प्रयागराज शहर की गलियों में गूंजे उस सनसनीखेज हत्याकांड के तार एक बार फिर सुर्खियों में हैं, जिसने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया था। बहुचर्चित उमेश पाल हत्याकांड के मामले में एक बहुत बड़ा अपडेट सामने आया है। इस हाई-प्रोफाइल केस में पांच लाख रुपये का इनामी बदमाश अरमान बिहारी आखिरकार कानून के शिकंजे में कसता नजर आ रहा है। रविवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जिसे देखने के लिए कोर्ट परिसर के बाहर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई थी।
बिहार से प्रयागराज तक का सफर: कैसे हुई गिरफ्तारी?
उमेश पाल हत्याकांड के बाद से ही अरमान बिहारी लगातार अपनी पहचान बदलकर अलग-अलग ठिकानों पर छिपता फिर रहा था। उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और स्थानीय पुलिस लगातार उसकी तलाश में जुटी थी। खुफिया तंत्र से मिले इनपुट के आधार पर पुलिस को बिहार में उसके छिपे होने की पुख्ता जानकारी मिली थी।
इसके बाद बिहार के गया जिले में एक गोपनीय ऑपरेशन के तहत पुलिस ने उसे धर दबोचा। गया कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड मंजूर होने के बाद प्रयागराज पुलिस की एक विशेष टीम उसे वज्र वाहन और भारी सुरक्षा घेरे के बीच सड़क मार्ग से प्रयागराज लेकर पहुंची। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरी कार्रवाई को बेहद गोपनीय रखा गया था ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके।
सफेद गमछे से ढंका चेहरा और पुलिस का कड़ा पहरा
आज जब अरमान बिहारी को प्रयागराज की स्थानीय अदालत में पेश किया गया, तो वहां का माहौल पूरी तरह से छावनी में तब्दील हो चुका था। आरोपी के कोर्ट में पहुंचते ही सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम देखे गए। पुलिसकर्मियों ने अरमान को चारों तरफ से घेर रखा था ताकि मीडिया के कैमरे और आम जनता की पहुंच से उसे बचाया जा सके।
इस दौरान आरोपी अरमान बिहारी ने अपने चेहरे को एक सफेद गमछे से पूरी तरह ढंक रखा था। मीडिया के सवालों पर उसने चुप्पी साध रखी थी। अदालत के बाहर तैनात सुरक्षा बलों ने वकीलों और अन्य लोगों को भी एक तय दूरी पर रखा, ताकि कार्यवाही में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो सके।
उमेश पाल हत्याकांड की कड़ियां और अरमान की भूमिका
गौरतलब है कि 24 फरवरी 2023 को प्रयागराज के धูमनगंज इलाके में अधिवक्ता उमेश पाल और उनके दो सरकारी गनर की दिनदहाड़े गोली और बम मारकर हत्या कर दी गई थी। इस दुस्साहसिक वारदात ने पूरे देश को दहला दिया था। इस मामले में माफिया अतीक अहमद और उसके परिवार के साथ कई अन्य शूटरों और मददगारों के नाम सामने आए थे।
जांच एजेंसियों के अनुसार, अरमान बिहारी इस पूरे षड्यंत्र और वारदात को अंजाम देने वाले मुख्य शूटरों में से एक था। घटना के तुरंत बाद से ही वह फरार चल रहा था। पुलिस की जांच में यह बात सामने आई थी कि अरमान लगातार अपने संपर्क सूत्र बदल रहा था और नेपाल या बिहार के रास्ते भागने की फिराक में था। उस पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पांच लाख रुपये का भारी-भरकम इनाम घोषित किया गया था।
आगे की कानूनी प्रक्रिया और रिमांड पर पूछताछ
अदालत में पेशी के बाद पुलिस अब अरमान बिहारी को अपनी कस्टडी रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि पूछताछ के दौरान अरमान से कई अहम राज उगलवाए जाएंगे। विशेष तौर पर:
- वारदात के बाद उसने किन-किन लोगों के यहां शरण ली थी?
- उसे आर्थिक मदद कौन मुहैया करा रहा था?
- फरार रहने के दौरान उसने किन अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया या उन्हें कहां छिपाया?
- इस कांड में शामिल अन्य छिपे हुए चेहरों के बारे में क्या नई जानकारियां मिलती हैं?
कानून के लंबे हाथों से बचना नामुमकिन
इस गिरफ्तारी को उत्तर प्रदेश पुलिस और एसटीएफ की एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का साफ कहना है कि कितना भी शातिर अपराधी क्यों न हो, कानून के शिकंजे से बच नहीं सकता। भले ही आरोपी ने महीनों तक कानून को चकमा दिया हो, लेकिन अंततः उसे सलाखों के पीछे पहुंचना ही पड़ा।
आगामी दिनों में इस मामले में कुछ और चौंकाने वाले खुलासे होने की उम्मीद है, क्योंकि पुलिस अरमान बिहारी को आमने-सामने बिठाकर अन्य आरोपियों से भी पूछताछ कर सकती है। प्रयागराज और आसपास के इलाकों में इस पेशी के बाद एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को हाई अलर्ट पर रख दिया गया है।