वाराणसी की सांस्कृतिक और शैक्षणिक नगरी इन दिनों एक बेहद अनूठे और ग्रामीण भारत की खुशबू समेटे आयोजन की गवाह बन रही है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के ऐतिहासिक डेयरी फार्म परिसर में शनिवार, 19 सितंबर 2026 को दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला और भव्य पशु मेले का धमाकेदार आगाज हुआ। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के तत्वावधान में आयोजित इस दो दिवसीय महाकुंभ में देश के कोने-कोने से पहुंचे पशुपालक और उनकी शान बढ़ा रहे उन्नत नस्ल के पशु मुख्य आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
देशभर से पहुंचे पशुपालक, सजी उन्नत नस्लों की नुमाइश
इस मेगा इवेंट में हिस्सा लेने के लिए हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, झारखंड और उत्तर प्रदेश समेत करीब 10 से 12 राज्यों के प्रतिष्ठित पशुपालक वाराणसी पहुंचे हैं। बीएचयू का डेयरी फार्म परिसर इस समय किसी हाई-टेक कृषि और पशुपालन हब की तरह नजर आ रहा है। यहाँ गाय, भैंस, बकरी और घोड़ों की ऐसी-ऐसी उन्नत नस्लें देखने को मिल रही हैं, जिन्हें देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंच रहे हैं।
कई पशुपालक तो प्रतियोगिता शुरू होने से दो दिन पहले ही अपने बेशकीमती और दुधारू पशुओं के साथ वाराणसी डेरा डाल चुके थे। मेले के पहले ही दिन से परिसर में दर्शकों और किसानों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है, जो पशुपालन की आधुनिक दुनिया की झलक पाने को उत्सुक हैं।
केंद्र और राज्य सरकार की साझा पहल का असर
आयोजकों के मुताबिक, केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की संयुक्त पहल के तहत इस कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य देश के दूर-दराज के इलाकों में बैठे पशुपालकों को दुग्ध विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। भारत के कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था में डेयरी सेक्टर रीढ़ की हड्डी माना जाता है, और इस तरह के आयोजन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने का काम कर रहे हैं।
गुरु रविदास आश्रम काशी से जुड़े संत प्रकाशानंद ने इस अवसर पर अपनी बात रखते हुए कहा कि विभिन्न राज्यों से आए किसानों के बीच अपनी नस्ल के सर्वश्रेष्ठ पशुओं को लाने की होड़ लगी है। यह न सिर्फ प्रतियोगिता है, बल्कि ज्ञान का एक ऐसा आदान-प्रदान है जो आने वाले समय में डेयरी उद्योग की दिशा तय करेगा।
दूध उत्पादन क्षमता के आधार पर मिलेगा बड़ा इनाम
इस दो दिवसीय मेले का सबसे रोमांचक हिस्सा विभिन्न श्रेणियों में होने वाली प्रतियोगिताएं हैं। पशुओं की दुग्ध उत्पादन क्षमता, उनके स्वास्थ्य, शारीरिक बनावट और अन्य निर्धारित मानकों के आधार पर उनका मूल्यांकन किया जा रहा है।
- प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार: सर्वाधिक दूध देने वाले और मानकों पर खरा उतरने वाले पशुओं के मालिकों को आकर्षक पुरस्कारों से नवाजा जाएगा।
- प्रशस्ति पत्र और सम्मान: प्रतियोगिता में शामिल होने वाले सभी सम्मानित पशुपालकों को प्रमाण पत्र दिए जाएंगे ताकि उनका हौसला बुलंद रहे।
- प्रेरणास्त्रोत: इन पुरस्कारों का मकसद अन्य किसानों को भी बेहतर और उन्नत पशुपालन अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
वैज्ञानिक पशुपालन और आधुनिक तकनीक की मिलेगी पाठशाला
केवल प्रदर्शन और प्रतियोगिताओं तक ही यह मेला सीमित नहीं है, बल्कि इसके तकनीकी सत्रों में पशुपालकों को भविष्य के लिए तैयार किया जा रहा है। कृषि और डेयरी सेक्टर के शीर्ष विशेषज्ञ किसानों को वैज्ञानिक तरीकों से रूबरू करा रहे हैं।
विशेषज्ञों द्वारा निम्नलिखित विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं:
- पशुओं का संतुलित और पौष्टिक आहार प्रबंधन।
- स्वास्थ्य देखभाल और समय पर टीकाकरण की महत्ता।
- दुग्ध उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के वैज्ञानिक और आधुनिक नुस्खे।
- सरकार की तमाम पशुपालन और डेयरी विकास योजनाओं की जमीनी जानकारी।
पर्यावरण संरक्षण और सामूहिक भागीदारी पर जोर
कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण और पशुपालन के आपसी तालमेल पर भी विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. नलिनी पाठक और प्रधानाचार्य प्रियंका यादव ने संयुक्त रूप से कहा कि पर्यावरण संरक्षण के बिना टिकाऊ कृषि और पशुपालन की कल्पना नहीं की जा सकती। विद्यार्थियों और युवाओं की इसमें सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है ताकि आने वाली पीढ़ी प्राकृतिक संसाधनों के साथ सामंजस्य बिठाते हुए आगे बढ़ सके।
इस अवसर पर गंगा सेवक जय विश्वकर्मा, पद्मावती चतुर्वेदी, ममता सिंह, हृदयांश सिंह, सुरेंद्र सिंह, भीम सिंह और राजेश शुक्ला जैसे गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे, जिन्होंने आयोजन की सफलता में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में मील का पत्थर
सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि किसानों की आय में लगातार वृद्धि हो और डेयरी सेक्टर इसमें सबसे बड़ा मददगार साबित हो। इस प्रकार के आयोजनों से न केवल पशुपालकों को एक राष्ट्रीय मंच मिलता है, बल्कि उन्हें देश भर की बेस्ट प्रैक्टिसेज सीखने का मौका भी मिलता है।
आगामी रविवार यानी 20 सितंबर को इस दो दिवसीय मेले का समापन होगा, जिसके बाद विजेताओं के नामों की घोषणा कर उन्हें सम्मानित किया जाएगा। तब तक बीएचयू का यह डेयरी फार्म देश भर के पशु प्रेमियों, वैज्ञानिकों और किसानों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहेगा।