देश की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित 19वें पर्यावरण एवं ऊर्जा सम्मेलन में इन दिनों बिहार के ऊर्जा मॉडल की गूंज सुनाई दे रही है। बंगाल वाणिज्य एवं उद्योग मंडल की ओर से ले मेरिडियन होटल में आयोजित इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम का मुख्य विषय 'बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में आत्मनिर्भर भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा' रखा गया था। इस सम्मेलन में बिहार राज्य ने एक प्रमुख सहभागी के रूप में शिरकत की और देश-दुनिया के सामने अपनी अनूठी विद्युत गाथा को प्रस्तुत किया।
बदलता बिहार: अंधेरे से उजाले तक का सफर
सम्मेलन को संबोधित करते हुए बिहार के ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने 'हर घर बिजली: बिहार की ग्रामीण विद्युतीकरण यात्रा' विषय पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि कभी बुनियादी विद्युत पहुंच की गंभीर चुनौतियों से जूझने वाला बिहार आज इस मामले में एक नजीर बन चुका है। राज्य ने हर घर और हर खेत तक बिजली पहुंचाने के लिए जरूरी मजबूत आधारभूत ढांचा यानी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर लिया है।
ऊर्जा मंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि आज की तारीख में ऊर्जा सुरक्षा महज एक तकनीकी लक्ष्य भर नहीं है, बल्कि यह राज्य की समग्र विकास यात्रा की सबसे मजबूत नींव है। उन्होंने जोर देकर कहा कि निरंतर निवेश, मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रभावी नीतियों के जरिए किसी भी राज्य की तकदीर बदली जा सकती है, और बिहार इसका जीता-जागता उदाहरण है।
बुनियादी ढांचे का विस्तार और बढ़ती मांग
बिहार सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में विद्युत उत्पादन, पारेषण और वितरण यानी ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन के क्षेत्र में भारी-भरकम निवेश किया है। राज्य के कोने-कोने में नए विद्युत ग्रिड, उपकेंद्र और पारेषण लाइनों का जाल बिछाया गया है। इसका नतीजा यह है कि आज ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को निर्बाध रूप से 24 घंटे बिजली मिल रही है।
वर्तमान समय में राज्य की अधिकतम विद्युत मांग लगभग 9,475 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। बढ़ती हुई इस ऊर्जा मांग को आसानी से पूरा करने और भविष्य की जरूरतों से दो कदम आगे रहने के लिए सरकार बिजली के बुनियादी ढांचे को लगातार और अधिक सुदृढ़ कर रही है।
हर घर सोलर और कृषि फीडर का सौर्यीकरण
पारंपरिक ऊर्जा के साथ-साथ बिहार सरकार का पूरा फोकस स्वच्छ और हरित ऊर्जा यानी ग्रीन एनर्जी पर भी है। सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए राज्य में कई महत्वाकांक्षी योजनाएं चलाई जा रही हैं:
- गरीब परिवारों के लिए रूफटॉप सोलर: राज्य के बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) परिवारों के लिए 1 किलोवाट क्षमता के छत पर स्थापित सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने का काम तेजी से चल रहा है। इस योजना के तहत शुरुआती चरण में 2.5 लाख परिवारों को आच्छादित किया जा रहा है, जिसे अक्टूबर 2026 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसके बाद अगले चरण में इतने ही और परिवारों को इस योजना से जोड़ा जाएगा।
- किसानों के लिए सौर ऊर्जा: कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के वास्ते राज्य के कुल 2,560 कृषि फीडरों के सौर्यीकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इनमें से लगभग 2,000 से 2,200 कृषि फीडरों को पहले ही सौर ऊर्जा से जोड़ा जा चुका है, जिससे किसानों को सस्ती और भरोसेमंद बिजली मिल रही है।
निवेशकों के लिए खुला आमंत्रण
कार्यक्रम के दौरान ऊर्जा मंत्री ने देश-विदेश के उद्योग जगत के दिग्गजों और निवेशकों को बिहार की इस विकास यात्रा में साझीदार बनने का खुला न्योता दिया। उन्होंने कहा कि राज्य के ऊर्जा क्षेत्र में नई परियोजनाओं और निवेश के लिहाज से असीम संभावनाएं मौजूद हैं। बिहार सरकार निवेशकों को हरसंभव प्रशासनिक और ढांचागत सहयोग देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में देश और दुनिया की कई नामचीन हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इनमें ऊर्जा दक्षता ब्यूरो के महानिदेशक कृष्ण चंद्र पाणिग्राही, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के पूर्व महानिदेशक डॉ. अजय माथुर, एनटीपीसी लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक विजय गोयल और जेएसडब्ल्यू एनर्जी के उपाध्यक्ष अभिषेक चटर्जी प्रमुख रूप से शामिल रहे। इसके अलावा बांग्लादेश, नॉर्वे और डेनमार्क जैसे देशों की अंतरराष्ट्रीय भागीदारी ने इस सम्मेलन के वैश्विक महत्व को और अधिक बढ़ा दिया।
बदलते दौर में बिहार ने जिस प्रकार अपनी ऊर्जा जरूरतों को न केवल पूरा किया है, बल्कि सरप्लस और ग्रीन एनर्जी की ओर कदम बढ़ाए हैं, वह आने वाले समय में देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक बड़ा उदाहरण साबित होने जा रहा है।