बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए होने वाले द्विवार्षिक चुनावों में दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है। इस सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उतरे छात्र नेता दिलीप कुमार पिछले 11 वर्षों से छात्र और शिक्षक हितों के मुद्दों को लेकर सक्रिय रहे हैं।
राज्य में विधान परिषद की आठ सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान निर्धारित किया गया है, जिसके परिणाम 27 अक्टूबर को आएंगे। चुनाव की इस सरगर्मी के बीच दरभंगा स्नातक सीट से मैदान में उतरे दिलीप कुमार का राजनीतिक सफर उनके लंबे संघर्ष और आंदोलनों के इर्द-गिर्द घूमता रहा है।
11 साल का संघर्ष और जेल यात्राएं
दिलीप कुमार का दावा है कि वह करीब 11 वर्षों से छात्र समस्याओं और शैक्षणिक अनियमितताओं के खिलाफ सड़क से लेकर संघर्ष कर रहे हैं। इस दौरान उन्हें प्रशासनिक कार्रवाई का भी सामना करना पड़ा है। उनके अनुसार, छात्र आंदोलनों की अगुवाई करने के कारण उन्हें अलग-अलग मौकों पर तीन बार जेल जाना पड़ा है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्हें पहली बार 11 फरवरी 2021 को गिरफ्तार कर फुलवारी जेल भेजा गया था, जहां उन्होंने 15 दिन बिताए। इसके बाद, दूसरी बार 6 दिसंबर 2024 को उनकी गिरफ्तारी हुई और उन्हें छह दिनों के लिए बेऊर जेल में रखा गया। हाल ही में, तीसरी बार 8 मई 2026 को गिरफ्तारी के बाद उन्हें 16 दिनों तक बेऊर जेल में रहना पड़ा। उनका आरोप है कि आंदोलनों के दौरान उन पर लाठीचार्ज हुआ, पुलिस ने मारपीट की और उन्हें सेल में भी बंद रखा गया।
प्रमुख परीक्षाओं और छात्र मुद्दों पर मुखरता
छात्र नेता के रूप में दिलीप कुमार ने कई प्रमुख परीक्षाओं और नियुक्तियों से जुड़े विवादों में आवाज उठाई है। इसमें TRE-4 शिक्षक भर्ती, बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं परीक्षा, लाइब्रेरियन बहाली और प्रायोगिक परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के मामले शामिल हैं। इन सभी मुद्दों पर वह लगातार विरोध प्रदर्शनों और आंदोलनों का हिस्सा रहे हैं।
शिक्षकों से जुड़े वादे और चुनावी एजेंडा
केवल छात्रों ही नहीं, बल्कि शिक्षकों के मुद्दों को भी दिलीप कुमार ने अपने चुनाव प्रचार के केंद्र में रखा है। उन्होंने सातवें वेतनमान समेत शिक्षकों की अन्य लंबित मांगों को विधान परिषद के सदन में पुरजोर तरीके से उठाने का वादा किया है। उनका कहना है कि यदि मतदाता उन्हें चुनकर भेजते हैं, तो वह सदन के भीतर शिक्षा जगत की समस्याओं के समाधान के लिए आवाज बुलंद करेंगे।
दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि इन चुनावों में छात्र और शिक्षक वर्ग दिलीप कुमार के लंबे संघर्ष और उनके चुनावी वादों को कितना समर्थन देता है। चुनाव के नतीजे 27 अक्टूबर को तय करेंगे कि इस निर्वाचन क्षेत्र में ऊँट किस करवट बैठता है।