बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में कानून और व्यवस्था को चुनौती देते हुए चल रहे एक बड़े अवैध कारोबार का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पानापुर करियात थाना क्षेत्र के हरपुर गणेश गांव में पुलिस ने एक ऐसी अवैध फैक्ट्री पर छापा मारा, जहां धड़ल्ले से मशहूर ब्रांड 'गोगो' (Gogo) की नकली सिगरेट बनाई जा रही थी। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से 90 बोरे और दर्जनों कार्टन में भरी भारी मात्रा में नकली सिगरेट के अलावा इसके निर्माण में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल भी बरामद किया है। यह कार्रवाई सितंबर 2026 के दूसरे हफ्ते में हुई है, जिसने स्थानीय इलाकों में सनसनी फैला दी है।
गुप्त सूचना और कंपनी प्रतिनिधि की शिकायत पर हुई कार्रवाई
इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब गोगो ब्रांड कंपनी के स्थानीय प्रतिनिधि मुकेश कुमार ने पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया। कंपनी प्रतिनिधि की ओर से लिखित शिकायत दी गई थी कि बाजार में उनके ब्रांड के नाम पर बड़े पैमाने पर नकली सिगरेट बेची जा रही है, जिससे न केवल कंपनी को भारी वित्तीय नुकसान हो रहा है, बल्कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ किया जा रहा है।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पानापुर करियात थाना पुलिस ने फौरन एक विशेष टीम का गठन किया। कंपनी प्रतिनिधि को साथ लेकर पुलिस ने मंगलवार की देर शाम हरपुर गणेश गांव स्थित एक संदिग्ध ठिकाने पर अचानक छापेमारी (Raid) की। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से अवैध कारोबारियों में हड़कंप मच गया।
दो दर्जन से अधिक घरों में फैला था सिगरेट बनाने का जाल
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की शुरुआती जांच में जो खुलासे हुए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। जांच अधिकारियों के मुताबिक, यह अवैध कारोबार किसी एक कमरे तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका दायरा काफी बड़ा था। गांव के ही दो दर्जन से अधिक घरों में इस गोरखधंधे की जड़ें फैली हुई थीं।
मुख्य ठिकाने से जुड़े लोग ग्रामीण इलाकों के अलग-अलग घरों में कच्चा माल (जैसे तंबाकू, रैपर, फिल्टर और केमिकल) पहुंचाया करते थे। उन घरों में स्थानीय ग्रामीणों या कम मजदूरों की मदद से सिगरेट तैयार कराई जाती थी। जब सिगरेट पूरी तरह बनकर तैयार हो जाती थी, तब उसे वापस मुख्य ठिकाने पर लाकर बक्से और बोरियों में पैक किया जाता था। इसके बाद इसे सुनियोजित तरीके से बिहार के विभिन्न जिलों और बाजारों में खपाया जाता था।
दो नामजद आरोपियों पर केस दर्ज, पुलिस की दबिश जारी
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, जिन लोगों पर शिकंजा कसा गया है, उनमें हरपुर गणेश गांव के रहने वाले रविंद्र कुमार और दरियापुर गांव के रहने वाले अमन कुमार शामिल हैं।
- रविंद्र कुमार: हरपुर गणेश गांव, मुख्य संचालक (फरार)
- अमन कुमार: दरियापुर गांव, सह-आरोपी (फरार)
- बरामदगी: 90 बोरे और कई कार्टन नकली गोगो सिगरेट, भारी मात्रा में कच्चा माल
थानाध्यक्ष मुकेश कुमार ने मीडिया को जानकारी दी कि दोनों आरोपी पुलिस की दबिश शुरू होते ही अपने घरों से फरार हो गए हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की अलग-अलग टीमें संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं। पुलिस का दावा है कि जल्द ही दोनों आरोपियों को दबोच लिया जाएगा।
पश्चिम डीसीपी का बयान: सिंडिकेट के अन्य सदस्यों की तलाश तेज
इस पूरे मामले पर पश्चिमी डीसीपी सुचित्रा कुमारी ने प्रेस को बताया कि कंपनी की तरफ से जैसे ही लिखित आवेदन प्राप्त हुआ, पुलिस ने बिना देर किए रणनीति बनाई और इस अवैध सिंडिकेट पर धावा बोल दिया। प्रारंभिक जांच से यह स्पष्ट हो गया है कि ये आरोपी पिछले कई वर्षों से इस अवैध कारोबार को सुनियोजित तरीके से चला रहे थे।
डीसीपी ने आगे कहा कि, 'यह केवल एक जगह पर सिगरेट बनाने का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक पूरा सिंडिकेट काम कर रहा है। हम यह खंगालने की कोशिश कर रहे हैं कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। इसके अलावा, यह नकली सिगरेट किन-किन दुकानों और इलाकों में सप्लाई की जाती थी, इसका भी पूरा डेटा तैयार किया जा रहा है।'
जनस्वास्थ्य और राजस्व को बड़ा नुकसान
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की अवैध और नकली सिगरेट का सेवन आम जनता के स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक साबित हो सकता है। इनमें किस तरह के घटिया तंबाकू और रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है, इसका कोई पैमाना नहीं होता। साथ ही, इस तरह के अवैध निर्माण से सरकार को मिलने वाले टैक्स (राजस्व) का भी भारी नुकसान होता है। मुजफ्फरपुर पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि इस अवैध नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग भी जल्द ही कानून के शिकंजे में होंगे।