धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी वाराणसी इन दिनों एक ऐतिहासिक और रोमांचक आयोजन का गवाह बनने के लिए पूरी तरह तैयार है। अक्टूबर के महीने में काशी के आसमान में वायुसेना के लड़ाकू विमानों की गर्जना गूंजेगी, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से लाखों लोगों के जुटने की उम्मीद है। इस मेगा इवेंट को लेकर जिला प्रशासन, पुलिस और भारतीय वायुसेना ने अपनी कमर कस ली है। आयोजन के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा से बचने और सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर बैठकों का दौर तेज हो गया है।
20 लाख की संभावित भीड़ और सुरक्षा पर बड़ा मंथन
वाराणसी में प्रस्तावित इस भव्य एयर शो को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। हाल ही में सर्किट हाउस में एयरफोर्स और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच एक अहम संयुक्त बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य एजेंडा भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण, पार्किंग और पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था था। अधिकारियों का अनुमान है कि इस कार्यक्रम में लगभग 20 लाख लोग शामिल हो सकते हैं। प्रयागराज में हुए एयर शो के मुकाबले इस बार काशी में और भी अधिक भीड़ उमड़ने की संभावना जताई जा रही है, जिसे ध्यान में रखते हुए ब्लू प्रिंट तैयार किया जा रहा है।
भीड़ के भारी सैलाब को नियंत्रित करना किसी चुनौती से कम नहीं है। यही वजह है कि प्रशासन ने अभी से हर बारीक पहलू पर विचार करना शुरू कर दिया है। शहर के भीतर और आयोजन स्थल के आसपास यातायात को सुचारू रखने के लिए विशेष रूट डायवर्जन और पार्किंग जोन चिह्नित किए जा रहे हैं।
गंगा पार रेती क्षेत्र बनेगा मुख्य दर्शक केंद्र
काशी के घाटों की भव्यता और ऐतिहासिक महत्व अपने आप में अनूठा है, लेकिन हाल ही में आई बाढ़ और घाटों की मौजूदा स्थिति को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करना अनिवार्य हो गया है। इसे ध्यान में रखते हुए अधिकारियों ने एक नया विकल्प निकाला है। बैठक में यह चर्चा प्रमुखता से हुई कि गंगा नदी के उस पार फैली रेती को मुख्य दर्शक क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाए।
रेती क्षेत्र में बड़े पैमाने पर लोगों के बैठने की व्यवस्था की जा सकती है ताकि आसमान में होने वाले करतबों को पर्यटक और स्थानीय नागरिक बिना किसी बाधा के देख सकें। इसके अलावा, घाटों पर अत्यधिक दबाव को कम करने के लिए भी यह रणनीति बेहद कारगर साबित होगी।
सात दिनों तक चलेगा संयुक्त निरीक्षण अभियान
योजना को कागजों से उतारकर जमीन पर लागू करने के लिए एक विशेष रणनीति बनाई गई है। तय किया गया है कि रक्षा मंत्रालय, भारतीय वायुसेना और जिला प्रशासन के अधिकारियों की एक संयुक्त टीम लगातार सात दिनों तक कार्यक्रम स्थल का मैराथन निरीक्षण करेगी। यह टीम सुरक्षा मानकों, आपातकालीन निकास मार्गों, चिकित्सा शिविरों और दर्शकों की आवाजाही के रास्तों का बारीकी से जायजा लेगी ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
- 20 अक्टूबर से शुरू होगा अभ्यास: मुख्य आयोजन से पहले वायुसेना के विमानों का रिहर्सल 20 अक्टूबर से शुरू होने की संभावना है।
- 22 से 25 अक्टूबर तक मुख्य आयोजन: काशी के आसमान में रोमांचक एयर शो का मुख्य कार्यक्रम इस अवधि के दौरान आयोजित किया जाएगा।
- प्रधानमंत्री के आगमन की संभावना: एयर शो के अंतिम दिन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी इस भव्य आयोजन में शामिल होने की प्रबल संभावना जताई जा रही है, हालांकि अभी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
यातायात और पार्किंग व्यवस्था पर विशेष जोर
वाराणसी जैसी घनी आबादी वाले शहर में 20 लाख लोगों का आना और जाना एक बहुत बड़ा प्रशासनिक टास्क है। इसे सुचारू बनाने के लिए कमिश्नरी स्तर के अधिकारियों ने शहर से बाहर ही बड़े पार्किंग स्थल बनाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। शहर के भीतर भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक रहेगी और लोगों को आयोजन स्थल तक पहुंचाने के लिए शटल बसों की व्यवस्था की जा सकती है।
मंडलायुक्त एस. राजलिंगम, पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल और जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार समेत तमाम वरिष्ठ अधिकारी इस पूरी व्यवस्था पर व्यक्तिगत रूप से नजर बनाए हुए हैं। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश भर से आने वाले सैलानी काशी की बेहतरीन मेहमाननवाज और एक सुरक्षित आयोजन का अनुभव लेकर लौटें।