बिहार की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट आ चुकी है। साल 2026 के इस राजनीतिक घटनाक्रम में सत्ताधारी दल जनता दल यूनाइटेड (JDU) के भीतर चल रहा अंतर्द्वंद अब सड़क से लेकर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के दरबार तक पहुंच गया है। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद (MLC) चुनाव को लेकर पार्टी के दो दिग्गज आमने-सामने आ गए हैं, और इस बार मुकाबला काफी दिलचस्प और चौंकाने वाला होता दिख रहा है।
अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच खुली जंग
पूरा मामला पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जुड़ा है, जहां JDU ने अपने मौजूदा विधान परिषद सदस्य और पार्टी के मुखर प्रवक्ता कहे जाने वाले नीरज कुमार को एक बार फिर से चुनावी मैदान में उतारा है। नीरज कुमार की उम्मीदवारी की घोषणा के बाद से ही पार्टी के भीतर सुगबुगाहट शुरू हो गई थी, लेकिन मामला तब और गंभीर हो गया जब मोकामा से बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने इसके खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया।
अनंत सिंह ने न केवल नीरज कुमार की उम्मीदवारी का विरोध किया, बल्कि विपक्षी दल से जुड़े जन सुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह को अपना खुला समर्थन देने का भी ऐलान कर दिया है। मोकामा विधायक के इस कदम से राजनीतिक गलियारों में भूचाल आ गया है। इतना ही नहीं, अनंत सिंह ने यह भी घोषणा कर दी है कि वे अनुज सिंह के पक्ष में चुनाव प्रचार भी करेंगे।
मामला पहुंचा शीर्ष नेतृत्व के पास
पार्टी के भीतर इस बगावत और खींचतान के बाद JDU का केंद्रीय और प्रांतीय नेतृत्व पूरी तरह से सतर्क हो गया है। हालांकि पार्टी के भीतर अनुशासन और एकजुटता बनाए रखने की बात कही जा रही है, लेकिन अंदरखाने हलचल तेज है। बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री और JDU के कद्दावर नेता श्रवण कुमार ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए साफ किया कि यह मामला अब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के संज्ञान में पूरी तरह से आ चुका है।
"ऐसी स्थिति नहीं बननी चाहिए थी, लेकिन जो कुछ भी हो रहा है, उसकी पूरी जानकारी पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष, राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष को दे दी गई है। बड़े नेता इस पर विचार कर रहे हैं और जो भी निर्देश मिलेगा, उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई तय होगी।" - श्रवण कुमार, मंत्री, बिहार सरकार
NDA की जीत को प्राथमिकता बता रहा नेतृत्व
एक तरफ जहां पार्टी के भीतर अंतर्द्वंद खुलकर सामने आ चुका है, वहीं दूसरी तरफ JDU का प्रांतीय नेतृत्व इस विवाद से किनारा करते हुए अपने मुख्य लक्ष्य यानी चुनाव में एनडीए की जीत पर फोकस बनाए हुए है। JDU के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि पार्टी का एकमात्र और मुख्य लक्ष्य शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की सभी आठ सीटों पर एनडीए की जीत सुनिश्चित करना है।
उमेश कुशवाहा ने मीडिया से बातचीत में कहा, "कौन क्या बोल रहा है और किस उम्मीदवार को समर्थन देने की बात कर रहा है, इसकी पूरी जानकारी हमारे पास है। लेकिन इस वक्त हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता इन आठ सीटों को जीतना है ताकि सभी सीटें एनडीए की झोली में जाएं। पार्टी मतदान और मतगणना के दिन का इंतजार कर रही है और जनता के हर फैसले का सम्मान करेगी।"
पहले भी हो चुकी है सुलझाने की कोशिश
सूत्रों की मानें तो अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच यह मनमुटाव नया नहीं है। इससे पहले भी दोनों नेताओं के बीच मतभेदों की खबरें सामने आ चुकी हैं। मामले को शांत करने के लिए खुद प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा की मौजूदगी में एक बैठक बुलाई गई थी, जिसमें दोनों नेताओं के बीच बातचीत कराई गई थी। उस बैठक के बाद ऐसा प्रतीत हुआ था कि मामला सुलझ गया है और विवाद थम गया है।
लेकिन यह शांति ज्यादा दिनों तक कायम नहीं रह सकी। कुछ ही समय बाद अनंत सिंह ने एक बार फिर नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर अपना विरोध जताना शुरू कर दिया और जन सुराज के उम्मीदवार के समर्थन का ऐलान कर सबको चौंका दिया।
अब आगे क्या होगा?
बिहार विधान परिषद के इन चुनावों में JDU के भीतर की यह कलह पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है। एक तरफ जहां पार्टी के बाहुबली विधायक अपनी ही पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ खड़े हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल इस स्थिति का पूरा फायदा उठाने की फिराक में हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस विवाद को समय रहते नहीं सुलझाया गया, तो इसका असर चुनाव परिणाम पर पड़ सकता है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पार्टी के सर्वोच्च नेता इस मामले में क्या कड़ा रुख अपनाते हैं और क्या अनंत सिंह को मनाने में कामयाब होते हैं या फिर पार्टी कोई और अनुशासनात्मक कदम उठाती है।