बिहार की राजनीति में स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का एक वीडियो इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस वीडियो में उनके सहज और विनम्र व्यवहार की झलक मिलती है, जिसे लेकर जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने विपक्ष पर भी निशाना साधा है।
घटना एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान की है। मंच पर कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे, इसी दौरान बिहार सरकार की मंत्री लेसी सिंह की कलम अचानक नीचे गिर गई। पास ही मौजूद स्वास्थ्य मंत्री निशांत की नजर जब उस पर पड़ी, तो उन्होंने बिना किसी संकोच के तुरंत झुककर वह कलम उठाई। इसके बाद उन्होंने कलम को अपने माथे से लगाकर प्रणाम किया और अत्यंत आदर के साथ लेसी सिंह को वापस सौंप दिया। मंच पर मौजूद लेसी सिंह और अन्य लोग उनके इस आचरण को देखकर आश्चर्यचकित रह गए और उनके संस्कारों की सराहना की।
जेडीयू ने साझा किया वीडियो और साधा निशाना
जनता दल यूनाइटेड ने इस घटनाक्रम का वीडियो अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किया है। पार्टी ने इस वीडियो के साथ राजद नेता और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के एक पुराने वीडियो को भी जोड़ा है। जेडीयू द्वारा साझा किए गए उस पुराने वीडियो में तेजस्वी यादव पेन के एक डिब्बे से कई कलम निकालकर भीड़ की ओर उछालते या फेंकते नजर आ रहे हैं। पार्टी ने इन दोनों अलग-अलग दृश्यों को एक साथ रखकर राजनीतिक और सांस्कृतिक तुलना प्रस्तुत की है।
'फर्क संस्कारों का है'
वीडियो साझा करते हुए जेडीयू ने अपने आधिकारिक संदेश में लिखा कि यह फर्क साफ तौर पर संस्कारों का है। पार्टी ने लिखा, 'एक ओर वे हैं जिन्हें न कलम का सम्मान करना आता है और न ही लोगों का। वहीं दूसरी ओर निशांत जी हैं, जो कलम का सम्मान करना भली-भांति जानते हैं। उनकी विनम्रता और सहजता की पूरी दुनिया कायल है।' जेडीयू ने कलम को शिक्षा, ज्ञान और विद्या का प्रतीक बताते हुए निशांत कुमार के इस आचरण को उच्च परंपरा और विनम्रता से जोड़ा है।
राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर चर्चा
बिहार की राजनीति में इस छोटी सी घटना ने बड़े पैमाने पर ध्यान खींचा है। आम तौर पर राजनीतिक मंचों पर तीखे भाषणों और बयानों की सुर्खियां रहती हैं, लेकिन इस बार एक नेता के व्यक्तिगत आचरण और शिष्टाचार ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। सोशल मीडिया पर भी इस वीडियो को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, जहां एक तरफ जेडीयू समर्थक निशांत कुमार की सादगी की तारीफ कर रहे हैं, वहीं राजनीतिक हलकों में इसे आगामी गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है। इस पूरी घटना ने एक बार फिर बिहार की राजनीति में व्यक्तिगत संस्कारों और सार्वजनिक आचरण के मुद्दों को बहस के केंद्र में ला दिया है।