कृषि और ऊर्जा उत्पादन का अनूठा मेल, किसानों को मिलेगा आर्थिक संबल
बिहार में कृषि क्षेत्र को आधुनिक और लाभदायक बनाने की दिशा में एक नई पहल पर विचार किया जा रहा है। राज्य के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा है कि एग्रीवोल्टाइक्स तकनीक बिहार के किसानों के लिए अत्यधिक लाभकारी साबित हो सकती है। इस आधुनिक प्रणाली के जरिए किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ अपनी जमीनों पर सौर ऊर्जा का उत्पादन भी कर सकेंगे, जिससे उनकी अतिरिक्त आय में इजाफा होगा।
क्या है एग्रीवोल्टाइक्स तकनीक और इसके लाभ
एग्रीवोल्टाइक्स तकनीक (Agrivoltaics) एक ऐसी कृषि-इंजीनियरिंग प्रणाली है जिसमें एक ही भूमि पर एक ही समय में फसल उत्पादन और सौर ऊर्जा उत्पादन (फोटोवोल्टिक पैनलों के माध्यम से) दोनों कार्य एक साथ किए जाते हैं। इस तकनीक में सोलर पैनलों को खेतों के ऊपर कुछ ऊंचाई पर इस प्रकार स्थापित किया जाता है कि नीचे फसलों को पर्याप्त धूप और हवा मिलती रहे और कृषि कार्यों में कोई बाधा न आए।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस व्यवस्था से दोहरे लाभ मिलते हैं। एक तरफ जहां किसानों को जमीन के एक ही टुकड़े से फसल की पैदावार से आय होती है, वहीं दूसरी तरफ उत्पादित सौर ऊर्जा को बेचकर या कृषि कार्यों में उपयोग कर बिजली का खर्च बचाया जा सकता है। इसके अलावा, अत्यधिक धूप वाले दिनों में सोलर पैनल फसलों को चिलचिलाती धूप और अत्यधिक तापमान से भी बचाते हैं, जिससे वाष्पसर्जन (evapotranspiration) कम होता है और पानी की बचत होती है।
बिहार में कृषि और सौर ऊर्जा की संभावनाएं
बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है जहां बड़ी आबादी की आजीविका खेती पर निर्भर करती है। राज्य में लगातार बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए टिकाऊ कृषि तकनीकों को अपनाना समय की मांग बनता जा रहा है। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा द्वारा इस तकनीक को बढ़ावा दिए जाने के बयान से स्पष्ट है कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को कृषि के साथ जोड़ने पर गंभीर है। हालांकि, इस तकनीक को धरातल पर बड़े पैमाने पर उतारने के लिए किसानों को वित्तीय सहायता, तकनीकी प्रशिक्षण और उचित सरकारी सब्सिडी की रूपरेखा तैयार करनी होगी, ताकि छोटे और सीमांत किसान भी इसे आसानी से अपना सकें।