वाराणसी की ऐतिहासिक आबोहवा में सितंबर 2026 की इस ठंडी रात का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ था। एशिया की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में शुमार काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के कैंपस में उस वक्त सन्नाटा चीख उठा जब बिरला छात्रावास के दर्जनों छात्र अचानक सड़कों पर उतर आए। मामला सिर्फ एक मामूली कहासुनी का नहीं था, बल्कि छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच लंबे समय से सुलगते असंतोष का लावे की तरह फूटना था। आधी रात के वक्त छात्रों का इस तरह प्रॉक्टोरियल बोर्ड के खिलाफ मोर्चा खोलना इस बात का गवाह था कि यूनिवर्सिटी कैंपस का आंतरिक तापमान अब खौल उठा है।
अस्पताल का वह विवाद जो बना बगावत की वजह
इस पूरे घटनाक्रम की जड़ें 13 सितंबर को घटी एक ऐसी घटना से जुड़ी हैं, जिसने एडमिनिस्ट्रेशन और स्टूडेंट्स के रिश्तों में गहरी दरार डाल दी है। छात्रों के मुताबिक, उस दिन उनका एक साथी छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसे तुरंत इलाज के लिए बीएचयू के ही ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां अक्सर आने वाली इमरजेंसी भीड़ और व्यवस्थाओं के बीच इलाज में कथित तौर पर हीलाहवाली देखने को मिली। जब घायल छात्र के तड़पने की खबर बिरला छात्रावास तक पहुंची, तो उसके सहपाठी भी मदद के लिए ट्रॉमा सेंटर दौड़ पड़े।
यहीं से स्थिति ने एक नया और खतरनाक मोड़ ले लिया। छात्रों का आरोप है कि जब वे अस्पताल में अपने साथी के इलाज के लिए डॉक्टरों से गुहार लगा रहे थे, तभी प्रॉक्टोरियल बोर्ड के अधिकारी भी वहां आनन-फानन में पहुंच गए। मदद करने के बजाय अधिकारियों का रवैया कथित तौर पर बेहद रुखा और तानाशाही भरा था। छात्रों का दावा है कि बोर्ड के लोगों ने न सिर्फ उनके साथ बदसलूकी की, बल्कि हालात को संभालने के बजाय वहां तनाव को और ज्यादा भड़का दिया।
नोटिसों का दौर और 'एकतरफा' इंसाफ के आरोप
विवाद यहीं शांत नहीं हुआ। बीतते दिनों के साथ यूनिवर्सिटी प्रशासन का शिकंजा और कसता चला गया। मंगलवार को जब कई छात्रों को उनके ईमेल इनबॉक्स में आधिकारिक नोटिस मिले, तो कैंपस का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। इन नोटिसों में छात्रों पर मारपीट और अनुशासनहीनता के गंभीर आरोप मढ़े गए थे और उन्हें तत्काल प्रभाव से अनुशासन समिति के सामने पेश होने का फरमान सुनाया गया था।
छात्रों के तीखे सवाल:
- क्या घायल साथी की मदद करना गुनाह है?
- प्रॉक्टोरियल बोर्ड सिर्फ एकतरफा कार्रवाई क्यों कर रहा है?
- क्या छात्रों की बात सुने बिना उन्हें दोषी मान लिया जाएगा?
छात्रों का कहना है कि प्रशासन ने बिना किसी निष्पक्ष जांच के, केवल अधिकारियों के इशारे पर उन्हें निशाना बनाना शुरू कर दिया है। जिन छात्रों को नोटिस भेजे गए हैं, उनमें से कई का दावा है कि वे उस विवाद के दौरान मौके पर मौजूद भी नहीं थे, या फिर उनका रोल सिर्फ अपने साथी को अस्पताल ले जाने तक सीमित था।
रात के सन्नाटे में तेज रफ्तार कार से मचा हड़कंप
मामला सिर्फ प्रशासनिक तानाशाही तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धरने के दौरान एक ऐसी घटना घटी जिसने वहां मौजूद हर शख्स को चौंका दिया। जब छात्र बिरला छात्रावास के बाहर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे थे, तभी अंधेरे को चीरती हुई एक बेहद तेज रफ्तार कार वहां से गुजरी। वाहन की स्पीड इतनी ज्यादा थी कि धरना दे रहे छात्रों में हड़कंप मच गया।
गनीमत यह रही कि छात्रों ने बेहद मुस्तैदी दिखाते हुए खुद को बचा लिया, वरना एक बड़ा हादसा हो सकता था। इस घटना के बाद छात्रों का गुस्सा और ज्यादा भड़क उठा। उन्हें अंदेशा हुआ कि यह कोई सामान्य दुर्घटना नहीं थी, बल्कि उन्हें डराने या धमकाने की कोई सोची-समझी साजिश हो सकती है।
चीफ प्रॉक्टर कार्यालय का घेराव और डिजिटल सबूतों का दावा
घटना के तुरंत बाद सतर्क हुए छात्रों ने उस तेज रफ्तार कार का नंबर नोट किया और सीधे चीफ प्रॉक्टर कार्यालय का रुख किया। छात्रों के हाथ एक बड़ा डिजिटल सबूत भी लगा है। उनका दावा है कि उनके पास प्रॉक्टोरियल बोर्ड के एक अधिकारी के कथित दुर्व्यवहार का स्पष्ट वीडियो मौजूद है। छात्र इस वीडियो को आधार बनाकर उच्चाधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
"हम न्याय मांग रहे हैं, भीख नहीं। अगर हमारे साथी गलत हैं तो उन पर कार्रवाई हो, लेकिन प्रॉक्टोरियल बोर्ड के अधिकारियों की मनमानी और ज्यादती को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमारे पास वीडियो सबूत हैं, जिन्हें हम सामने लाएंगे।" - आंदोलनरत छात्र
आगे क्या होगा? बीएचयू प्रशासन की अग्निपरीक्षा
इस ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर काशी हिंदू विश्वविद्यालय की आंतरिक सुरक्षा और छात्र-प्रशासन संबंधों पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। एक तरफ जहां छात्र अपनी जिद पर अड़े हैं और साफ कह चुके हैं कि जब तक निष्पक्ष जांच कमेटी का गठन नहीं होता और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती, वे पीछे नहीं हटेंगे। वहीं दूसरी ओर, यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन इस बात पर जोर दे रहा है कि कैंपस में किसी भी तरह की अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
फिलहाल, कैंपस में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और सुरक्षा बलों को भी एहतियात के तौर पर सतर्क कर दिया गया है। आने वाले घंटे यह तय करेंगे कि बीएचयू प्रशासन इस संवेदनशील मामले को बातचीत के जरिए सुलझाता है या फिर यह टकराव और अधिक विकराल रूप धारण करता है। छात्रों की निगाहें अब पूरी तरह से कुलपति कार्यालय और जांच समितियों के अगले कदमों पर टिकी हुई हैं।