पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश की सियासत और वहां के सुरक्षा हालातों को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर बयान सामने आया है। भारत में शरण लिए हुए बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने देश के भविष्य को लेकर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने सीधे तौर पर चेतावनी दी है कि जिस दिशा में बांग्लादेश को धकेला जा रहा है, वह इसे बहुत जल्द 'दूसरा पाकिस्तान' बना देगा। उनके इस बयान ने दक्षिण एशिया की राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस पर चर्चा शुरू हो गई है।
अल्पसंख्यकों और समर्थकों पर हो रहे हमलों से हिला प्रशासन
शेख हसीना का यह ताजा बयान ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश के भीतर राजनीतिक उथल-पुथल के बाद से लगातार हिंसा और अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश के कई हिस्सों में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं और अवामी लीग के कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है। शेख हसीना ने अपने करीबी लोगों और पार्टी नेताओं के साथ बातचीत के दौरान बेहद दर्दभरे लहजे में कहा कि उनके लोगों को हर रात चुन-चुनकर मारा जा रहा है और देश में कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं बची है।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कट्टरपंथी ताकतें देश की बागडोर अपने हाथ में ले चुकी हैं, जो न केवल बांग्लादेश की धर्मनिरपेक्ष पहचान को मिटा रही हैं, बल्कि इसे एक असफल राष्ट्र की तरफ ले जा रही हैं। जिस तरह से पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों का हनन हुआ और कट्टरपंथ ने जड़ें जमाईं, वही मॉडल अब बांग्लादेश में तेजी से लागू किया जा रहा है।
भारत में रहकर दी चेतावनी, सुरक्षा और कूटनीति पर असर
गौरतलब है कि पिछले साल अगस्त में बड़े पैमाने पर हुए हिंसक प्रदर्शनों और सत्ता परिवर्तन के बाद शेख हसीना ने देश छोड़ दिया था और वर्तमान में वे सुरक्षा कारणों से भारत में रह रही हैं। भारत में उनकी मौजूदगी और वहां से लगातार आ रहे उनके बयानों ने कूटनीतिक स्तर पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, भारत सरकार ने उन्हें मानवीय आधार पर शरण दी है, लेकिन उनके द्वारा लगातार बांग्लादेश के वर्तमान घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देना वहां की अंतरिम सरकार को रास नहीं आ रहा है।
बांग्लादेश में चरमपंथ का बढ़ता खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि शेख हसीना की यह चेतावनी पूरी तरह बेबुनियाद नहीं है। पिछले कुछ महीनों में बांग्लादेश की जेलों से कई कुख्यात चरमपंथियों की रिहाई हुई है और कट्टरपंथी संगठनों को खुली छूट मिलती दिख रही है। ऐसे में देश के भीतर लोकतांत्रिक मूल्यों का पतन और तानाशाही जैसी प्रवृत्तियों का उभरना एक बड़े खतरे की घंटी है।
- अल्पसंख्यकों पर अत्याचार: देश के विभिन्न जिलों में मंदिरों और घरों पर हमले की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक: मीडिया और पत्रकारों पर दबाव बनाया जा रहा है जो सरकार की नीतियों के खिलाफ लिखते हैं।
- चरमपंथी ताकतों का उभार: प्रतिबंधित संगठनों के नेता खुलेआम रैलियां कर रहे हैं और समाज में ध्रुवीकरण बढ़ा रहे हैं।
क्या कहती है अंतरराष्ट्रीय बिरादरी?
बांग्लादेश के ताजा हालातों पर संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों ने भी चिंता जताई है। लेकिन जिस तरह से देश की आंतरिक व्यवस्था चरमराई हुई है, उससे आम नागरिकों का जीवन नर्क बन गया है। शेख हसीना का यह कहना कि 'हर रात हमारे लोगों को मारा जा रहा है,' उस मानवीय त्रासदी को बयां करता है जो कैमरे की नजरों से दूर गांवों और कस्बों में घटित हो रही है।
यह देखना बेहद अहम होगा कि आने वाले दिनों में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार इन चेतावनियों पर क्या रुख अपनाती है और क्या देश वाकई उस अंधेरे रास्ते पर चल पड़ा है जहां से वापसी लगभग नामुमकिन होती है। भारत और अन्य पड़ोसी देशों की निगाहें भी इस संवेदनशील मुद्दे पर टिकी हुई हैं।
