बिहार के जहानाबाद जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां व्यवस्था की खामियों और नियमों की अनदेखी पर सवाल उठाना एक स्थानीय पत्रकार को भारी पड़ गया। घोषी प्रखंड के जीविका प्रभारी और उनके चालक पर एक पत्रकार को जान से मारने की धमकी देने, गालियां देने और दो लाख रुपये की भारी-भरकम रंगदारी मांगने के गंभीर आरोप में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। इस घटना के बाद से स्थानीय मीडिया जगत और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
निजी वाहन के सरकारी इस्तेमाल पर उठाया था सवाल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब स्थानीय पत्रकार अजीत कुमार दत्ता ने सरकारी कार्यालय में कथित तौर पर नियमों के विरुद्ध चल रही गाड़ियों के इस्तेमाल पर सवाल खड़े किए। दो दिन पहले पत्रकार ने घोषी स्थित जीविका कार्यालय में उपयोग की जा रही एक स्कॉर्पियो गाड़ी (संख्या BR02PB-4989) और उसके सरकारी भुगतान को लेकर पड़ताल की थी।
पत्रकार का मुख्य सवाल यह था कि परिवहन नियमों और सरकारी प्रावधानों के विपरीत, कॉमर्शियल (पीली नंबर प्लेट) वाहनों के बजाय प्राइवेट नंबर प्लेट वाली गाड़ियों का उपयोग सरकारी कार्यों में किस आधार पर किया जा रहा है और इसका भुगतान कैसे हो रहा है। इस व्यवस्था पर सवाल पूछना ही जीविका प्रभारी और उनके सहयोगियों को नागवार गुजरा।
फोन पर मिली गालियां और जान से मारने की धमकी
आरोप है कि पत्रकार द्वारा तीखे और तथ्यात्मक सवाल पूछे जाने से जीविका प्रभारी अमित कौशिक बुरी तरह खफा हो गए। आरोप है कि उनके ही उकसावे पर चालक सिकंदर कुमार उर्फ उमेश कुमार ने पत्रकार को फोन किया। बातचीत के दौरान चालक ने न केवल अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया और भद्दी-भद्दी गालियां दीं, बल्कि पत्रकार को जान से खत्म करने की धमकी भी डाली।
दो लाख रुपये की रंगदारी की मांग
धमकियों का सिलसिला यहीं नहीं थका। आरोपी चालक ने बातचीत के दौरान यह भी कहा कि यदि उस स्कॉर्पियो गाड़ी को जीविका कार्यालय से हटवाया गया या उसके खिलाफ कोई और कार्रवाई की कोशिश की गई, तो इसके एवज में दो लाख रुपये बतौर रंगदारी देने होंगे। इस तरह की अवैध मांग और खुलेआम धमकी से पत्रकार और उनके परिजन दहशत में आ गए।
नगर थाने में दर्ज कराई गई नामजद शिकायत
इस पूरी घटना से आहत और असुरक्षित महसूस कर रहे पत्रकार अजीत कुमार दत्ता ने बिना देर किए कानून का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने जहानाबाद के नगर थाने में लिखित आवेदन देकर अपनी आपबीती सुनाई। आवेदन में उन्होंने घोषी प्रखंड के जीविका प्रभारी अमित कौशिक और चालक सिकंदर कुमार को नामजद आरोपी बनाया है।
पत्रकार की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए नगर थाना पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया और दोनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
पुलिस की जांच शुरू, तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं
मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस प्रशासन भी हरकत में आ गया है। नगर थाना के अधिकारियों का कहना है कि दर्ज कराई गई प्राथमिकी के आधार पर तकनीकी और कानूनी पहलुओं से जांच शुरू कर दी गई है।
- कॉल रिकॉर्डिंग और लोकेशन: पुलिस चालक द्वारा किए गए फोन कॉल के डिजिटल साक्ष्य खंगाल रही है।
- दस्तावेजी जांच: जीविका कार्यालय में उपयोग हो रहे वाहन के कागजातों और टेंडर प्रक्रिया की भी समीक्षा की जा सकती है।
- निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन: पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट करना है कि जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला
इस घटना की विभिन्न पत्रकारीय संगठनों और स्थानीय बुद्धिजीवियों ने कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन के कामकाज पर सवाल उठाने वाले पत्रकारों को इस तरह धमकियां मिलने लगेंगी, तो सच्चाई जनता के सामने कैसे आएगी। फिलहाल, हर किसी की निगाहें जहानाबाद पुलिस की इस जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं कि क्या आरोपी अधिकारियों तक कानून की पहुंच जल्द सुनिश्चित हो पाएगी या नहीं।