजबूत जाल बिछा दिए। हालांकि, शातिर मगरमच्छ पहले ही दिन काफी चालाक साबित हुआ। वह पानी में नजर तो आया, लेकिन जाल के करीब आने से बचता रहा।

रातभर जागती रही टीम, आखिरकार मंगलवार सुबह बिछा जाल

वन विभाग के कर्मचारियों और स्थानीय ग्रामीणों के लिए यह किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। 9 जुलाई को पूरा दिन और रात विभाग की टीम ने तालाब के किनारे ही पहरा देते हुए बिताई। इसके बाद 10 जुलाई की पूरी रात भी कड़े पहरे में गुजरी। ठंड, मच्छर और उमस की परवाह किए बिना टीम के सदस्य और ग्रामीण अपनी जगह पर डटे रहे।

आखिरकार, उनकी मेहनत रंग लाई। मंगलवार की सुबह करीब पांच बजे, जब चारों तरफ हल्की रोशनी फैल रही थी, तब वह पांच फीट लंबा मगरमच्छ सुस्ती तोड़ते हुए तालाब से बाहर निकला। बाहर आते ही वह वन विभाग द्वारा बिछाए गए जाल में उलझ गया।

  • रैस्क्यू ऑपरेशन की मुख्य बातें:
  • जीव का आकार: मगरमच्छ की लंबाई 5 फीट से अधिक थी।
  • ऑपरेशन का समय: 8 जुलाई से शुरू हुआ रेस्क्यू 11 जुलाई (मंगलवार) सुबह समाप्त हुआ।
  • सहयोग: वन विभाग के साथ स्थानीय ग्रामीणों और ग्राम प्रधान ने अहम भूमिका निभाई।
  • अंतिम ठिकाना: पकड़े जाने के बाद उसे सुरक्षित रूप से गंगा नदी में छोड़ दिया गया।

नाव मंगवाकर किया गया सुरक्षित रेस्क्यू

जैसे ही मगरमच्छ जाल में फंसा, ग्रामीणों ने तुरंत राहत की सांस ली। हालांकि, उसे पानी से बाहर निकालना अभी भी एक जोखिम भरा काम था। स्थिति को संभालते हुए तुरंत एक नाव का इंतजाम किया गया। ग्रामीणों और वन विभाग के कर्मचारियों ने सूझबूझ दिखाते हुए नाव की मदद से मगरमच्छ को पूरी तरह काबू में किया और सुरक्षित रूप से रेस्क्यू कर लिया।

हसनपुर के रेंजर नरेश कुमार ने इस सफल ऑपरेशन की पुष्टि करते हुए बताया, "मगरमच्छ की लंबाई पांच फीट से अधिक थी। ग्रामीणों की सूचना पर हमारी टीम लगातार तीन दिनों तक मौके पर डटी रही। मंगलवार सुबह वह जाल में फंस गया, जिसके बाद उसे सुरक्षित रेस्क्यू कर गंगा नदी में छोड़ दिया गया है।"

ग्रामीणों में राहत, लेकिन अब भी है एहतियात की जरूरत

मगरमच्छ के गंगा नदी में छोड़े जाने के बाद कुदैना गांव और आसपास के इलाकों के लोगों ने चैन की सांस ली है। पिछले तीन दिनों से बच्चों को तालाब के पास जाने से रोक दिया गया था और महिलाएं भी सहमी हुई थीं। हालांकि, वन विभाग ने ग्रामीणों को चेतावनी दी है कि वे जल स्रोतों के पास अब भी सतर्क रहें, क्योंकि मानसून के दिनों में अक्सर ऐसे जीव पानी के तेज बहाव या सुरक्षित ठिकानों की तलाश में रिहायशी इलाकों के करीब आ जाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: अमरोहा के कुदैना गांव में मगरमच्छ कहां से आया?

अधिकारियों का मानना है कि मानसून के मौसम में जल स्तर बढ़ने या बहकर ये जलीय जीव अक्सर पास की नदियों या बड़ी जलधाराओं से ऐसे बड़े तालाबों तक पहुंच जाते हैं।

Q2: मगरमच्छ को पकड़ने में कितना समय लगा?

वन विभाग की टीम को इस ऑपरेशन को पूरा करने में पूरे 3 दिन लगे, क्योंकि मगरमच्छ लगातार पानी के अंदर छिप रहा था और जाल में नहीं आ रहा था।

Q3: रेस्क्यू के बाद मगरमच्छ का क्या किया गया?

सफलतापूर्वक रेस्क्यू करने के बाद उस 5 फीट लंबे मगरमच्छ को उसके प्राकृतिक आवास यानी गंगा नदी में सुरक्षित छोड़ दिया गया है।

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अनुराधा दुबे

अनुराधा दुबे

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अनुराधा दुबे एक समर्पित और अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जो भारत से जुड़ी राजनीतिक, सामाजिक और नीतिगत खबरों को गहराई से समझकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। उन...

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