भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाली सबसे बुनियादी वस्तु यानी चीनी (Sugar) के दाम इन दिनों आम आदमी की जेब पर भारी पड़ने लगे हैं। पिछले कुछ दिनों में चीनी की कीमतों में हुई बेतहाशा बढ़ोतरी ने हर घर का बजट बिगाड़ कर रख दिया है। इसी बीच, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। केजरीवाल ने दावा किया है कि गन्ने के डाइवर्ट होने और इथेनॉल बनाने की नीति के कारण महज कुछ ही हफ्तों में चीनी के दाम आसमान छूने लगे हैं।
सैकड़ों से सीधे महंगे हुए दाम: क्या है पूरा गणित?
अरविंद केजरीवाल ने एक वीडियो जारी कर केंद्र सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक, देश में गन्ने के जूस और शीरे को सीधे इथेनॉल निर्माण की ओर मोड़ने का नतीजा यह हुआ है कि चीनी मिलों के पास उत्पादन के लिए पर्याप्त गन्ना ही नहीं बचा।
केजरीवाल ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा,
"महज 17 दिनों के भीतर देश में चीनी की कीमतें करीब 20 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ चुकी हैं। जो चीनी कुछ दिन पहले तक बाजार में 46 रुपये प्रति किलो बिक रही थी, वह अब बढ़कर 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।"
विदेशी मुद्रा बचाने के चक्कर में दूसरा संकट?
सरकार की दलील थी कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने से देश के क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) का आयात बिल कम होगा और विदेशी मुद्रा बचेगी। लेकिन इस नीति के दूसरे पहलुओं पर अरविंद केजरीवाल ने गंभीर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि जिस विदेशी मुद्रा को तेल आयात रोकने के नाम पर बचाया जा रहा था, अब वही विदेशी मुद्रा देश से बाहर जाएगी क्योंकि भारत को मजबूरन विदेशों से चीनी का आयात (Import) करना पड़ेगा।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कभी भारत दुनिया के बड़े चीनी निर्यातक देशों में शुमार हुआ करता था, लेकिन गलत और अदूरदर्शी फैसलों के कारण अब देश में चीनी आयात करने की नौबत आ गई है।
वाहन चालकों की समस्याएं और आर्थिक बोझ
ईंधन में इथेनॉल के मिश्रण को लेकर भी आम जनता की तरफ से लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। जानकारों और वाहन चालकों का एक बड़ा वर्ग यह मानता है कि उच्च इथेनॉल ब्लेंडिंग वाले पेट्रोल से गाड़ियों के इंजन की कार्यक्षमता (Mileage) पर नकारात्मक असर पड़ रहा है, जिससे गाड़ियों के पार्ट्स जल्दी खराब हो रहे हैं।
- गाड़ियों पर असर: अधिक इथेनॉल वाले पेट्रोल से गाड़ियों की माइलेज घटने की शिकायतें आम हैं।
- घरेलू बजट: चीनी के दामों में 20 रुपये प्रति किलो तक की तेजी ने रसोई का गणित बिगाड़ दिया है।
- व्यापार संतुलन: एक्सपोर्टर से इम्पोर्टर बनने की कगार पर पहुंचा भारत का चीनी बाजार।
नीतिगत फैसलों पर उठ रहे सवाल
अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार के पिछले कई बड़े फैसलों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि नीतिगत स्तर पर दूरदर्शिता की कमी साफ झलकती है। उन्होंने नोटबंदी और कोरोना काल के प्रबंधन का हवाला देते हुए कहा कि जब तक फैसलों के दूरगामी परिणामों का आकलन नहीं किया जाएगा, तब तक देश की जनता को इसी तरह महंगाई और परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि आम जनता को अब इन आर्थिक मोर्चों पर खुद को ठगा सा महसूस हो रहा है क्योंकि नीति निर्माताओं के फैसलों का सीधा बोझ आम आदमी की रसोई और जेब पर पड़ रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. अचानक चीनी के दाम क्यों बढ़े हैं?
विशेषज्ञों और नेताओं के अनुसार, गन्ने के एक बड़े हिस्से को चीनी की बजाय इथेनॉल बनाने में इस्तेमाल किए जाने के कारण चीनी का कुल उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिससे बाजार में इसकी किल्लत पैदा हुई है।
2. इथेनॉल क्या है और इसे पेट्रोल में क्यों मिलाया जाता है?
इथेनॉल एक प्रकार का अल्कोहल है जिसे गन्ने के शीरे या अन्य बायोमास से तैयार किया जाता है। पेट्रोल पर देश की निर्भरता और आयात बिल को कम करने के लिए सरकार इसे पेट्रोल में मिलाती है।
3. पिछले कुछ दिनों में चीनी की कीमतों में कितना अंतर आया है?
दावों के मुताबिक, पिछले 17 दिनों के भीतर खुदरा बाजार में चीनी की कीमतें लगभग 46 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 65 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं।