प्रशासनिक व्यवस्था जब जनहित के प्रति संवेदनशील हो जाती है, तो आम जनता की उम्मीदें भी परवान चढ़ने लगती हैं। कुछ ऐसी ही तस्वीर सोमवार को बिहार के अररिया जिले से सामने आई, जहां जिला मुख्यालय स्थित समाहरणालय के परमान सभागार में एक बार फिर फरियादियों का तांता लगा। जिला पदाधिकारी (डीएम) विनोद दूहन ने साप्ताहिक जनता दरबार के दौरान दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से पहुंचे आम नागरिकों की समस्याओं को बेहद करीब से सुना। इस दौरान कुल 86 मामलों पर सीधे सुनवाई की गई, जिससे प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।
परमान सभागार में उमड़े फरियादी, हर कोने से पहुंचीं समस्याएं
सोमवार को सुबह से ही समाहरणालय परिसर में लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। जिले के विभिन्न प्रखंडों—फारबिसगंज, रानीगंज, जोकीहाट और पलासी समेत अन्य ग्रामीण अंचलों से आए लोग अपनी व्यक्तिगत और सार्वजनिक समस्याओं से जुड़े लिखित आवेदन लेकर पहुंचे थे। हर चेहरे पर अपनी समस्या के समाधान की एक उम्मीद साफ झलक रही थी।
कार्यक्रम के दौरान डीएम विनोद दूहन ने एक-एक कर सभी फरियादियों के पास जाकर उनके आवेदन देखे और उनकी बात को पूरी गंभीरता के साथ सुना। इस दौरान कई ऐसे मामले सामने आए जो लंबे समय से प्रशासनिक फाइलों में उलझे हुए थे। डीएम ने मौके पर मौजूद संबंधित विभागों के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि हर एक आवेदन की पारदर्शी तरीके से जांच की जाए और तय समय सीमा के भीतर उनका निष्पादन सुनिश्चित किया जाए।
जनता दरबार में उठे ये प्रमुख और गंभीर मुद्दे
इस बार के जनता दरबार में जमीन विवाद, अनुकंपा पर नौकरी, मजदूरी भुगतान और सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रहने जैसे कई संगीन मामले सामने आए। आइए डालते हैं कुछ प्रमुख मामलों पर एक नजर:
- अनुकंपा नियुक्ति का मामला: खरैया बस्ती से आईं रानी देवी ने डीएम के समक्ष अनुकंपा के आधार पर नौकरी दिए जाने की अपनी गुहार लगाई। उन्होंने बताया कि पारिवारिक जिम्मेदारियों को उठाने के लिए यह नौकरी उनके लिए बेहद जरूरी है।
- सेवानिवृत्त चौकीदारों का हक: मेरीगंज, रानीगंज के रहने वाले सियाराम पासवान ने प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ एक गंभीर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि जिले के सेवानिवृत्त चौकीदारों को एसीपी (Assured Career Progression) और एमएसपी (Modified Selection Grade) का लाभ अब तक नहीं मिल पाया है, जिससे बुजुर्ग कर्मचारियों में निराशा है।
- जल निकासी और निजी भूमि विवाद: फारबिसगंज से पहुंचे मोहम्मद शमीम अहमद और उनके साथियों ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि नगर परिषद द्वारा उनकी निजी भूमि पर गंदा पानी बहाया जा रहा है और इलाके में जल निकासी की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है, जिससे नरकीय स्थिति बन गई है।
- दाखिल-खारिज और रोक सूची का पेंच: जोकीहाट प्रखंड के मटियारी निवासी दयानंद पासवान ने अपनी जमीन को रोक सूची (Prohibited List) से हटाने की मांग की। वहीं, इसी इलाके के मुजीबुर रहमान ने स्थानीय अंचल अधिकारी (CO) पर दाखिल-खारिज (Mutation) के मामले को बेवजह लटकाने की शिकायत दर्ज कराई।
- मजदूरी भुगतान और मुआवजा: रानीगंज के जीतन मंडल ने अपनी मेहनत की कमाई यानी बकाया मजदूरी का भुगतान नहीं मिलने का दर्द बयां किया। इसके अलावा, खैरखां के अजय मंडल ने सड़क दुर्घटना में परिवार के सदस्य की मौत के बाद मिलने वाली अनुग्रह अनुदान (Ex-gratia) की राशि अब तक न मिलने की शिकायत की।
लापरवाह अधिकारियों पर कस रहा है शिकंजा
जनता दरबार में आई शिकायतों के बाद डीएम विनोद दूहन ने स्पष्ट शब्दों में चेताया है कि प्रशासनिक कार्यों में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे जनता दरबार में प्राप्त हर एक आवेदन को प्राथमिकता सूची में रखें।
डीएम ने कहा कि कागजी खानापूर्ति करने के बजाय धरातल पर जाकर समस्याओं का समाधान किया जाए ताकि आम जनता को बार-बार दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। खास तौर पर दाखिल-खारिज, अनुग्रह अनुदान और मजदूरी भुगतान जैसे मामलों में अगर किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित कर्मियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
आम जनता में जगी उम्मीद की किरण
जिला प्रशासन द्वारा इस प्रकार नियमित अंतराल पर जनता दरबार के आयोजन से जमीनी स्तर पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है। सुदूर गांवों से आने वाले वैसे लोग, जो थाने या अंचल कार्यालयों के चक्कर काट-काटकर थक चुके थे, उन्हें इस मंच से बड़ी राहत मिलती दिख रही है। अब देखना यह होगा कि डीएम के सख्त निर्देशों के बाद मैदानी स्तर के अधिकारी इन 86 मामलों का निपटारा कितनी जल्दी और कितने प्रभावी ढंग से कर पाते हैं।