बिहार के मौसम को लेकर एक बार फिर बड़ी और अहम अपडेट सामने आ रही है। राज्य के आसमान में मंडराते बादलों और बदलते हवा के रुख ने एक बार फिर प्रशासनिक तंत्र और आम जनजीवन को सतर्क कर दिया है। मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य के सभी 38 जिलों में बारिश और आंधी-तूफान को लेकर यलो अलर्ट जारी किया है। सितंबर के इस आखिरी चरण में मानसून की विदाई से पहले यह अंतिम दौर का तेवर लोगों के लिए परेशानी का सबब भी बन सकता है और उमस भरी गर्मी से बड़ी राहत भी दिला सकता है।
सभी 38 जिलों पर मंडराया मौसमी संकट
मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, बिहार के किसी एक या दो हिस्से में नहीं, बल्कि उत्तर से लेकर दक्षिण और पूरब से लेकर पश्चिम तक यानी सभी 38 जिलों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बिगड़ने वाला है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में झमाझम बारिश के साथ मेघ गर्जन यानी बादलों के गरजने की पूरी संभावना है। इस दौरान हवा की रफ्तार भी काफी तेज रह सकती है, जो लोगों को चिंता में डालने के लिए काफी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झक्कड़ हवाएं चल सकती हैं। ऐसे में कमजोर छतों, होर्डिंग्स और पुराने पेड़ों के पास रहना खतरनाक साबित हो सकता है। मौसम विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि हवा की इस रफ्तार के बीच खुले में रहना जानलेवा हो सकता है।
वज्रपात (आकाशीय बिजली) का सबसे बड़ा खतरा
बारिश और आंधी के साथ-साथ इस मौसम का सबसे डरावना पहलू आकाशीय बिजली यानी वज्रपात है। बादलों की गडग़ड़ाहट के बीच कई इलाकों में वज्रपात गिरने की आशंका लगातार बनी हुई है। पिछले कुछ वर्षों में बिहार में आकाशीय बिजली गिरने से होने वाली मौतों का आंकड़ा डराने वाला रहा है, यही वजह है कि सरकार और मौसम विभाग इस पर सबसे ज्यादा जोर दे रहे हैं।
प्रशासन ने साफ निर्देश दिए हैं कि जब भी आसमान में काले बादल छाएं और गरज-चमक शुरू हो, लोग तुरंत सुरक्षित स्थानों या पक्के मकानों में शरण लें। खेतों में काम कर रहे किसानों और मवेशी चराने वालों के लिए यह समय बेहद संवेदनशील है।
इन जिलों में दिखेगा सबसे ज्यादा असर
मौसम विभाग के विस्तृत बुलेटिन के अनुसार, उत्तर-पश्चिम, उत्तर-मध्य, उत्तर-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-मध्य बिहार के तमाम जिलों में बादलों का डेरा रहेगा। इसके अलावा दक्षिण-पूर्व बिहार के भागलपुर, मुंगेर और जमुई जैसे इलाकों में भी एक-दो स्थानों पर झमाझम बौछारें पड़ने की पूरी संभावना है।
प्रभावित होने वाले प्रमुख जिलों की सूची में ये नाम शामिल हैं:
- पश्चिम चंपारण और पूर्वी चंपारण
- गोपालगंज, सीवान और छपरा (सारण)
- सीतामढ़ी, शिवहर और मुजफ्फरपुर
- वैशाली, दरभंगा और मधुबनी
- सुपौल, अररिया, किशनगंज और सहरसा
- मधेपुरा, पूर्णिया और कटिहार
- पटना, भोजपुर और बक्सर
- रोहतास, कैमूर, अरवल और जहानाबाद
- नालंदा, नवादा, गया और औरंगाबाद
- शेखपुरा, लखीसराय, बेगूसराय और खगड़िया
- मुंगेर, जमुई, बांका, भागलपुर और समस्तीपुर
कब तक रहेगा मौसम का यह तेवर?
मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, बारिश और खराब मौसम का यह दौर आगामी 26 सितंबर तक लगातार बना रह सकता है। इस दौरान कुछ विशेष जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश भी देखने को मिल सकती है। हालांकि, इस बारिश के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी और लोगों को लंबे समय से परेशान कर रही उमस भरी गर्मी से हमेशा के लिए निजात मिल जाएगी।
बीते 24 घंटों की बात करें तो राज्य के कुछ हिस्सों खासकर जमुई में हल्की बारिश दर्ज की गई है। वहीं दूसरी ओर, राजधानी पटना और गया जैसे बड़े शहरों में दिन के वक्त तेज धूप निकलने के कारण लोग चिपचिपी गर्मी और उमस से बेहाल नजर आए। धूप और बादलों की इस लुकाछिपी ने लोगों के शरीर में बेचैनी बढ़ा दी थी, लेकिन अब बारिश का यह नया स्पेल इस घुटन भरे माहौल को पूरी तरह धो डालेगा।
प्रशासन और मौसम विभाग की खास अपील
आपदा प्रबंधन विभाग और मौसम विज्ञान केंद्र ने आम जनता से अपील की है कि वे इस खराब मौसम के दौरान पूरी तरह सतर्क और सावधान रहें। किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें, बल्कि मौसम विभाग की आधिकारिक चेतावनियों को ही प्राथमिकता दें।
आम नागरिकों के लिए जरूरी सावधानियां:
- पेड़ों से दूरी: आंधी-तूफान के समय भूलकर भी किसी बड़े या पुराने पेड़ के नीचे शरण न लें, क्योंकि इन पर बिजली गिरने का खतरा सबसे ज्यादा होता है।
- बिजली के खंभे: ट्रांसफार्मर, बिजली के खंभे और खुले तारों से उचित दूरी बनाकर रखें।
- खुले मैदान: यदि आप खेत या किसी खुले मैदान में हैं, तो तुरंत किसी पक्के मकान या सुरक्षित शेड के नीचे चले जाएं।
- यात्रा से बचें: बहुत जरूरी न हो तो खराब मौसम के दौरान अनावश्यक रूप से दोपहिया या खुले वाहनों से यात्रा करने से बचें।
कुल मिलाकर कहें तो, बिहार में मानसून का यह आखिरी दौर अपने साथ तीखे तेवर लेकर आया है। जहां एक ओर यह बारिश खेतों में खड़ी फसलों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है, वहीं दूसरी ओर आंधी और वज्रपात का खतरा किसी बड़ी अनहोनी को न्योता न दे, इसके लिए हर नागरिक को सजग रहने की सख्त जरूरत है। अपने इलाके के मौसम के अपडेट पर लगातार नजर बनाए रखें और सुरक्षित रहें।